झारखंड राज्यसभा चुनाव: 18 जून से पहले NDA विधायक रांची होटल में एकजुट, INDIA गठबंधन करेगा मॉक पोल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून 2025 को होने वाले मतदान से पहले सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच गई है। रांची में दो सीटों पर तीन उम्मीदवार मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय और रोमांचक बन गया है। संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों खेमे अपने-अपने विधायकों को साधने में जुटे हैं।
होटल में बाड़ेबंदी: NDA की रणनीति
भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी सहित BJP और सहयोगी दलों के कई विधायक मंगलवार, 16 जून को रांची के रेडिसन ब्लू होटल में एकत्र हो गए। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी भी इसी होटल में ठहरे हुए हैं। विधायकों और नेताओं के लिए 18 जून तक 32 कमरे आरक्षित किए गए हैं। मतदान के दिन सभी विधायक एक साथ होटल से विधानसभा के लिए प्रस्थान करेंगे।
गौरतलब है कि यह बाड़ेबंदी रणनीति उन अटकलों की पृष्ठभूमि में अपनाई गई है जिनमें कहा जा रहा है कि कुछ विधायक दलगत निर्देशों से हटकर मतदान कर सकते हैं।
INDIA गठबंधन का मॉक पोल अभियान
दूसरी ओर, झारखंड के सत्तारूढ़ इंडिया (INDIA) गठबंधन ने 16 और 17 जून को मुख्यमंत्री आवास में अपने विधायकों की बैठकें बुलाई हैं। इन बैठकों में मतदान प्रक्रिया को लेकर मॉक पोल कराया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं विधायकों के साथ चुनावी रणनीति पर विचार-मंथन करेंगे।
गठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बैजनाथ राम और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के प्रणव झा मैदान में हैं। INDIA गठबंधन का दावा है कि उसके पास दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।
चुनावी गणित: 28 वोट की दरकार
झारखंड विधानसभा की मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 28 प्रथम वरीयता मत आवश्यक हैं। यानी दोनों सीटें सुनिश्चित करने के लिए किसी भी गठबंधन को 56 वोट चाहिए। यह गणित ही इस चुनाव को अप्रत्याशित बना रहा है।
नाथवानी का 'अंतरात्मा की आवाज' वाला दांव
निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने विधानसभा के सभी 81 सदस्यों से समर्थन की अपील की है। उन्होंने कहा है कि उन्हें NDA के अलावा अन्य दलों के विधायकों का भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। नाथवानी ने विधायकों से दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर 'अंतरात्मा की आवाज' पर मतदान करने की अपील की है।
वे यह भी याद दिला रहे हैं कि 2008 और 2014 में वह झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुँचे थे और तब उन्हें विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला था। इसी ऐतिहासिक मिसाल के आधार पर वे इस बार भी क्रॉस वोटिंग की उम्मीद लगाए हैं।
18 जून को क्या होगा
राजनीतिक हलकों की नज़र अब इस बात पर टिकी है कि 18 जून को विधानसभा के भीतर संख्या बल का अंकगणित हावी रहता है या क्रॉस वोटिंग कोई नया राजनीतिक संदेश देती है। यह चुनाव झारखंड की राजनीति में दलीय अनुशासन बनाम व्यक्तिगत निर्णय की परीक्षा भी बन गया है।