31 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक पोंजी घोटाला: ईडी ने ₹427 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 35,000 निवेशकों से ₹2,459 करोड़ की ठगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक पोंजी घोटाला: ईडी ने ₹427 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 35,000 निवेशकों से ₹2,459 करोड़ की ठगी

सारांश

कर्नाटक के बेलगावी में 35,000 से अधिक निवेशकों को ₹2,459 करोड़ का चूना लगाने वाले शिवम एसोसिएट्स घोटाले में ईडी ने ₹427 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है — यानी ठगी का महज 17.4% हिस्सा। बाकी पैसे का सुराग अभी भी जाँचकर्ताओं को है।

मुख्य बातें

ईडी ने शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नवर और सहयोगियों की ₹427.16 करोड़ की संपत्तियाँ PMLA, 2002 के तहत अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
घोटाले में बेलगावी, कर्नाटक के 35,000 से अधिक निवेशकों से कथित तौर पर ₹2,459.49 करोड़ जुटाए गए।
आरोपियों ने शिवम एसोसिएट्स के ज़रिए प्रति माह 3% रिटर्न और 0.5% रेफरल कमीशन का वादा किया था।
धन का एक हिस्सा शेयर बाजार में लगाया गया, जिससे ₹185.95 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ।
कुर्क संपत्तियों में 42 अचल संपत्तियाँ , 47 बैंक खाते , FD और CDSL डीमैट निवेश शामिल हैं।
कुर्क राशि कुल ठगी का केवल 17.4% है; शेष धन की तलाश जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मंगलुरु इकाई ने शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नवर और उनके सहयोगियों की ₹427.16 करोड़ मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई कर्नाटक के बेलगावी क्षेत्र में 35,000 से अधिक निवेशकों के साथ कथित तौर पर की गई ₹2,459.49 करोड़ की पोंजी धोखाधड़ी से जुड़ी है। ईडी के अनुसार यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।

घोटाले का तरीका

ईडी के अनुसार, आरोपियों ने शिवम एसोसिएट्स और अन्य संबद्ध संस्थाओं के माध्यम से एक छद्म निवेश योजना संचालित की। इस योजना में निवेशकों को प्रति माह 3 प्रतिशत का असाधारण रूप से ऊँचा रिटर्न और नए निवेशक जोड़ने पर 0.5 प्रतिशत का अतिरिक्त रेफरल कमीशन देने का वादा किया गया था।

बताया जाता है कि यह योजना 'रेफरल एजेंटों' — जिन्हें 'लीडर' कहा जाता था — के एक संगठित नेटवर्क पर टिकी थी। इन एजेंटों को आकर्षक और पक्के रिटर्न का लालच देकर अधिक से अधिक निवेशक जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था। यह पोंजी योजनाओं का क्लासिक ढाँचा है, जहाँ नए निवेशकों का पैसा पुराने निवेशकों को 'रिटर्न' के रूप में दिया जाता है।

धन का दुरुपयोग और नुकसान

जाँच में सामने आया है कि निवेशकों से जुटाई गई राशि को कई परतों में बाँटकर डायवर्ट किया गया, ताकि धन के स्रोत और उपयोग को छिपाया जा सके। एकत्र राशि का एक बड़ा हिस्सा जोखिम भरे शेयर बाजार सौदों में लगाया गया, जिससे ₹185.95 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ।

जाँच के अनुसार, लगभग ₹25 करोड़ श्रीमाता सहकारी ऋण समिति लिमिटेड और धनाश्री बहुउद्देशीय सहकारी समिति लिमिटेड के माध्यम से भेजे गए। इसके अलावा, लगभग ₹19 करोड़ शिवम सेवा (OPC) प्राइवेट लिमिटेड में हस्तांतरित किए गए। शिवम लाइफलाइन प्राइवेट लिमिटेड और शिवम फूड्स जैसी संबंधित व्यावसायिक संस्थाओं में भी धन का पता चला है।

कुर्क संपत्तियों का विवरण

नवीनतम अस्थायी कुर्की में ₹427,16,37,165 की संपत्तियाँ शामिल हैं। इनमें विभिन्न बैंकों और सहकारी समितियों में रखी सावधि जमाएँ (FD), 47 व्यक्तिगत एवं कॉर्पोरेट बैंक खातों की शेष राशि, कृषि भूमि, पारिवारिक बंगले और डेवलपर परियोजनाओं में अपार्टमेंट बुकिंग सहित 42 अचल संपत्तियाँ, तथा CDSL डीमैट खातों के माध्यम से किए गए शेयर बाजार निवेश शामिल हैं।

