18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

विदेश मंत्री जयशंकर ने 2002-2003 बैच के IFS अधिकारियों से की मुलाकात, एक दशक की विदेश नीति पर चर्चा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
विदेश मंत्री जयशंकर ने 2002-2003 बैच के IFS अधिकारियों से की मुलाकात, एक दशक की विदेश नीति पर चर्चा

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर ने SSIFS में 2002-2003 बैच के IFS अधिकारियों से मुलाकात कर पिछले एक दशक की विदेश नीति, 'नेबरहुड फर्स्ट' रणनीति और बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका पर गहन चर्चा की।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 17 अगस्त को SSIFS, नई दिल्ली में 2002 और 2003 बैच के IFS अधिकारियों से मुलाकात की।
चर्चा का केंद्र रहा पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति का विकास , विशेषकर 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति।
जयशंकर ने बुनियादी ढाँचे, संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया।
जी-20 अध्यक्षता, जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षीय सुधार जैसे मुद्दों पर भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया।
मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम में विदेश नीति, आर्थिक कूटनीति और मीडिया प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया जाता है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भारतीय विदेश सेवा संस्थान (SSIFS) में 2002 और 2003 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारियों से मुलाकात की। ये अधिकारी संस्थान में चल रहे मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग ले रहे हैं, जिसका उद्देश्य अनुभवी राजनयिकों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के लिए तैयार करना है।

क्या बोले जयशंकर

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम कर रहे 2002 और 2003 बैच के IFS अधिकारियों से बात करके खुशी हुई। मैंने उनसे चर्चा की कि कैसे पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति विकसित हुई है, जिसकी शुरुआत पड़ोस से हुई।' उन्होंने इस बातचीत में भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को केंद्र में रखा और बताया कि किस प्रकार क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी सहयोग और आर्थिक एकीकरण को प्राथमिकता देकर पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नई दिशा दी गई है।

विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि इस नीति के अंतर्गत बुनियादी ढाँचे, संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को विशेष महत्व दिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के कई पड़ोसी देशों में राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल जारी है।

बदलती वैश्विक व्यवस्था पर ज़ोर

जयशंकर ने अधिकारियों को सचेत किया कि दुनिया इस समय अभूतपूर्व भू-राजनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। तेज़ी से बदलते शक्ति-समीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियाँ और कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आए व्यापक परिवर्तन — ये सभी कारक कूटनीति की प्रकृति को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में एक कूटनीतिज्ञ की भूमिका केवल परंपरागत राजनयिक संपर्क तक सीमित नहीं रह सकती — बल्कि इन बदलावों से सही सबक लेकर उन्हें नीति-निर्माण में शामिल करना अनिवार्य है।

वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका

विदेश मंत्री ने अधिकारियों को याद दिलाया कि भारत आज वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली आवाज़ के रूप में स्थापित हो रहा है। जी-20 की अध्यक्षता, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद-निरोध और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भारत की सक्रिय भागीदारी ने उसकी साख को नई ऊँचाई दी है।

गौरतलब है कि यह तीसरी बार है जब जयशंकर ने SSIFS में मिड-कैरियर बैच को संबोधित किया है, जो इस संस्थान और इन ट्रेनिंग कार्यक्रमों को दिए जाने वाले नीतिगत महत्व को रेखांकित करता है।

मिड-कैरियर प्रोग्राम का महत्व

सुषमा स्वराज भारतीय विदेश सेवा संस्थान में चल रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विदेश नीति, कूटनीतिक कौशल, आर्थिक कूटनीति और मीडिया प्रबंधन जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया जाता है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन अधिकारियों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अपने करियर के मध्य चरण में हैं और जिन्हें वरिष्ठ कूटनीतिक ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाना है।

जयशंकर की इस बातचीत से स्पष्ट होता है कि सरकार IFS अधिकारियों को न केवल तकनीकी दक्षता, बल्कि रणनीतिक सोच और वैश्विक परिप्रेक्ष्य से भी लैस करना चाहती है। आने वाले वर्षों में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति और विस्तार में इन्हीं अधिकारियों की भूमिका निर्णायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देश गहरे संकट में हैं और भारत की क्षेत्रीय साख दाँव पर है। सवाल यह है कि क्या यह प्रशिक्षण अधिकारियों को वास्तविक जटिलताओं से निपटने के लिए तैयार करता है, या केवल नीतिगत भाषण को दोहराता है — क्योंकि मैदान पर कूटनीति और मंच पर कूटनीति के बीच का फ़र्क ही असली परीक्षा है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्री जयशंकर ने IFS अधिकारियों से किस विषय पर चर्चा की?
जयशंकर ने 2002-2003 बैच के IFS अधिकारियों से पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति के विकास पर चर्चा की, जिसमें 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति, भू-राजनीतिक बदलाव और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका शामिल थी।
सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान (SSIFS) का मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम क्या है?
SSIFS का मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम अनुभवी IFS अधिकारियों को नई वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु चलाया जाता है। इसमें विदेश नीति, कूटनीतिक कौशल, आर्थिक कूटनीति और मीडिया प्रबंधन जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया जाता है।
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति क्या है?
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी सहयोग और आर्थिक एकीकरण को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें बुनियादी ढाँचे, संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
जयशंकर ने वैश्विक बदलावों के संदर्भ में IFS अधिकारियों को क्या संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं, नई तकनीकें वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं और कोविड-19 के बाद आपूर्ति श्रृंखलाओं में बड़े बदलाव आए हैं। ऐसे में एक कूटनीतिज्ञ के लिए इन बदलावों से सही सबक लेकर उन्हें नीति में शामिल करना ज़रूरी है।
वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका कैसे बढ़ी है?
जयशंकर के अनुसार, जी-20 की अध्यक्षता, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद-निरोध और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भारत की सक्रिय भागीदारी ने उसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक आवाज़ के रूप में स्थापित किया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले