जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों को बसाने की जांच हो: लब्बा राम गांधी की डेमोग्राफिक पैनल से मांग
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी संगठन के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी ने जम्मू-कश्मीर में डेमोग्राफिक पैनल के दौरे का स्वागत करते हुए मांग की है कि क्षेत्र की आबादी के ढाँचे में कथित तौर पर बदलाव की कोशिश करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि डेमोग्राफिक बदलाव का मुद्दा लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में चर्चा का विषय रहा है और पैनल के इस दौरे से इस संवेदनशील विषय पर गंभीर विचार-विमर्श की उम्मीद जगी है।
मुख्य घटनाक्रम
गांधी ने कहा कि डेमोग्राफिक से जुड़ा मुद्दा ही पैनल के दौरे का केंद्रीय विषय रहा है। पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों ने पैनल के सामने अपनी समस्याएँ और पिछले कई दशकों के अनुभव स्पष्ट रूप से रखे। उन्होंने बताया कि करीब 70 वर्षों तक इस समुदाय को जम्मू-कश्मीर में नागरिकता, मतदान और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा गया।
दोहरे मानदंड का आरोप
गांधी ने कहा कि जब भी पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात उठती थी, तब तत्कालीन कश्मीरी प्रशासन यह तर्क देता था कि इससे क्षेत्र का डेमोग्राफिक संतुलन बिगड़ जाएगा। उसी आधार पर उन्हें दशकों तक अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि अब बाहरी लोगों के जम्मू-कश्मीर में बसने के मामले में अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं, जो चिंताजनक है।
बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों पर आरोप
गांधी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों को जम्मू-कश्मीर में कथित तौर पर बसाने की कोशिशें एक बड़ी चिंता का विषय हैं। उन्होंने प्रशासन से माँग की कि इस मामले की गंभीरता से जाँच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी समुदाय के अधिकारों की कीमत पर क्षेत्र के सामाजिक और जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश न हो।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदली स्थिति
गांधी ने 2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए के प्रावधानों को हटाए जाने का समर्थन किया और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों के हटने के बाद पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता और मतदान जैसे मूलभूत अधिकार मिले, और अब वे जम्मू-कश्मीर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूरी तरह भागीदार हैं।
आगे की माँग
गांधी ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय नागरिकता और मतदान अधिकार मिलने के बाद संतुष्ट है, लेकिन जम्मू क्षेत्र की आबादी के स्वरूप में कथित बदलाव की आशंका उन्हें चिंतित करती है। उन्होंने माँग की कि डेमोग्राफिक बदलाव के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएँ। यह देखना होगा कि पैनल की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।