गौरतलब है कि यह कुर्क की गई राशि कुल कथित ठगी — ₹2,459.49 करोड़ — का लगभग 17.4 प्रतिशत है, जो दर्शाती है कि जाँचकर्ता अभी भी धन के बड़े हिस्से का पता लगाने की कोशिश में हैं।

ईडी ने पहले भी निवेशकों की राशि से बने लगभग ₹2.02 करोड़ के बैंक खाते और सावधि जमाएँ फ्रीज की थीं। इस बार की कार्रवाई में तलाशी के दौरान दस्तावेज, हस्तलिखित रिकॉर्ड, मोबाइल उपकरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए।

परिवार के सदस्यों तक पहुँचा पैसा

ईडी का आरोप है कि निवेशकों के धन का उपयोग कृषि भूमि, आवासीय संपत्तियों और भूखंडों की खरीद में किया गया। इसके अतिरिक्त, आरोपी नीलन्नवर की पत्नी और नाबालिग बेटे सहित परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में भी धन स्थानांतरित किए जाने का आरोप है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में सहकारी समितियों और अनियंत्रित निवेश योजनाओं के माध्यम से होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

जाँच की स्थिति और आगे की कार्रवाई

ईडी की जाँच अभी जारी है। एजेंसी परिवार के सदस्यों, सहयोगियों, सहकारी समितियों और संबंधित व्यावसायिक संस्थाओं के माध्यम से धन के दुरुपयोग की परतें उघाड़ने में लगी है। आने वाले हफ्तों में और संपत्तियाँ कुर्क होने और नए नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

459 करोड़ के इस घोटाले में ईडी की ₹427 करोड़ की कुर्की — यानी कुल ठगी का महज 17.4% — यह सवाल उठाती है कि बाकी 82% से अधिक राशि कहाँ गई और क्या उसे वापस पाया जा सकेगा। 'प्रति माह 3%' जैसे अव्यावहारिक रिटर्न के वादे पर 35,000 निवेशकों का भरोसा करना दर्शाता है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता और नियामकीय निगरानी की कितनी बड़ी कमी है। सहकारी समितियों को मनी-लॉन्ड्रिंग की नली के रूप में इस्तेमाल करने का यह पैटर्न नया नहीं है — लेकिन हर बार जाँच तब शुरू होती है जब आम निवेशक सब कुछ गँवा चुका होता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक का यह पोंजी घोटाला क्या है?
यह कर्नाटक के बेलगावी क्षेत्र में शिवम एसोसिएट्स और संबद्ध संस्थाओं के माध्यम से चलाई गई एक कथित निवेश धोखाधड़ी योजना है, जिसमें 35,000 से अधिक निवेशकों से लगभग ₹2,459.49 करोड़ जुटाए गए। निवेशकों को प्रति माह 3% रिटर्न और रेफरल कमीशन का वादा किया गया था।
ईडी ने कितनी और किस तरह की संपत्तियाँ कुर्क की हैं?
ईडी ने ₹427.16 करोड़ की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इनमें 42 अचल संपत्तियाँ (कृषि भूमि, बंगले, अपार्टमेंट), 47 बैंक खातों की शेष राशि, सावधि जमाएँ और CDSL डीमैट खातों के शेयर निवेश शामिल हैं।
इस घोटाले में मुख्य आरोपी कौन है?
मुख्य आरोपी शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नवर हैं। ईडी के अनुसार उन्होंने और उनके सहयोगियों ने शिवम एसोसिएट्स सहित कई संस्थाओं के ज़रिए यह धोखाधड़ी योजना संचालित की। आरोप है कि धन आरोपी की पत्नी और नाबालिग बेटे के बैंक खातों में भी भेजा गया।
निवेशकों का पैसा कहाँ लगाया गया?
जाँच के अनुसार धन को कई परतों में डायवर्ट किया गया। एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में लगाया गया जिससे ₹185.95 करोड़ का घाटा हुआ। इसके अलावा ₹25 करोड़ सहकारी समितियों के ज़रिए और ₹19 करोड़ शिवम सेवा (OPC) प्राइवेट लिमिटेड में भेजे गए।
क्या घोटाले में और गिरफ्तारियाँ या कुर्की हो सकती है?
ईडी की जाँच अभी जारी है और एजेंसी परिवार के सदस्यों, सहयोगियों, सहकारी समितियों और संबंधित व्यावसायिक संस्थाओं की भूमिका की पड़ताल कर रही है। कुर्क की गई राशि कुल ठगी का केवल 17.4% है, इसलिए आगे और कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले