14 सितंबर 2026
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विधायक जयराम महतो को धनबाद कोर्ट से राहत, बरवाअड्डा थाना विवाद में अग्रिम जमानत मंजूर

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विधायक जयराम महतो को धनबाद कोर्ट से राहत, बरवाअड्डा थाना विवाद में अग्रिम जमानत मंजूर

सारांश

झारखंड के डुमरी विधायक जयराम महतो को धनबाद कोर्ट से राहत — बरवाअड्डा थाना परिसर में कथित हंगामे, अभद्र व्यवहार और सरकारी काम में बाधा के मामले में अग्रिम जमानत मंजूर। 21 अगस्त की रात शुरू हुए इस विवाद में 10 नामजद और 40-50 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज है।

मुख्य बातें

जेएलकेएम प्रमुख व डुमरी विधायक जयराम महतो की अग्रिम जमानत याचिका धनबाद एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने 14 सितंबर 2026 को मंजूर की।
मामला 21 अगस्त की रात बरवाअड्डा थाना परिसर में कथित हंगामे, पुलिस अधिकारी से अभद्र व्यवहार और सरकारी काम में बाधा से जुड़ा है।
एफआईआर में 10 नामजद और 40-50 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज; विवाद की जड़ में यशोदा देवी के नाम पर कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल है।
थाना प्रभारी और विधायक के बीच कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।
महतो ने आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया; मामले में मुकदमा अभी जारी रहेगा।

झारखंड के डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रमुख जयराम महतो को 14 सितंबर 2026 को बड़ी कानूनी राहत मिली, जब धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। यह मामला बरवाअड्डा थाना परिसर में कथित तौर पर किए गए हंगामे, पुलिस अधिकारी से अभद्र व्यवहार और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 21 अगस्त की रात उस समय शुरू हुआ जब बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के नाम पर कथित फर्जी लेटर पैड, हस्ताक्षर और मुहर के इस्तेमाल का मामला सामने आया। आरोप था कि इन दस्तावेजों के ज़रिए जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र और वंशावली तैयार कराने की कोशिश की जा रही थी।

पुलिस ने इस सिलसिले में जेएलकेएम नेता गणेश दास को हिरासत में लिया था। जैसे ही विधायक जयराम महतो को इसकी जानकारी मिली, वे अपने समर्थकों के साथ बरवाअड्डा थाना पहुँचे। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान थाना परिसर में हंगामा किया गया और हिरासत में लिए गए गणेश दास को जबरन छुड़ाने का प्रयास हुआ।

वायरल ऑडियो और एफआईआर का विवरण

इसी घटनाक्रम में विधायक और थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच कथित बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। ऑडियो में कथित तौर पर विधायक द्वारा थाना प्रभारी के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल और धमकी देने की बात सामने आई थी, हालाँकि इस वायरल ऑडियो की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।

थाना प्रभारी रवि कुमार के लिखित बयान के आधार पर बरवाअड्डा थाने में जयराम महतो सहित 10 नामजद और 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोपियों पर सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों को धमकी देने, थाना परिसर में हंगामा करने और भीड़ जुटाने सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।

विधायक का पक्ष

जयराम महतो ने पुलिस के आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था। उनका कहना था कि वे महज अपने कार्यकर्ता की गिरफ्तारी की जानकारी लेने थाना पहुँचे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थाना परिसर में कुछ लोगों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर हमला करने की कोशिश की।

अदालत की कार्यवाही

अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान धनबाद एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पुलिस से केस डायरी तलब की थी। पुलिस ने गुरुवार को केस डायरी अदालत में पेश की, जिसके बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। 14 सितंबर को अदालत ने महतो की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली।

आगे क्या

अग्रिम जमानत मिलने से जयराम महतो को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है, लेकिन मामले में मुकदमा अभी जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में राजनीतिक तनाव और पुलिस-जनप्रतिनिधि विवाद चर्चा के केंद्र में हैं। अदालती प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ मामले का पूर्ण निपटारा बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर मूल प्रश्न — क्या विधायक ने अपने विधायी अधिकार की सीमा लाँघी या वे वाकई जानकारी लेने गए थे — अदालत में अभी तय होना बाकी है। वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि न होना भी जाँच एजेंसियों की साख को कटघरे में खड़ा करता है। फर्जी दस्तावेजों के मूल आरोप और विधायक के थाने पहुँचने की समयावधि — दोनों की गहरी जाँच ज़रूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो कि राजनीतिक दबाव और कानूनी प्रक्रिया के बीच की रेखा कहाँ खींची जाए।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयराम महतो को अग्रिम जमानत किस मामले में मिली है?
जयराम महतो को धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में कथित हंगामे, थाना प्रभारी से अभद्र व्यवहार और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में अग्रिम जमानत मिली है। धनबाद एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने 14 सितंबर 2026 को यह याचिका मंजूर की।
बरवाअड्डा थाना विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
21 अगस्त की रात बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के नाम पर कथित फर्जी लेटर पैड, हस्ताक्षर और मुहर के इस्तेमाल का मामला सामने आया। पुलिस ने जेएलकेएम नेता गणेश दास को हिरासत में लिया, जिसके बाद विधायक जयराम महतो समर्थकों के साथ थाने पहुँचे और विवाद बढ़ा।
जयराम महतो पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
उन पर सरकारी काम में बाधा, पुलिसकर्मियों को धमकी देना, थाना परिसर में हंगामा करना और भीड़ जुटाना जैसी विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी रवि कुमार के लिखित बयान पर 10 नामजद और 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।
जयराम महतो ने आरोपों पर क्या कहा?
महतो ने सभी आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज किया। उनका कहना है कि वे केवल अपने कार्यकर्ता की गिरफ्तारी की जानकारी लेने थाने गए थे और वहाँ उनके साथ भी दुर्व्यवहार हुआ।
अग्रिम जमानत मिलने के बाद मामला खत्म हो गया?
नहीं, अग्रिम जमानत से केवल तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिलती है। मामले में मुकदमा अदालत में जारी रहेगा और आरोपों का पूर्ण निपटारा आगे की सुनवाई में होगा।
राष्ट्र प्रेस
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