जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल हो: कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा का केंद्र पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने 2 जुलाई को रांची में कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना वहाँ विकास की गति और कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इस माँग को शुरू से उठाते रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार अभी तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं ले सकी है।
राज्य का दर्जा और शासन की ज़रूरत
सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत की आत्मा है और जब तक वहाँ की निर्वाचित सरकार के पास पूर्ण प्रशासनिक अधिकार नहीं होंगे, तब तक शासन-व्यवस्था प्रभावशाली ढंग से काम नहीं कर सकती। उनका तर्क है कि राज्य का दर्जा मिलने से न केवल विकास कार्यों में तेज़ी आएगी, बल्कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र-शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। तब से विपक्षी दल राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग उठाते रहे हैं। सिन्हा ने कहा कि यदि इंडिया गठबंधन इस माँग को लेकर एकजुट होकर आंदोलन करता है, तो यह पूरी तरह लोकतांत्रिक और उचित कदम होगा।
जमशेदपुर हत्याकांड पर राजनीतिक विवाद
झारखंड के जमशेदपुर में करणी नेता हत्याकांड को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जिम्मेदार ठहराया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिन्हा ने कहा कि यदि जमशेदपुर की घटना के लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं, तो भरत तिवारी एनकाउंटर के लिए सम्राट चौधरी भी उतने ही जिम्मेदार ठहराए जाने चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड सरकार ने इस मामले में 24 घंटे के भीतर कई ठोस कदम उठाए — आरोपियों की गिरफ्तारी, संबंधित पुलिसकर्मियों का निलंबन और पुलिस अधीक्षक (SP) का तबादला। उनके अनुसार इससे स्पष्ट है कि सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर है।
BJP द्वारा मशाल जुलूस निकालने की घोषणा पर सिन्हा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल किसी दुखद घटना पर न्याय दिलाने की बजाय राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है, जो न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
पश्चिम बंगाल में TMC बागी गुट और लोकतांत्रिक संस्थाएँ
पश्चिम बंगाल में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट की चुनाव आयोग से मुलाकात के सवाल पर सिन्हा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि पहले वोटों को प्रभावित करने की कोशिश होती है, फिर विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को तोड़ा जाता है और अंततः राजनीतिक दलों के अस्तित्व को ही चुनौती दी जाती है।
सिन्हा ने कहा कि यदि किसी दल के सांसद या विधायक दूसरी पार्टी में चले जाते हैं और इसके बाद उस दल के चुनाव चिह्न या संगठनात्मक स्थिति पर असर पड़ता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर और निष्पक्ष प्रक्रिया मिलनी चाहिए।
आगे क्या
जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे का मुद्दा संसद के आगामी सत्र में भी गूँजने की संभावना है, जहाँ इंडिया गठबंधन इसे प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। सिन्हा के बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मुद्दे को चुनावी और संसदीय दोनों मंचों पर जीवित रखने की रणनीति पर काम कर रही है।