सृष्टि कंडारी मामला: उत्तराखंड महिला आयोग अध्यक्ष ने की कड़ी कार्रवाई की माँग, CB-CID जाँच के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
देहरादून की शिक्षिका सृष्टि कंडारी की कथित आत्महत्या के मामले में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने 1 अगस्त 2026 को गहरा दुख व्यक्त करते हुए इस घटना को 'अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की। विवाह के मात्र आठ महीने बाद एक पढ़ी-लिखी शिक्षिका का इस प्रकार जीवन समाप्त करना, आयोग के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
मुख्य घटनाक्रम
कुसुम कंडवाल ने बताया कि वह इस मामले में पुलिस के लगातार संपर्क में हैं और आयोग ने स्वतः संज्ञान लेने की प्रक्रिया भी अपनाई है। उन्होंने कहा, 'कोई भी इतनी आसानी से सुसाइड नहीं करता — यह बहुत गंभीर मामला है।' आयोग अध्यक्ष ने प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण में CB-CID से जाँच कराने की बात कही है, जो इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है।
सृष्टि की माँ का बयान और वीडियो
कुसुम कंडवाल ने बताया कि उनकी सृष्टि की माँ से बातचीत हुई थी, जिन्होंने कहा कि उनकी बेटी घर वापस आ रही थीं, लेकिन घर पहुँचने से पहले ही उन्होंने यह कदम उठा लिया। माँ के अनुसार सृष्टि को ससुराल में प्रताड़ित किया जा रहा था।
सृष्टि ने अपनी मृत्यु से पूर्व एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ना का विवरण दिया और अपनी माँ व बहन से क्षमा माँगी।
पुलिस कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में मृतका के पति और ननद को हिरासत में ले लिया है। एसएसपी के अनुसार, सास के विरुद्ध भी साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और साक्ष्य मिलने पर उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा। परिवार के जो भी सदस्य प्रताड़ना में शामिल पाए जाएँगे, उन पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
महिला आयोग की अपील
कुसुम कंडवाल ने प्रताड़ित महिलाओं से आह्वान किया कि वे चुप न रहें। उन्होंने कहा, 'किसी भी महिला या बेटी के साथ प्रताड़ना हो रही हो तो तुरंत महिला आयोग से संपर्क करें — यहाँ से मदद मिलेगी। अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेना कोई समाधान नहीं है। प्रताड़ना सहना भी अपराध है, इसलिए मुखर होकर हम लोगों के पास पहुँचिए।'
आगे क्या होगा
CB-CID जाँच के आदेश के बाद अब इस मामले में व्यापक साक्ष्य संकलन और आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज़ होने की उम्मीद है। उत्तराखंड महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।