जयराम ठाकुर का आरोप: सीएम सुक्खू मंत्री पद का सपना दिखाकर विधायकों को अपने खेमे में जोड़ रहे
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने 27 सितंबर 2026 को शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वे विधायकों को मंत्री पद का प्रलोभन देकर अपना राजनीतिक गुट मज़बूत करने में जुटे हैं। ठाकुर के अनुसार, सुक्खू ने सड़क से लेकर विधानसभा तक कई बार विधायकों को मंत्री बनाने का वादा किया, लेकिन जब आलाकमान के सामने बात आई तो वे चुप्पी साध लेते हैं।
मुख्य आरोप: घोषणा और अमल के बीच की खाई
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने करीब एक वर्ष पहले विधानसभा के भीतर और एक जनसभा में एक विधायक को मंत्री बनाने की घोषणा की थी। उनका आरोप है कि वह विधायक विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाकर मुख्यमंत्री की ढाल बनते थे, जिसके बदले में सुक्खू ने उन्हें मंत्री पद देने का वादा किया। ठाकुर ने कहा, 'जहाँ मुख्यमंत्री का प्रवास होता है — चाहे दिल्ली हो, शिमला हो या मंडी — वह विधायक उनके साथ दिखाई देते हैं। उनके चेहरे पर बेचैनी साफ़ देखी जा सकती है।'
कांग्रेस प्रभारी की स्वीकृति से बढ़ा विवाद
ठाकुर ने कहा कि इस मामले में खुद कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश प्रभारी ने मीडिया को बताया है कि मंत्रिमंडल विस्तार का कोई प्रस्ताव उनके पास आया ही नहीं है। विपक्ष के नेता के अनुसार, यह बयान सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री पार्टी की प्रभारी को भी अँधेरे में रखकर विधायकों को लालच दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल पार्टी के भीतर असत्य बयानबाज़ी है, बल्कि विधानसभा की मर्यादा का भी उल्लंघन है।
कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ते कदम
ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब सरकार के चार वर्ष पूरे होने को हैं, तो मंत्री पद का प्रस्ताव कब तक आएगा? उन्होंने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा कि कार्यकाल समाप्त होने की ओर बढ़ते इस दौर में कोई विधायक मंत्री बनना भी चाहेगा या नहीं — यह भी अपने आप में एक प्रश्न है।
राजनीतिक खेमेबंदी का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुक्खू किसी विधायक को भय दिखाकर और किसी को पद का प्रलोभन देकर अपना गुट बनाए हुए हैं, ताकि उनकी कुर्सी सुरक्षित रहे। उनके अनुसार, यह रवैया प्रदेश की जनता, विधानसभा और पार्टी के विधायकों — तीनों के साथ असत्य आचरण है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार दिसंबर 2022 में सत्ता में आई थी, और तब से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें आती रही हैं। यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब सरकार का कार्यकाल अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पर्दे के पीछे शुरू हो चुकी हैं। विपक्ष की इस आक्रामकता को आगामी राजनीतिक जंग की आहट के रूप में भी देखा जा रहा है।