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क्या जेएनयू का नाम बदलकर 'आजाद भगत सिंह विश्वविद्यालय' करना चाहिए?

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क्या जेएनयू का नाम बदलकर 'आजाद भगत सिंह विश्वविद्यालय' करना चाहिए?

सारांश

अयोध्या में संत समाज ने जेएनयू परिसर में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की घटना की कड़ी निंदा की है। जगत गुरु परमहंस ने जेएनयू का नाम बदलकर 'आजाद भगत सिंह विश्वविद्यालय' करने की मांग की है। क्या यह सही कदम होगा?

मुख्य बातें

जेएनयू में नारेबाजी के कारण संत समाज का आक्रोश।
जगत गुरु परमहंस ने नाम बदलने की मांग की।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की आवश्यकता।

अयोध्या, ६ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के परिसर में सोमवार की रात प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ हुई कथित नारेबाजी के कारण संत समाज में गहरा आक्रोश उत्पन्न हुआ है। अयोध्या में संतों और धर्माचार्यों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे देश और संविधान का अपमान बताया है।

जगतगुरु परमहंस, आचार्य तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर ने इस घटना पर दुःख व्यक्त किया। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद जेएनयू में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और देश के खिलाफ नारेबाजी करना सीधा राष्ट्रद्रोह है।

उन्होंने मांग की कि जेएनयू का नाम बदला जाए और इसे 'आजाद भगत सिंह विश्वविद्यालय' किया जाए। उनके अनुसार, जेएनयू से जो गतिविधियां सामने आ रही हैं, वे पूरी तरह राष्ट्रविरोधी हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में जिम्मेदार पदों पर बैठे सभी लोगों को बर्खास्त किया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में दोषियों को जेल भेजने की आवश्यकता है।

जगतगुरु परमहंस ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मांग की कि इस पूरे मामले में शामिल लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएएसए) लगाया जाए और उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जेएनयू परिसर में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग अत्यंत निंदनीय है। उनके अनुसार, इस तरह की नारेबाजी एकदम गलत है और ऐसे लोगों को कठोर सजा मिलनी चाहिए।

वहीं, सीताराम दास महाराज ने और भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जेएनयू के कुछ छात्र जिस प्रकार से आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवादियों के समर्थन में नारे लगाते हैं, उन्हें पहचान कर देश से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भारत पर बोझ हैं और इन्हें पाकिस्तान भेज देना चाहिए। ये लोग भारत के नाम पर कलंक हैं और ऐसे कलंक को देश से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।

सीताराम दास महाराज ने यह भी कहा कि जेएनयू का नाम बदला जाना चाहिए और भारत में किसी भी प्रकार की जिहादी सोच को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और संविधान के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का भी प्रतीक है। हमें इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि क्या हम ऐसी विचारधारा को बढ़ावा देना चाहेंगे जो देश की एकता को कमजोर करती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जेएनयू का नाम बदलने का कोई कानूनी आधार है?
हाँ, यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार इस मामले पर सहमत होते हैं, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत नाम बदला जा सकता है।
इस घटना के पीछे का कारण क्या है?
इस घटना का मुख्य कारण जेएनयू में हुई नारेबाजी है, जिसे संत समाज ने राष्ट्रद्रोह माना है।
क्या इस तरह की नारेबाजी को सहन किया जाना चाहिए?
यह समाज के लिए चिंता का विषय है और इससे देश की एकता प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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