हजारीबाग दुष्कर्म मामले में भाजपा ने 3 अप्रैल को झारखंड बंद का आह्वान किया, सरकार पर आरोप
सारांश
Key Takeaways
- झारखंड में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।
- भाजपा ने सरकार के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है।
- पीड़ित परिवार के साथ भाजपा खड़ी है।
- उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है।
- महिला उत्पीड़न के मामले बढ़ रहे हैं।
रांची, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी नृशंस हत्या के मामले में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की हेमंत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में यह घोषणा की कि यदि अगले दो दिनों में 'हजारीबाग निर्भया कांड' के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो 3 अप्रैल को पूरे झारखंड को बंद किया जाएगा। इस से पहले, 2 अप्रैल को राज्य के सभी जिलों और प्रखंडों में भाजपा कार्यकर्ता मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध प्रकट करेंगे।
आदित्य साहू ने प्रेस वार्ता में कहा कि झारखंड में कानून का शासन पूरी तरह से समाप्त हो चुका है और अपराधियों की समानांतर सरकार चल रही है। उन्होंने विष्णुगढ़ की घटना को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' करार दिया। साहू ने कहा, "जिस तरह से दरिंदों ने बेटी की आंखें निकालीं, दांत तोड़े और जीभ काटी, यह अपराध की चरम सीमा है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने 6 दिन बीत जाने के बाद भी एक शब्द नहीं कहा। यह सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।"
उन्होंने उच्च न्यायालय से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने के लिए धन्यवाद दिया। आदित्य साहू ने राज्य के वित्त मंत्री और कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और उन्हें 'संवेदनहीन' बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सात दिनों के बाद कुछ पैसे देकर परिवार के जख्मों को भरने की कोशिश कर रही है, जो निर्लज्जता की पराकाष्ठा है।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि वे पीड़ित परिवार के साथ हैं और उनकी मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द पहचाना जाए और उन्हें 'फांसी के फंदे' तक पहुंचाया जाए। इसी मुद्दे पर भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जो खुद को 'सशक्त और शोषित नारी' बताती हैं, वे राज्य की बेटियों के साथ हो रही इन क्रूर घटनाओं पर मौन क्यों हैं?
राफिया नाज़ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जनवरी 2026 में झारखंड में दुष्कर्म की 128 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जबकि 16,000 से अधिक महिला उत्पीड़न के मामले फाइलों में धूल फांक रहे हैं। उन्होंने साहिबगंज, गुमला और लिट्टीपाड़ा की हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड अब अपराधियों के सामने झुक गया है।