झारखंड: पूर्व मंत्री बंधु तिर्की सहित सात आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी
सारांश
Key Takeaways
- पूर्व मंत्री बंधु तिर्की को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया गया।
- यह मामला 2017 में हुआ था।
- सात आरोपियों को अदालत ने निर्दोष ठहराया।
- कोर्ट ने सबूतों की कमी पर फैसला सुनाया।
- सात वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया का अंत हुआ।
रांची, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की को रांची सिविल कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। एमपी/एमएलए मामलों के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने एक पुराने मामले में, जिसमें मारपीट और जानलेवा हमले के आरोप थे, सभी सात आरोपियों को बरी किया है।
इस मामले में बंधु तिर्की के साथ उनके तीन अंगरक्षक रामदेव प्रसाद, विशाल उरांव और सीनू राम के अलावा अन्य आरोपियों में अमोद सिंह, मोहन सिंह और दिलीप कुमार शामिल थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त सबूत न पेश करने के आधार पर सभी को दोषमुक्त कर दिया।
यह मामला १ नवंबर २०१७ का है, जब भारत स्काउट एंड गाइड झारखंड, रांची के राज्य काउंसिल चुनाव में कथित गड़बड़ी की जांच चल रही थी। प्राथमिकी के अनुसार, जांच दल के सदस्य जिला शिक्षा कार्यालय परिसर पहुंचे थे, जहां नरेश कुमार नामक व्यक्ति को प्रवेश से रोका गया था।
आरोप था कि बंधु तिर्की के अंगरक्षकों ने नरेश कुमार के साथ मारपीट की, उनका कॉलर पकड़ा और जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों पर लोहे की रॉड से हमला करने, गाली-गलौज करने और गले से सोने की चेन छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
इस घटना को लेकर १ नवंबर २०१७ को रांची के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि मामले में आरोपों को सिद्ध करने के लिए ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। सात वर्षों तक चली इस कानूनी प्रक्रिया के समापन पर बंधु तिर्की और उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है।