एफसीआरए बिल पर जेपीसी: सदस्यों ने 12 अक्टूबर की बैठक टालने और 4 सप्ताह का अतिरिक्त समय माँगा
सारांश
मुख्य बातें
फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल (एफसीआरए बिल) की जाँच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्यों ने 29 सितंबर 2026 को समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद संजय जायसवाल को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को निर्धारित बैठक स्थगित करने की माँग की है। सदस्यों ने विधेयक के व्यापक प्रभाव का हवाला देते हुए कम से कम चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिए जाने की अपील की है।
मुख्य घटनाक्रम
पत्र में कांग्रेस (INC) सांसद एंटो एंटनी समेत कई विपक्षी सदस्यों ने तर्क दिया कि प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) अधिनियम (एफसीआरएए) की प्रकृति और उसके दूरगामी असर को देखते हुए बिल एवं उससे जुड़े दस्तावेजों का गहन अध्ययन अनिवार्य है। सदस्यों का कहना है कि जाँच-पड़ताल शुरू करने से पहले पर्याप्त तैयारी का समय मिलना चाहिए।
पत्र में यह भी अनुरोध किया गया है कि हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से सार्वजनिक टिप्पणियाँ, सुझाव और विचार आमंत्रित करने की अवधि कम से कम चार सप्ताह तक खुली रखी जाए। इससे संगठन, विशेषज्ञ और आम जनता अपनी राय समिति तक पहुँचा सकेंगे।
एफसीआरए विधेयक की पृष्ठभूमि
विदेशी अंशदान (विनियमन) विधेयक, 2006 का मूल उद्देश्य विदेशी चंदे और विदेशी आतिथ्य की प्राप्ति एवं उपयोग को विनियमित करना है, तथा राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध उपयोग पर प्रतिबंध लगाना है। विदेशी वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले सभी संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के लिए एफसीआरए के तहत पंजीकरण अनिवार्य है तथा उनकी निगरानी गृह मंत्रालय करता है, जो इस कानून का नोडल प्राधिकरण है।
संशोधन विधेयक को इसी वर्ष 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों की माँग पर 12 अगस्त को इसे जेपीसी के पास भेजा गया, क्योंकि विपक्ष ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
विपक्ष के आरोप और सरकार की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों का आरोप है कि यह विधेयक कथित तौर पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है। उनका कहना है कि इसके कुछ प्रावधान ईसाई NGO तथा अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण और शैक्षणिक संस्थाओं को मिलने वाली वैध विदेशी फंडिंग पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म-विशेष से जुड़ा नहीं है और इसका उद्देश्य केवल विदेशी योगदान में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और विदेशी फंड का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। सरकार ने विदेशी योगदान के दुरुपयोग के उदाहरण के तौर पर जबरन धर्म-परिवर्तन की घटनाओं का उल्लेख किया है।
समिति की संरचना और कार्य-विस्तार
रिपोर्ट तैयार करने से पहले एफसीआरए कानून के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा के लिए BJP सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता में 31 सदस्यों की यह समिति गठित की गई थी। गौरतलब है कि यह समिति एक ऐसे संवेदनशील कानून की समीक्षा कर रही है जो देश में कार्यरत हजारों NGO और सामाजिक संगठनों के वित्तपोषण को सीधे प्रभावित करती है।
क्या होगा आगे
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जेपीसी अध्यक्ष संजय जायसवाल सदस्यों की माँग स्वीकार करते हैं या नहीं। यदि बैठक स्थगित होती है तो हितधारकों के लिए सार्वजनिक टिप्पणी देने का दरवाजा लंबे समय तक खुला रहेगा, जो विधेयक की समीक्षा को और अधिक व्यापक बना सकता है। विधेयक पर जेपीसी की अंतिम रिपोर्ट संसद के अगले सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।