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हर घर तिरंगा: सीतामढ़ी की जीविका दीदियाँ बना रही हैं ६८ हजार राष्ट्रीय ध्वज, महिला सशक्तिकरण की मिसाल

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हर घर तिरंगा: सीतामढ़ी की जीविका दीदियाँ बना रही हैं ६८ हजार राष्ट्रीय ध्वज, महिला सशक्तिकरण की मिसाल

सारांश

सीतामढ़ी की जीविका दीदियाँ इस स्वतंत्रता दिवस पर सिर्फ उत्सव नहीं मना रहीं — वे उसे बना रही हैं। ₹२५ प्रति झंडे की लागत पर ६८ हजार तिरंगे तैयार करने का यह काम ग्रामीण महिला रोजगार और राष्ट्रीय पर्व को एक साथ जोड़ने की सशक्त मिसाल है।

मुख्य बातें

सीतामढ़ी जिले की जीविका दीदियों को हर घर तिरंगा अभियान के तहत 68 हजार राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है।
जिले के 17 प्रखंडों में से प्रत्येक को 4 हजार तिरंगे बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रत्येक झंडे की लागत ₹25 निर्धारित है; आकार 12×18 इंच और बीच में अशोक चक्र ।
13 अगस्त तक 40 हजार से अधिक झंडे तैयार हो चुके थे।
सीतामढ़ी में 48 हजार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 6 लाख दीदियाँ इस अभियान में भागीदार हैं।
इशरत अफसाना जैसी दीदियाँ 2017 से जीविका से जुड़ी हैं और पहले आँगनबाड़ी ड्रेस, अब तिरंगा निर्माण में योगदान दे रही हैं।

बिहार के सीतामढ़ी जिले में हर घर तिरंगा अभियान के तहत जीविका दीदियों को 68 हजार से अधिक राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 12 अगस्त 2025 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के 17 प्रखंडों में कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्याएँ कपड़े की खरीद से लेकर झंडे की सिलाई तक का पूरा काम स्वयं कर रही हैं। यह पहल एक साथ दो लक्ष्य साध रही है — स्वतंत्रता दिवस की तैयारी और ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय रोजगार।

मुख्य घटनाक्रम

सीतामढ़ी जीविका के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) उमाशंकर भगत ने बताया कि जिले के प्रत्येक 17 प्रखंड को 4 हजार तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है, जिससे कुल मिलाकर 68 हजार राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाने हैं। प्रत्येक झंडे का आकार 12 इंच चौड़ा और 18 इंच लंबा निर्धारित किया गया है, जिसके बीच में अशोक चक्र बनाया जा रहा है।

प्रत्येक प्रखंड में तीन से चार क्लस्टर लेवल फेडरेशन (संकुल संघ) के माध्यम से काम आगे बढ़ाया जा रहा है। जीविका दीदियों ने बाजार से तीन कोटेशन लेकर पारदर्शी तरीके से कपड़े की खरीदारी की और उसके बाद सिलाई का काम शुरू किया।

उत्पादन की स्थिति

उमाशंकर भगत के अनुसार, 13 अगस्त तक सीतामढ़ी में 40 हजार से अधिक झंडे तैयार किए जा चुके थे। जीविका का प्रयास है कि शेष झंडे भी जल्द से जल्द पूरे कर लिए जाएँ। प्रत्येक झंडे की लागत ₹25 निर्धारित की गई है, जिसमें कपड़े और निर्माण से जुड़े सभी खर्च शामिल हैं।

गौरतलब है कि सीतामढ़ी जिले में लगभग 48 हजार स्वयं सहायता समूहों से करीब 6 लाख दीदियाँ जुड़ी हुई हैं, जो इस अभियान की व्यापक पहुँच को दर्शाता है।

