सृष्टि कंडारी संदिग्ध मौत: सीबीसीआईडी करेगी जांच, CM धामी ने दिया आदेश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड की सरकारी शिक्षिका सृष्टि कंडारी की 29 जुलाई 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीसीआईडी को जांच सौंपने के आदेश दिए हैं। आरोप है कि देहरादून निवासी इस नवविवाहित शिक्षिका को ससुराल में दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। वीडियो के वायरल होने और विधायक के पत्र के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए यह मामला उच्च-स्तरीय एजेंसी को सौंप दिया।
मुख्य घटनाक्रम
सृष्टि कंडारी, जो देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सिंगोली, विकासखंड कीर्तिनगर की निवासी थीं, की मौत 29 जुलाई को संदिग्ध हालात में हुई। वह देहरादून सचिवालय में तैनात निजी सचिव सौरव खत्री की पत्नी थीं और दोनों की शादी महज आठ महीने पहले हुई थी। मृतका की माँ की तहरीर पर पुलिस ने पति सौरव खत्री, सास और ननद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
दहेज प्रताड़ना के आरोप
परिजनों का आरोप है कि ससुराल पक्ष द्वारा सृष्टि को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जाता था और आत्महत्या के लिए उकसाया गया। परिवार के अनुसार, उसे ससुराल में अपमानित किया जाता था और 'मनहूस' तक कहा जाता था। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सृष्टि का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उसने कथित तौर पर अपनी मौत से पहले ससुरालियों पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए।
विधायक की मांग और सरकार की प्रतिक्रिया
देवप्रयाग विधानसभा के विधायक विनोद कंडारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सभी तथ्यों की स्वतंत्र पड़ताल आवश्यक है। विधायक के पत्र के तुरंत बाद मुख्यमंत्री धामी ने संज्ञान लेते हुए केस सीबीसीआईडी को स्थानांतरित करने के आदेश दिए।
सीबीसीआईडी की जांच का दायरा
जांच एजेंसी इस मामले के हर पहलू की पड़ताल करेगी — जिसमें दहेज की मांग, प्रताड़ना के साक्ष्य, फोन कॉल रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयान और मृतका का वीडियो शामिल हैं। वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सीबीसीआईडी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
आम जनता पर असर
वायरल वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश देखा गया और लोग पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। यह मामला उत्तराखंड में दहेज उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। उच्च-स्तरीय जांच से यह उम्मीद जताई जा रही है कि दोषियों को जल्द सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।