जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच ने शिक्षा विभाग की फर्जी नियुक्ति में 5 आरोपियों के खिलाफ बडगाम कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) कश्मीर ने बुधवार, 2 सितंबर को राज्य के शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्तियों से जुड़े मामले में पाँच आरोपियों के खिलाफ बडगाम के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चार्जशीट दाखिल की। आरोपियों पर जाली सरकारी दस्तावेज़ों के ज़रिये शिक्षक पद पर अवैध नियुक्ति कराने का आरोप है।
मुख्य आरोपी और आरोप
चार्जशीट में जिन पाँच व्यक्तियों को नामज़द किया गया है, वे हैं — निसार अहमद भट, शाकिर गुल, मोहम्मद अयाज राथर, शेख रुहेल अहमद और तनवीर अहमद राथर। इन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाज़ी), 201 (साक्ष्य नष्ट करना) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
यह मामला स्कूल शिक्षा निदेशालय, कश्मीर की शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें बताया गया कि तीन व्यक्तियों ने जोन नागम, चरार-ए-शरीफ, ज़िला बडगाम में शिक्षक के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया था। इन्होंने कथित तौर पर स्कूल शिक्षा निदेशक द्वारा जारी ट्रांसफर/एडजस्टमेंट ऑर्डर का उपयोग किया था।
जाँच में पाया गया कि उन आदेशों पर जाली हस्ताक्षर, फर्जी ऑर्डर नंबर और गढ़े गए डिस्पैच/एंडोर्समेंट नंबर थे। जेडईओ नागम और सीईओ बडगाम के रिकॉर्ड से पुष्टि हुई कि मोहम्मद अयाज राथर, शेख रुहेल अहमद और तनवीर अहमद राथर का स्थानांतरण इन्हीं संदिग्ध दस्तावेज़ों के आधार पर हुआ था।
फर्जीवाड़े का पर्दाफाश
निदेशालय से सत्यापन के दौरान यह तथ्य भी उजागर हुआ कि संबंधित ऑर्डर बुक 31 दिसंबर 2019 को ही बंद हो चुकी थी, जिससे स्पष्ट हो गया कि प्रस्तुत ऑर्डर और एंडोर्समेंट नंबर पूरी तरह फर्जी थे। जाँच में यह भी सामने आया कि इन तीनों आरोपियों की शिक्षा विभाग में कभी कोई नियमित नियुक्ति ही नहीं हुई थी।
आरोपी निसार अहमद भट — जो स्वयं एक शिक्षक हैं — और शाकिर गुल ने इस षड्यंत्र में बिचौलियों की भूमिका निभाई। जाँच के अनुसार, निसार अहमद भट ने जाली सरकारी दस्तावेज़ तैयार करने और छापने के लिए आवश्यक संसाधन और मशीनरी उपलब्ध कराई।
क्राइम ब्रांच की सलाह
क्राइम ब्रांच ने आम नागरिकों को सचेत करते हुए कहा है कि वे इस प्रकार की आर्थिक धोखाधड़ी से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना एसएसपी, इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) कश्मीर को दें। गौरतलब है कि सरकारी नियुक्तियों में फर्जीवाड़े के ऐसे मामले जम्मू-कश्मीर में पहले भी सामने आ चुके हैं, जो प्रशासनिक निगरानी की कमज़ोरियों को उजागर करते हैं।
अब इस मामले की सुनवाई बडगाम के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में होगी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।