जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल न होना मुसीबत की जड़: कांग्रेस प्रवक्ता रविंदर शर्मा का BJP पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने 31 अक्टूबर 2026 को जम्मू में कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल न होने के कारण वहाँ कई गंभीर समस्याएँ पैदा हो रही हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस नीत चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है।
कैबिनेट की सीमित संख्या और विधायकों की नाराज़गी
शर्मा ने स्वीकार किया कि कैबिनेट विस्तार को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर कुछ विधायकों में नाराज़गी हो सकती है। उनके अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण मंत्रियों की कुल संख्या सीमित है, जिससे पाँच, छह और सात बार चुनाव जीत चुके वरिष्ठ विधायकों की मंत्री बनने की आकांक्षाएँ पूरी नहीं हो पा रहीं। उन्होंने कहा कि यदि राज्य का दर्जा बहाल हो जाता, तो मंत्रिमंडल की संख्या बढ़ती और यह समस्या उतनी गंभीर नहीं होती।
BJP पर ऑपरेशन लोटस का आरोप
शर्मा ने BJP को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि पार्टी का तरीका चुनी हुई सरकारों को तोड़ने और अस्थिर करने का रहा है। उन्होंने इसे 'ऑपरेशन लोटस' से जोड़ते हुए आशंका जताई कि BJP नाराज़ विधायकों और नेताओं से संपर्क करने की कोशिश कर रही होगी। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्हें कोई बड़ी बगावत दिखाई नहीं दे रही — यदि किसी विधायक ने पार्टी के अंदर नाराज़गी जताई है तो उसे बड़ी बगावत नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस की भूमिका और बाहरी समर्थन
कांग्रेस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को बाहर से समर्थन दे रही है और उसका एकमात्र उद्देश्य चुनी हुई सरकार को स्थिर रखना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के छह विधायक नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार को पूर्ण समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस ने कैबिनेट में कोटा न लेने का फैसला इसलिए किया क्योंकि सीमित पदों के कारण स्थिति और जटिल हो जाती — इसके बजाय पार्टी ने बाहर रहकर राज्य का दर्जा बहाल कराने की लड़ाई लड़ने का रास्ता चुना।
दोहरी नियंत्रण व्यवस्था और प्रशासनिक चुनौतियाँ
शर्मा ने केंद्र सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में एक निर्वाचित सरकार के साथ-साथ उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र की एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था भी काम कर रही है। उनके अनुसार, जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के तबादलों तथा अन्य प्रशासनिक फैसलों पर निर्वाचित सरकार का पूर्ण नियंत्रण नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नहीं चाहती कि निर्वाचित सरकार सफल हो और राजनीतिक अस्थिरता बनी रहे।
राज्य के दर्जे का वादा और सुप्रीम कोर्ट का आश्वासन
शर्मा ने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर में पहले परिसीमन, फिर चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय में भी राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने को लेकर आश्वासन दिया जा चुका है, लेकिन निर्वाचित सरकार बनने के बाद भी यह माँग अधूरी है। कांग्रेस सड़क से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक इस माँग को उठाती रहेगी — यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक जम्मू-कश्मीर को उसका संवैधानिक हक नहीं मिलता।