झारखंड राज्यसभा चुनाव 2025: नाथवानी के उतरने से त्रिकोणीय मुकाबला, फिर शुरू हुई 'होटल पॉलिटिक्स'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को होने वाले मतदान से पहले एक बार फिर 'होटल पॉलिटिक्स' राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने से यह चुनाव अब त्रिकोणीय हो गया है।
होटल पॉलिटिक्स का पुराना खेल फिर मैदान में
क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं के बीच राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए होटलों का सहारा ले रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के विधायक रांची के एक होटल में ठहरे हुए हैं। BJP विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी समेत कई विधायक मंगलवार को वहाँ पहुँच चुके हैं। एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी इसी होटल में डेरा डाले हुए हैं।
दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने भी रांची के एक होटल में अपने विधायकों और नेताओं की बैठक आयोजित की है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के विधायक बुधवार को एक साथ रहेंगे और गुरुवार को सामूहिक रूप से मतदान के लिए विधानसभा जाएँगे।
झारखंड में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का इतिहास
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड की राजनीति में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' कोई नई परिघटना नहीं है। राज्य गठन के बाद जब-जब सत्ता का संतुलन नाजुक हुआ है, विधायकों को एकजुट रखने के लिए यही रणनीति अपनाई गई है।
इस परंपरा की पहली बड़ी मिसाल 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद सामने आई, जब त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में BJP और सहयोगी दलों ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर — जयपुर और ओडिशा के होटलों व रिसॉर्ट्स में — भेजा था। इसके बाद अगस्त 2022 में तत्कालीन हेमंत सोरेन सरकार पर राजनीतिक संकट के दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों को छत्तीसगढ़ के रायपुर भेजा गया था, जहाँ वे लगभग एक सप्ताह तक रहे।
गौरतलब है कि फरवरी 2024 में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और चम्पई सोरेन के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के समय भी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस गठबंधन के विधायकों को हैदराबाद भेजा गया था, जहाँ वे फ्लोर टेस्ट से पहले तक रहे।
संख्या बल का गणित
मौजूदा राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है। दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए 56 वोट चाहिए, और इंडिया ब्लॉक के पास कथित तौर पर लगभग इतनी ही संख्या मौजूद है।
नाथवानी का दावा और अपील
एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी सभी 81 विधायकों से समर्थन की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि 2008 और 2014 में भी वह झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुँचे थे और उन्हें विभिन्न दलों का समर्थन मिला था। इस बार भी उन्हें 'अंतरात्मा की आवाज़' के आधार पर समर्थन मिलने की उम्मीद है।
अब सबकी निगाहें 18 जून के मतदान पर टिकी हैं — यह देखने के लिए कि होटलों में बंद विधायकों की वफ़ादारी मतपेटी तक बरकरार रहती है या नहीं।