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जम्मू-कश्मीर: गुज्जर आदिवासी बच्ची से यौन उत्पीड़न और मौत, SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की माँग

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जम्मू-कश्मीर: गुज्जर आदिवासी बच्ची से यौन उत्पीड़न और मौत, SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की माँग

सारांश

जम्मू-कश्मीर में एक आदिवासी गुज्जर बच्ची के साथ शिक्षक द्वारा कथित उत्पीड़न और उसकी मौत ने पूरी घाटी को हिला दिया है। 6 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं, SC/ST एक्ट जोड़ा गया है और मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है — लेकिन फाउंडेशन का कहना है कि 30-40 आरोपी अभी भी बाहर हैं।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर में एक आदिवासी गुज्जर बच्ची के साथ शिक्षक द्वारा कथित यौन उत्पीड़न और उसकी मृत्यु का मामला 20 अगस्त को सामने आया।
ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन ने 23 अगस्त को अनुसूचित जनजाति आयोग में अर्जी दायर की; दो दिन में नोटिस जारी हुआ।
पॉक्सो के साथ-साथ SC/ST एक्ट की धाराएँ भी मामले में जोड़ी गईं।
लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा; अब तक 6 लोग गिरफ्तार ।
फाउंडेशन के अनुसार इस मामले में कथित तौर पर 30 से 40 लोग शामिल हैं; और गिरफ्तारियाँ संभावित।
अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप भी जाँच के दायरे में।

जम्मू-कश्मीर में एक आदिवासी गुज्जर बच्ची के साथ उसके शिक्षक द्वारा कथित यौन उत्पीड़न और बाद में उसकी मृत्यु की घटना ने पूरे केंद्रशासित प्रदेश में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। 20 अगस्त को इस मामले के सामने आने के बाद से घाटी में न्याय की माँग तेज हो गई है। ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन अब इस मामले में अनुसूचित जनजाति समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से कानूनी लड़ाई लड़ रही है।

मुख्य घटनाक्रम

20 अगस्त को खुलासा हुआ कि एक अनुसूचित जनजाति समुदाय की मासूम बच्ची के साथ उसके शिक्षक ने लंबे समय तक उत्पीड़न किया, जिसके बाद उस बच्ची की मृत्यु हो गई। यह आरोपी शिक्षक अनुसूचित जनजाति समुदाय से नहीं था। घटना सामने आने के बाद 23 अगस्त को फाउंडेशन के सदस्य खबीर साहब ने अनुसूचित जनजाति आयोग (शेड्यूल ट्राइब कमीशन) में औपचारिक अर्जी दायर की। इसके ठीक दो दिन बाद आयोग ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।

SC/ST एक्ट लागू करने की माँग

ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन के महासचिव और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के सहायक प्रोफेसर डॉ. नसीब अली ने कहा, 'मुझे बोलते हुए भी शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि वो दरिंदा एक शिक्षक था जिसने उस बच्ची के साथ इस तरह की हरकत की। 20 अगस्त के बाद जब ये सामने आया कि बच्ची के साथ पहले इस तरह की दरिंदगी होती रही और वो इस दुनिया से चल बसी, तो पूरे जम्मू-कश्मीर में एक शोक की लहर थी।'

डॉ. अली ने माँग की कि आरोपियों पर केवल पॉक्सो अधिनियम के तहत ही नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST एक्ट) के तहत भी धाराएँ लगाई जाएँ, क्योंकि पीड़िता अनुसूचित जनजाति समुदाय से थी और आरोपी इस वर्ग से बाहर का था। उन्होंने बताया कि अर्जी के करीब तीन दिन बाद SC/ST एक्ट की संबंधित धाराएँ मामले में जोड़ दी गईं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और गिरफ्तारियाँ

लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने मामले को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। अब तक इस मामले में कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है — पहले 3, फिर 2 और उसके बाद 1 और गिरफ्तारी हुई। डॉ. अली के अनुसार, इस पूरे मामले में 30 से 40 लोग कथित तौर पर शामिल हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभावित हैं।

चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप

डॉ. अली ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्ची को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी। बच्ची को किश्तवाड़ और डोडा ले जाया गया और फिर जम्मू की ओर ले जाया जा रहा था। यह चिकित्सकीय लापरवाही भी जाँच के दायरे में आनी चाहिए, ऐसी माँग फाउंडेशन ने की है।

आगे क्या होगा

फाउंडेशन को उम्मीद है कि इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी और शेष आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी होगी। डॉ. अली ने कहा कि इस मामले में कड़ी सजा से एक मिसाल कायम होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगे। अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा जारी नोटिस के बाद अब इस मामले पर संस्थागत निगरानी भी बढ़ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अस्पताल की कथित उदासीनता और SC/ST एक्ट को स्वतः लागू न करना — ये तीनों एक साथ सवाल उठाते हैं कि क्या अनुसूचित जनजाति संरक्षण ढाँचा ज़मीन पर काम करता है। फाउंडेशन की सक्रियता के बिना SC/ST धाराएँ शायद जुड़ती ही नहीं — यह खुद बताता है कि सिस्टम को नागरिक दबाव की ज़रूरत क्यों पड़ती है। 30-40 कथित आरोपियों में से केवल 6 की गिरफ्तारी यह भी दर्शाती है कि जाँच की गति और व्यापकता अभी भी संदेह के घेरे में है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में गुज्जर बच्ची के साथ क्या हुआ?
एक आदिवासी गुज्जर बच्ची के साथ उसके शिक्षक ने कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया, जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। यह मामला 20 अगस्त को सामने आया और पूरे जम्मू-कश्मीर में आक्रोश की लहर फैल गई।
SC/ST एक्ट इस मामले में क्यों लागू किया गया?
पीड़िता अनुसूचित जनजाति समुदाय (गुज्जर) से थी, जबकि आरोपी शिक्षक इस वर्ग से बाहर का था। ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन ने अनुसूचित जनजाति आयोग में अर्जी दायर कर SC/ST एक्ट की धाराएँ जोड़ने की माँग की, जिसके बाद यह धाराएँ मामले में शामिल की गईं।
अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं और जाँच कहाँ तक पहुँची है?
अब तक कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा है। फाउंडेशन के अनुसार इस मामले में कथित तौर पर 30 से 40 लोग शामिल हैं और आगे और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना है।
ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन ने क्या कदम उठाए?
फाउंडेशन ने 23 अगस्त को अनुसूचित जनजाति आयोग में औपचारिक अर्जी दायर की। दो दिन के भीतर आयोग ने नोटिस जारी किया और बाद में SC/ST एक्ट की धाराएँ भी मामले में जोड़ी गईं। फाउंडेशन के महासचिव डॉ. नसीब अली इस मामले में न्याय के लिए सक्रिय रूप से आवाज़ उठा रहे हैं।
क्या इस मामले में चिकित्सकीय लापरवाही की भी जाँच होगी?
डॉ. नसीब अली ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्ची को समय पर उचित चिकित्सा नहीं दी और उसे किश्तवाड़, डोडा होते हुए जम्मू ले जाया जा रहा था। यह चिकित्सकीय लापरवाही का पहलू भी जाँच के दायरे में आना चाहिए, ऐसी माँग फाउंडेशन ने की है।
राष्ट्र प्रेस
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