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जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों को बसाने की जांच हो: लब्बा राम गांधी की डेमोग्राफिक पैनल से मांग

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जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों को बसाने की जांच हो: लब्बा राम गांधी की डेमोग्राफिक पैनल से मांग

सारांश

पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी ने डेमोग्राफिक पैनल के सामने दशकों पुरानी पीड़ा रखी और जम्मू में बाहरी लोगों को कथित तौर पर बसाने की जाँच की माँग उठाई — यह वही डेमोग्राफिक तर्क है जिसका इस्तेमाल कभी उनके अपने समुदाय को नागरिकता से वंचित रखने के लिए किया गया था।

मुख्य बातें

लब्बा राम गांधी ने जम्मू-कश्मीर में डेमोग्राफिक पैनल के दौरे का स्वागत किया और बाहरी लोगों को बसाने की कथित कोशिशों की जाँच की माँग की।
पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को करीब 70 वर्षों तक जम्मू-कश्मीर में नागरिकता और मतदान अधिकारों से वंचित रखा गया।
गांधी ने बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों को जम्मू-कश्मीर में कथित तौर पर बसाने पर चिंता जताई।
2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए हटने के बाद शरणार्थी समुदाय को नागरिकता व मतदान अधिकार मिले।
गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए डेमोग्राफिक बदलाव के दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की।

पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी संगठन के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी ने जम्मू-कश्मीर में डेमोग्राफिक पैनल के दौरे का स्वागत करते हुए मांग की है कि क्षेत्र की आबादी के ढाँचे में कथित तौर पर बदलाव की कोशिश करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि डेमोग्राफिक बदलाव का मुद्दा लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में चर्चा का विषय रहा है और पैनल के इस दौरे से इस संवेदनशील विषय पर गंभीर विचार-विमर्श की उम्मीद जगी है।

मुख्य घटनाक्रम

गांधी ने कहा कि डेमोग्राफिक से जुड़ा मुद्दा ही पैनल के दौरे का केंद्रीय विषय रहा है। पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों ने पैनल के सामने अपनी समस्याएँ और पिछले कई दशकों के अनुभव स्पष्ट रूप से रखे। उन्होंने बताया कि करीब 70 वर्षों तक इस समुदाय को जम्मू-कश्मीर में नागरिकता, मतदान और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा गया।

दोहरे मानदंड का आरोप

गांधी ने कहा कि जब भी पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात उठती थी, तब तत्कालीन कश्मीरी प्रशासन यह तर्क देता था कि इससे क्षेत्र का डेमोग्राफिक संतुलन बिगड़ जाएगा। उसी आधार पर उन्हें दशकों तक अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि अब बाहरी लोगों के जम्मू-कश्मीर में बसने के मामले में अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं, जो चिंताजनक है।

बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों पर आरोप

गांधी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों को जम्मू-कश्मीर में कथित तौर पर बसाने की कोशिशें एक बड़ी चिंता का विषय हैं। उन्होंने प्रशासन से माँग की कि इस मामले की गंभीरता से जाँच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी समुदाय के अधिकारों की कीमत पर क्षेत्र के सामाजिक और जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश न हो।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदली स्थिति

गांधी ने 2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए के प्रावधानों को हटाए जाने का समर्थन किया और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों के हटने के बाद पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता और मतदान जैसे मूलभूत अधिकार मिले, और अब वे जम्मू-कश्मीर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूरी तरह भागीदार हैं।

आगे की माँग

गांधी ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय नागरिकता और मतदान अधिकार मिलने के बाद संतुष्ट है, लेकिन जम्मू क्षेत्र की आबादी के स्वरूप में कथित बदलाव की आशंका उन्हें चिंतित करती है। उन्होंने माँग की कि डेमोग्राफिक बदलाव के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएँ। यह देखना होगा कि पैनल की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आज वही तर्क बाहरी लोगों की कथित बसावट के संदर्भ में उठाया जा रहा है। यह 'दोहरे मानदंड' की राजनीति का क्लासिक उदाहरण है जो जम्मू-कश्मीर की जटिल पहचान-राजनीति में बार-बार सामने आता है। बांग्लादेश और म्यांमार के लोगों को बसाने के आरोप गंभीर हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र जाँच और सत्यापन ज़रूरी है — बिना सत्यापित तथ्यों के ये आरोप सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को हवा दे सकते हैं। डेमोग्राफिक पैनल की रिपोर्ट और उस पर प्रशासन की प्रतिक्रिया ही बताएगी कि यह मुद्दा नीतिगत सुधार की दिशा में जाएगा या महज राजनीतिक बयानबाज़ी बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लब्बा राम गांधी कौन हैं और उन्होंने क्या माँग की है?
लब्बा राम गांधी पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी संगठन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में डेमोग्राफिक पैनल के दौरे का स्वागत करते हुए माँग की है कि बाहरी लोगों को कथित तौर पर बसाने की कोशिशों की जाँच हो और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को जम्मू-कश्मीर में नागरिकता कब मिली?
2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए के प्रावधान हटाए जाने के बाद पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को जम्मू-कश्मीर में नागरिकता और मतदान का अधिकार मिला। इससे पहले करीब 70 वर्षों तक उन्हें इन अधिकारों से वंचित रखा गया था।
जम्मू-कश्मीर में डेमोग्राफिक पैनल का दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पैनल जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए गठित है। गांधी के अनुसार, पैनल के सामने पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों ने दशकों के अनुभव और चिंताएँ रखी हैं, जिससे इस संवेदनशील विषय पर गंभीर विचार-विमर्श की उम्मीद जगी है।
गांधी ने बांग्लादेश और म्यांमार से जुड़े क्या आरोप लगाए?
गांधी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों को कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में बसाने की कोशिशें हो रही हैं, जिससे क्षेत्र के सामाजिक और जनसांख्यिकीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले की गंभीर जाँच की माँग की है।
डेमोग्राफिक बदलाव के मुद्दे पर गांधी ने दोहरे मानदंड का आरोप क्यों लगाया?
गांधी ने कहा कि पहले पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता देने का विरोध डेमोग्राफिक बदलाव की आशंका से किया जाता था, लेकिन अब बाहरी लोगों के जम्मू-कश्मीर में कथित बसावट पर वैसी ही चिंता नहीं दिखाई जा रही। इसी विरोधाभास को उन्होंने दोहरे मानदंड का नाम दिया।
राष्ट्र प्रेस
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