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हर घर तिरंगा अभियान: जौनपुर की 300 महिलाओं ने उठाई 5 लाख झंडे बनाने की जिम्मेदारी

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हर घर तिरंगा अभियान: जौनपुर की 300 महिलाओं ने उठाई 5 लाख झंडे बनाने की जिम्मेदारी

सारांश

जौनपुर की 300 ग्रामीण महिलाएँ 'हर घर तिरंगा' अभियान के लिए 5 लाख राष्ट्रीय ध्वज सिल रही हैं — देशभक्ति के साथ-साथ आजीविका भी। NRLM का यह प्रयोग ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और राष्ट्रीय अभियान को एक साथ साधने की कोशिश है।

मुख्य बातें

जौनपुर में 62 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 300 महिलाएँ 'हर घर तिरंगा' अभियान के लिए झंडे तैयार कर रही हैं।
जिले को 5 लाख झंडे बनाने का लक्ष्य दिया गया है, जो NRLM के तहत संचालित हो रहा है।
बजरंग SHG की विजयलक्ष्मी मौर्या के अनुसार उनके समूह को 17,000 झंडों का लक्ष्य मिला; अब तक 6,000 पूरे।
प्रति झंडा संकुल को ₹20 और सिलाई करने वाली महिलाओं को ₹1.50–₹3 की आमदनी।
एक समूह को इस कार्य से ₹30,000–₹40,000 की कुल कमाई होने का अनुमान।

जौनपुर में स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत 62 स्वयं सहायता समूहों (SHG) की लगभग 300 महिलाएँ 'हर घर तिरंगा' अभियान के लिए राष्ट्रीय ध्वज सिलाई का कार्य कर रही हैं। जिले को इस बार 5 लाख झंडे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसे सभी ब्लॉकों में फैले इन्हीं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। यह पहल देशभर में चल रहे सरकार के व्यापक ध्वजारोहण अभियान का हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

बजरंग स्वयं सहायता समूह की सदस्य विजयलक्ष्मी मौर्या ने बताया कि उनके समूह को 17,000 झंडे बनाने का लक्ष्य मिला है। उन्होंने कहा, 'हमने 6,000 झंडों की सिलाई पूरी कर उन्हें ब्लॉक कार्यालय भेज दिया है।' उनके समूह में 10 से अधिक महिलाएँ इस कार्य में जुटी हैं।

विजयलक्ष्मी मौर्या के अनुसार इस कार्य से उनके समूह को ₹30,000 से ₹40,000 की आमदनी होने का अनुमान है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर है।

सरकार की भूमिका और भुगतान व्यवस्था

स्वतः रोज़गार उपायुक्त जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्य कार्य संकुल स्तरीय स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक झंडा तैयार करने के लिए संकुल को ₹20 दिए जा रहे हैं, जिसमें से सिलाई का कार्य करने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रति झंडा ₹1.50 से ₹3 तक की राशि मिलती है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'हर घर तिरंगा' अभियान को और व्यापक बनाने की कोशिश में है तथा ग्रामीण महिलाओं को इसमें सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है।

आम जनता और महिलाओं पर असर

गौरतलब है कि NRLM के तहत देशभर के स्वयं सहायता समूहों को आजीविका के नए अवसर देने की यह कोशिश ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। जौनपुर जैसे जिलों में, जहाँ महिलाओं के लिए नियमित रोज़गार सीमित है, इस तरह के अभियान अस्थायी लेकिन सार्थक आमदनी का स्रोत बनते हैं।

हालाँकि, प्रति झंडा ₹1.50 से ₹3 की दर को लेकर श्रम के उचित मूल्यांकन का प्रश्न भी उठता है, जिसे विशेषज्ञ चर्चा का विषय मानते हैं।

अभियान की व्यापक पृष्ठभूमि

'हर घर तिरंगा' अभियान केंद्र सरकार द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर वर्ष चलाया जाता है, जिसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय गर्व की भावना को प्रबल करना है। इस वर्ष जौनपुर जिले में इस अभियान को ग्रामीण स्तर तक ले जाने के लिए NRLM के नेटवर्क का उपयोग किया गया है।

क्या होगा आगे

तैयार किए गए झंडे ब्लॉक कार्यालयों के माध्यम से वितरित किए जाएँगे ताकि स्वतंत्रता दिवस से पहले हर घर तक तिरंगा पहुँच सके। 5 लाख के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी 62 समूहों की महिलाएँ युद्धस्तर पर कार्य में जुटी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रति झंडा ₹1.50 से ₹3 की दर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या यह महिलाओं के श्रम का उचित मूल्यांकन है। NRLM जैसे मिशन का असली पैमाना तब बनता है जब अस्थायी अभियान-आधारित काम स्थायी आजीविका में बदले — अन्यथा यह हर साल दोहराई जाने वाली एक मौसमी आमदनी बनकर रह जाएगी। जौनपुर का यह मॉडल देश के अन्य जिलों के लिए अनुकरणीय हो सकता है, बशर्ते भुगतान दरें और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की जाएँ।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जौनपुर में 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत कितने झंडे बनाए जा रहे हैं?
जौनपुर जिले को इस वर्ष 'हर घर तिरंगा' अभियान के लिए 5 लाख झंडे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। यह कार्य NRLM के अंतर्गत 62 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 300 महिलाओं द्वारा किया जा रहा है।
झंडा सिलाई से महिलाओं को कितनी कमाई होती है?
स्वतः रोज़गार उपायुक्त जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, संकुल को प्रति झंडा ₹20 दिए जाते हैं, जिसमें से सिलाई करने वाली SHG महिलाओं को ₹1.50 से ₹3 प्रति झंडा मिलता है। एक समूह को कुल ₹30,000 से ₹40,000 की आमदनी होने का अनुमान है।
NRLM का 'हर घर तिरंगा' अभियान से क्या संबंध है?
केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये आजीविका के अवसर देता है। 'हर घर तिरंगा' अभियान में NRLM के नेटवर्क का उपयोग करके झंडा निर्माण का कार्य इन्हीं समूहों को सौंपा गया है, जिससे देशभक्ति और आर्थिक सशक्तीकरण दोनों साधे जा रहे हैं।
बजरंग स्वयं सहायता समूह ने कितने झंडे तैयार किए हैं?
बजरंग स्वयं सहायता समूह को 17,000 झंडे बनाने का लक्ष्य मिला है। समूह की सदस्य विजयलक्ष्मी मौर्या के अनुसार अब तक 6,000 झंडों की सिलाई पूरी कर ब्लॉक कार्यालय भेजी जा चुकी है।
तैयार झंडों का वितरण कैसे होगा?
तैयार झंडे ब्लॉक कार्यालयों के माध्यम से जिले के सभी ब्लॉकों में वितरित किए जाएँगे, ताकि स्वतंत्रता दिवस से पहले हर घर तक तिरंगा पहुँच सके।
राष्ट्र प्रेस
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