जमशेदपुर ट्रैफिक पुलिस पर विधायक संजीव सरदार का फूटा गुस्सा, ₹10,000 जुर्माने पर टाटानगर चेक पोस्ट पर हंगामा
सारांश
मुख्य बातें
जमशेदपुर के टाटानगर ट्रैफिक चेक पोस्ट पर 23 मई 2026 को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब पोटका विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजीव सरदार अपने समर्थकों सहित वहाँ पहुँचे और ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। विवाद की जड़ में एक स्थानीय शिक्षक और उनके बेटे पर लगाया गया ₹10,000 का जुर्माना था, जिसे लेकर आरोप है कि दस्तावेज़ मौजूद होने के बावजूद फोटोकॉपी को आधार बनाकर कार्रवाई की गई।
मामले का मूल घटनाक्रम
पोटका क्षेत्र के एक शिक्षक अपने बेटे के साथ ड्यूटी पर जा रहे थे, जब टाटानगर स्टेशन के पास ट्रैफिक पुलिस का हेलमेट जाँच अभियान चल रहा था। जाँच के दौरान शिक्षक के बेटे को रोका गया। बताया जा रहा है कि दोनों ने हेलमेट पहन रखा था और वाहन के सभी दस्तावेज़ भी साथ थे, लेकिन मूल कागजात की जगह फोटोकॉपी होने को आधार बनाते हुए ट्रैफिक पुलिस ने ₹10,000 का जुर्माना थोप दिया। इस कार्रवाई पर परिजनों ने आपत्ति जताई और मामला विवाद में बदल गया।
विधायक का हस्तक्षेप और पुलिस से टकराव
विधायक संजीव सरदार उस समय बागबेड़ा क्षेत्र में एक कार्यक्रम में थे। घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने फोन पर ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और युवक को छोड़ने तथा मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की अपील की। आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने विधायक से कहा कि यदि बात करनी है तो वे डीएसपी स्तर के अधिकारी से आकर मिलें। इसके बाद विधायक सरदार अपने समर्थकों और सहयोगियों के साथ सीधे टाटानगर ट्रैफिक चेक पोस्ट पहुँचे और पुलिसकर्मियों को फटकार लगाई।
विधायक ने उठाए कार्यप्रणाली पर सवाल
चेक पोस्ट पर पहुँचकर विधायक संजीव सरदार ने कहा कि ट्रैफिक जाँच के नाम पर आम लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि एक जनप्रतिनिधि की बात को नजरअंदाज किया जा सकता है, तो आम नागरिकों के साथ किस तरह का व्यवहार होता होगा, यह सोचने वाली बात है। मौके पर उपस्थित लोगों ने भी ट्रैफिक पुलिस के रवैये को लेकर चर्चा की और कई लोगों ने आरोप लगाया कि जाँच अभियानों के दौरान कई बार अनावश्यक सख्ती और अभद्र व्यवहार किया जाता है।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच का आश्वासन
ट्रैफिक डीएसपी नीरज कुमार ने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि अभी तक किसी के निलंबन या कार्रवाई की कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह घटना जमशेदपुर ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। आलोचकों का कहना है कि दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी को लेकर इतने भारी जुर्माने की कार्रवाई असंगत है, विशेषकर जब हेलमेट जैसे मुख्य सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा हो। यह प्रकरण ट्रैफिक प्रवर्तन में विवेकाधिकार के दुरुपयोग की व्यापक शिकायतों के बीच आया है। आने वाले दिनों में डीएसपी स्तर की जाँच रिपोर्ट और उस पर होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि क्या इस प्रकरण में जवाबदेही सुनिश्चित होती है।