31 अक्टूबर 2026
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जम्मू-कश्मीर में 21 विधायकों की बैठक पर AAP विधायक मेहराज मलिक का BJP पर ऑपरेशन लोटस का आरोप

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जम्मू-कश्मीर में 21 विधायकों की बैठक पर AAP विधायक मेहराज मलिक का BJP पर ऑपरेशन लोटस का आरोप

सारांश

जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के 21 विधायकों की अलग बैठक ने सियासी हलचल मचा दी है। AAP विधायक मेहराज मलिक ने इसे महाराष्ट्र के शिंदे-पैटर्न से जोड़ते हुए BJP पर ऑपरेशन लोटस का आरोप लगाया — और यह सवाल उठाया कि क्या जम्मू-कश्मीर की पहली निर्वाचित सरकार अपने शुरुआती दौर में ही दबाव में है।

मुख्य बातें

AAP विधायक मेहराज मलिक ने 31 अक्टूबर को BJP पर कथित ऑपरेशन लोटस के ज़रिए जम्मू-कश्मीर सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के 21 विधायकों की अलग बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने शर्तें और माँगें रखी गईं।
मलिक ने इस घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के राजनीतिक उभार से की।
सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान पर मलिक ने कहा — सरकार में रहकर संघर्ष करें, इस्तीफा जनहित में नहीं।
मलिक ने अंतरधार्मिक विवाह की बहस में आम लोगों और चर्चित हस्तियों के साथ अलग व्यवहार पर भी सवाल उठाए।

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज मलिक ने 31 अक्टूबर को जम्मू में कहा कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 21 विधायकों की अलग बैठक ने राजनीतिक घटनाक्रम को नया और संदिग्ध मोड़ दे दिया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कथित ऑपरेशन लोटस के ज़रिए चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया और इस पूरे घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के राजनीतिक उभार से की।

मुख्य घटनाक्रम

मलिक के अनुसार, कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के 21 विधायकों की एक अलग बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने कुछ शर्तें और माँगें रखी गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बैठक करनी थी तो वह फारूक अब्दुल्ला के आवास या पार्टी कार्यालय में क्यों नहीं हुई। उनका कहना था कि ऐसे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन लोटस' के नज़रिए से देखा जाना चाहिए।

मलिक ने यह भी दावा किया कि BJP पिछले कई महीनों से जम्मू-कश्मीर में सरकार गिराने की संभावनाएँ तलाशती रही है और विधायकों से संपर्क करने में माहिर है। उन्होंने चंडीगढ़ और बिहार के उदाहरण देते हुए कहा कि BJP अलग-अलग राज्यों में ऐसी राजनीतिक कोशिशें करती रही है।

महाराष्ट्र पैटर्न की चेतावनी

मेहराज मलिक ने आशंका जताई कि कहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस में भी वैसी स्थिति न पैदा हो जाए जैसी महाराष्ट्र में शिवसेना के भीतर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई थी। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को अपनी पार्टी पर गर्व है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम में पार्टी के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कथित तौर पर कैबिनेट में शामिल किए गए लोगों का चयन जनहित के बजाय राजनीतिक और व्यक्तिगत हितों को ध्यान में रखकर हुआ — यह आरोप भी मलिक ने लगाया।

रूहुल्लाह के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान पर मलिक ने कहा कि उन्हें संसद से बाहर जाने के बजाय सरकार के भीतर रहकर सवाल उठाने चाहिए। उनका तर्क था कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को संसद में उठाने वाला एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि यदि इस्तीफा दे देता है, तो उपचुनाव तक का लंबा अंतराल जनता के हित में नहीं होगा। मलिक ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अपनी ज़िम्मेदारी नहीं छोड़नी चाहिए।

लव जिहाद बहस पर आप विधायक का रुख

मलिक ने अंतरधार्मिक विवाह के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आम लोगों के मामलों में संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से विरोध खड़ा किया जाता है, जबकि शाहरुख खान और आमिर खान जैसी चर्चित हस्तियों के विवाह पर वैसी बहस नहीं होती। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के किसी 'बड़े चेहरे' का नाम लेने से फिलहाल इनकार किया और कहा कि समय आने पर वह नाम भी सार्वजनिक करेंगे। मलिक ने स्पष्ट कहा कि समाज में नफरत फैलाने के लिए आम लोगों को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए।

आम जनता पर असर और आगे की राह

मलिक ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार चाहे किसी की भी हो, ज़मीनी स्तर पर आम लोगों की स्थिति में बदलाव सबसे ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल शासन और BJP के दौर में भी आम आदमी को अपेक्षित राहत नहीं मिली। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में चुनावों के बाद पहली बार बनी निर्वाचित सरकार की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं। गौरतलब है कि व्यवस्था में सुधार के लिए जवाबदेह और ईमानदार नेतृत्व की माँग लगातार बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह असंतोष बाहरी ताकतों को अवसर देगा। रूहुल्लाह के संभावित इस्तीफे का मुद्दा भी इसी बड़े संकट का हिस्सा है — और मुख्यधारा की कवरेज इस आंतरिक दरार को उतनी गहराई से नहीं पकड़ पा रही जितनी ज़रूरत है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में 21 विधायकों की बैठक का मामला क्या है?
कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के 21 विधायकों ने एक अलग बैठक की, जिसमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने कुछ शर्तें और माँगें रखी गईं। AAP विधायक मेहराज मलिक ने इस बैठक को संदिग्ध बताते हुए ऑपरेशन लोटस से जोड़ा।
ऑपरेशन लोटस क्या है और इसे जम्मू-कश्मीर से क्यों जोड़ा जा रहा है?
'ऑपरेशन लोटस' उस कथित रणनीति को कहते हैं जिसमें BJP पर विपक्षी दलों के विधायकों को तोड़कर सरकार गिराने या बहुमत हासिल करने का आरोप लगाया जाता है। मेहराज मलिक का आरोप है कि BJP जम्मू-कश्मीर में भी विधायकों से संपर्क कर रही है।
सांसद रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे पर AAP का क्या रुख है?
AAP विधायक मलिक ने कहा कि रूहुल्लाह को इस्तीफा देने के बजाय सरकार के भीतर रहकर जनता के मुद्दे उठाने चाहिए। उनके अनुसार, इस्तीफे से जम्मू-कश्मीर को संसद में एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि से हाथ धोना पड़ेगा।
मलिक ने महाराष्ट्र पैटर्न का ज़िक्र क्यों किया?
मलिक ने एकनाथ शिंदे के महाराष्ट्र में शिवसेना से बगावत का उदाहरण देते हुए चेताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। उनका कहना था कि कैबिनेट असंतोष और अलग बैठकें उसी पैटर्न की शुरुआत हो सकती हैं।
लव जिहाद की बहस पर मेहराज मलिक ने क्या कहा?
मलिक ने कहा कि अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में आम लोगों को निशाना बनाया जाता है, जबकि शाहरुख खान और आमिर खान जैसी चर्चित हस्तियों पर वैसे सवाल नहीं उठाए जाते। उन्होंने कहा कि समाज में नफरत फैलाने के लिए आम लोगों को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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