महिलाओं की आवाज़

जीविका दीदी मोनी झा ने बताया कि इससे पहले उनके समूह को आईसीडीएस कार्यालय के लिए ड्रेस तैयार करने का काम मिलता था। अब तिरंगा निर्माण का अवसर मिलने से महिलाएँ अपनी मातृभूमि में रहकर ही रोजगार पा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने का यह अवसर उनके लिए बड़ी बात है।

जीविका दीदी इशरत अफसाना ने बताया कि वह वर्ष 2017 से जीविका से जुड़ी हैं। जीविका से पहले उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं था। पहले आँगनबाड़ी के लिए ड्रेस सिलने का काम मिला, और अब स्वतंत्रता दिवस के लिए तिरंगा तैयार करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि आगे भी इसी तरह महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलते रहें।

आम जनता पर असर

यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक ठोस उदाहरण है। जिले के सभी 17 प्रखंडों में काम का समान वितरण यह सुनिश्चित करता है कि दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं को भी रोजगार का समान अवसर मिले। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिला रोजगार को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत चर्चा तेज है।

क्या होगा आगे

जीविका का लक्ष्य है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सभी 68 हजार झंडे तैयार कर वितरित किए जाएँ, ताकि हर घर तिरंगा अभियान सीतामढ़ी जिले में पूरी सफलता के साथ संपन्न हो सके। यह अनुभव भविष्य में इसी तरह के सरकारी अभियानों में जीविका नेटवर्क को और बड़ी भूमिका दिलाने की नींव रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹२५ प्रति झंडे की दर पर महिलाओं को वास्तव में कितनी आय हो रही है — कपड़े और सामग्री की लागत घटाने के बाद। स्वतंत्रता दिवस जैसे एकमुश्त अभियानों पर निर्भरता टिकाऊ रोजगार नहीं है; जरूरत है कि इस नेटवर्क को साल भर के सरकारी और निजी ऑर्डर से जोड़ा जाए। तभी जीविका का वादा — आत्मनिर्भर महिला, आत्मनिर्भर भारत — केवल उत्सवी सुर्खी नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बनेगा।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीतामढ़ी में जीविका दीदियों को कितने तिरंगे बनाने का लक्ष्य दिया गया है?
सीतामढ़ी जिले में जीविका दीदियों को कुल ६८ हजार से अधिक राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। जिले के १७ प्रखंडों में से प्रत्येक को ४ हजार तिरंगे बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रत्येक तिरंगे की लागत कितनी है और उसका आकार क्या है?
प्रत्येक तिरंगे की निर्धारित लागत ₹२५ है, जिसमें कपड़े और निर्माण के सभी खर्च शामिल हैं। झंडे का आकार १२ इंच चौड़ा और १८ इंच लंबा रखा गया है और बीच में अशोक चक्र बनाया जा रहा है।
हर घर तिरंगा अभियान में जीविका दीदियाँ किस तरह काम कर रही हैं?
जीविका दीदियाँ बाजार से तीन कोटेशन लेकर कपड़े की खरीद से लेकर झंडे की सिलाई और तैयारी तक का पूरा काम स्वयं कर रही हैं। प्रत्येक प्रखंड में तीन से चार क्लस्टर लेवल फेडरेशन (संकुल संघ) के माध्यम से यह काम व्यवस्थित रूप से चलाया जा रहा है।
सीतामढ़ी में जीविका नेटवर्क कितना बड़ा है?
सीतामढ़ी जिले में लगभग ४८ हजार स्वयं सहायता समूहों से करीब ६ लाख दीदियाँ जुड़ी हुई हैं। यह विशाल नेटवर्क हर घर तिरंगा अभियान को जिले भर में प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायक है।
१३ अगस्त तक कितने झंडे तैयार हो चुके थे?
डीपीएम उमाशंकर भगत के अनुसार, १३ अगस्त तक सीतामढ़ी में ४० हजार से अधिक झंडे तैयार किए जा चुके थे। जीविका का प्रयास है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले शेष झंडे भी पूरे कर लिए जाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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