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झारखंड राज्यसभा चुनाव 2025: नाथवानी के उतरने से त्रिकोणीय मुकाबला, फिर शुरू हुई 'होटल पॉलिटिक्स'

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झारखंड राज्यसभा चुनाव 2025: नाथवानी के उतरने से त्रिकोणीय मुकाबला, फिर शुरू हुई 'होटल पॉलिटिक्स'

सारांश

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है — और उससे पहले ही 'होटल पॉलिटिक्स' का पुराना खेल शुरू हो चुका है। एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जबकि जीत के लिए महज 28 वोट चाहिए।

मुख्य बातें

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होगा।
एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
BJP नेता बाबूलाल मरांडी समेत एनडीए विधायक और कांग्रेस विधायक अलग-अलग रांची के होटलों में ठहरे हुए हैं।
एक सीट जीतने के लिए 28 प्रथम वरीयता मत और दोनों सीटें जीतने के लिए 56 वोट चाहिए।
नाथवानी 2008 और 2014 में भी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।
झारखंड में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की शुरुआत 2005 के त्रिशंकु विधानसभा से हुई थी।

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को होने वाले मतदान से पहले एक बार फिर 'होटल पॉलिटिक्स' राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने से यह चुनाव अब त्रिकोणीय हो गया है।

होटल पॉलिटिक्स का पुराना खेल फिर मैदान में

क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं के बीच राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए होटलों का सहारा ले रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के विधायक रांची के एक होटल में ठहरे हुए हैं। BJP विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी समेत कई विधायक मंगलवार को वहाँ पहुँच चुके हैं। एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी इसी होटल में डेरा डाले हुए हैं।

दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने भी रांची के एक होटल में अपने विधायकों और नेताओं की बैठक आयोजित की है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के विधायक बुधवार को एक साथ रहेंगे और गुरुवार को सामूहिक रूप से मतदान के लिए विधानसभा जाएँगे।

झारखंड में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का इतिहास

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड की राजनीति में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' कोई नई परिघटना नहीं है। राज्य गठन के बाद जब-जब सत्ता का संतुलन नाजुक हुआ है, विधायकों को एकजुट रखने के लिए यही रणनीति अपनाई गई है।

इस परंपरा की पहली बड़ी मिसाल 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद सामने आई, जब त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में BJP और सहयोगी दलों ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर — जयपुर और ओडिशा के होटलों व रिसॉर्ट्स में — भेजा था। इसके बाद अगस्त 2022 में तत्कालीन हेमंत सोरेन सरकार पर राजनीतिक संकट के दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों को छत्तीसगढ़ के रायपुर भेजा गया था, जहाँ वे लगभग एक सप्ताह तक रहे।

गौरतलब है कि फरवरी 2024 में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और चम्पई सोरेन के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के समय भी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस गठबंधन के विधायकों को हैदराबाद भेजा गया था, जहाँ वे फ्लोर टेस्ट से पहले तक रहे।

संख्या बल का गणित

मौजूदा राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है। दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए 56 वोट चाहिए, और इंडिया ब्लॉक के पास कथित तौर पर लगभग इतनी ही संख्या मौजूद है।

नाथवानी का दावा और अपील

एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी सभी 81 विधायकों से समर्थन की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि 2008 और 2014 में भी वह झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुँचे थे और उन्हें विभिन्न दलों का समर्थन मिला था। इस बार भी उन्हें 'अंतरात्मा की आवाज़' के आधार पर समर्थन मिलने की उम्मीद है।

अब सबकी निगाहें 18 जून के मतदान पर टिकी हैं — यह देखने के लिए कि होटलों में बंद विधायकों की वफ़ादारी मतपेटी तक बरकरार रहती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि संस्थागत ढाँचे पर। परिमल नाथवानी का 'अंतरात्मा की आवाज़' वाला तर्क दरअसल उस दरार को भुनाने की कोशिश है जो इंडिया ब्लॉक के भीतर संभावित असंतोष से पैदा हो सकती है। असली सवाल यह है कि जब संख्याबल लगभग बराबर हो, तो क्या होटल की दीवारें वास्तव में वोट की गारंटी दे सकती हैं — झारखंड का इतिहास इस पर मिला-जुला जवाब देता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड राज्यसभा चुनाव 2025 में कितनी सीटें हैं और मतदान कब है?
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून 2025 को मतदान होना है। एक सीट जीतने के लिए करीब 28 प्रथम वरीयता मत और दोनों सीटें जीतने के लिए 56 वोट आवश्यक हैं।
परिमल नाथवानी कौन हैं और इस चुनाव में उनकी क्या भूमिका है?
परिमल नाथवानी एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार हैं, जो 2008 और 2014 में भी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। उनके मैदान में उतरने से यह चुनाव त्रिकोणीय हो गया है और वे सभी 81 विधायकों से समर्थन की अपील कर रहे हैं।
झारखंड में 'होटल पॉलिटिक्स' क्या है और यह क्यों होती है?
क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका में राजनीतिक दल अपने विधायकों को मतदान से पहले होटलों या रिसॉर्ट्स में एकजुट रखते हैं। झारखंड में यह परंपरा 2005 से चली आ रही है और 2022 व 2024 में भी इसका सहारा लिया गया था।
इंडिया ब्लॉक और एनडीए की स्थिति झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्या है?
इंडिया ब्लॉक के पास कथित तौर पर दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त — लगभग 56 — वोट हैं। एनडीए समर्थित नाथवानी इंडिया ब्लॉक के विधायकों में सेंध लगाने की उम्मीद में सभी 81 विधायकों से अपील कर रहे हैं।
झारखंड में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के पिछले उदाहरण कौन-से हैं?
2005 में त्रिशंकु विधानसभा के दौरान BJP विधायकों को जयपुर और ओडिशा भेजा गया था। अगस्त 2022 में हेमंत सोरेन सरकार पर संकट के समय गठबंधन विधायक रायपुर गए, और फरवरी 2024 में सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झामुमो-कांग्रेस विधायकों को हैदराबाद भेजा गया था।
राष्ट्र प्रेस
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