13 अगस्त 2026
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FCRA बिल पर संसद में घमासान: विपक्ष बोला — '10 दिन से जवाब माँगे, सत्र के आखिरी वक्त में बयान की बात'

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FCRA बिल पर संसद में घमासान: विपक्ष बोला — '10 दिन से जवाब माँगे, सत्र के आखिरी वक्त में बयान की बात'

सारांश

मानसून सत्र के आखिरी दिन से एक दिन पहले FCRA बिल को JPC के पास भेजने का सरकारी प्रस्ताव विपक्ष को नहीं भाया। JMM की महुआ माजी और कांग्रेस के चमाला किरण कुमार रेड्डी ने एक सुर में पूछा — जब 10 दिन पहले यही हो सकता था, तो अब क्यों?

मुख्य बातें

मानसून सत्र के अंतिम चरण में 12 अगस्त को FCRA संशोधन विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए।
सरकार ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव रखा; विपक्ष ने इसे 'देर से उठाया गया कदम' बताया।
JMM सांसद महुआ माजी ने पूरे सत्र में हुए हंगामे, वॉकआउट और बार-बार स्थगन पर चिंता जताई।
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने केंद्रीय गृह मंत्री की सदन से अनुपस्थिति पर सवाल उठाए और सरकार पर 'भ्रम फैलाने' का आरोप लगाया।
विपक्ष के अनुसार, वे पिछले 10 दिनों से सरकार से जवाब माँग रहे थे; सत्र का अंतिम दिन 13 अगस्त (गुरुवार) को है।

संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजकर सर्वसम्मति बनाने का प्रस्ताव रखा, जबकि विपक्षी दलों ने इस कदम को 'देर से जागना' और सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी करार दिया।

सत्र के नुकसान पर विपक्ष की चिंता

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने पूरे सत्र के दौरान हुई बाधाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'देखिए, पूरा सत्र बीत चुका है। देश का इतना कीमती समय और पैसा बर्बाद हुआ, हंगामा हुआ, वॉकआउट होते रहे, और सदन बार-बार स्थगित होता रहा। अब सदन का लगभग आखिरी समय चल रहा हो, तब इस बात को उठाया जा रहा है। हमें समझ नहीं आ रहा कि इसमें इतनी देर क्यों हुई?' यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में उत्पादक कार्यदिवसों की संख्या पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस का सीधा हमला

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने केंद्रीय गृह मंत्री की सदन से अनुपस्थिति को लेकर सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'उन्हें 2 बजे आने दीजिए, क्योंकि सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। अगर केंद्रीय गृह मंत्री दोपहर 2 बजे सदन में आते हैं, तो शायद हमारी पार्टी कोई स्टैंड लेगी क्योंकि अब तक तो वे यही कह रहे थे कि वे नहीं आ रहे हैं।' रेड्डी ने आगे कहा, 'वे संसद में आ रहे हैं, लेकिन लोकसभा या राज्यसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहे हैं। उन्हें क्या दिक्कत है? अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है, तो किस बात ने उन्हें इतने दिनों तक छिपने और हमें हर दिन मकर द्वार पर धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर किया?'

सरकार पर 'भ्रम फैलाने' का आरोप

रेड्डी ने सरकार की रणनीति पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'इसके बजाय, वे पिछले सप्ताह ही ऐसा कर सकते थे — कम से कम सदन का कामकाज तो चलता रहता। मुझे नहीं पता कि वे देश के लोगों को भ्रमित करने और यह दिखाने के लिए बयान क्यों देना चाहते हैं कि गलती हमारी है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष पिछले 10 दिनों से सरकार से जवाब माँग रहा था। रेड्डी ने कहा, 'आज 12 तारीख है और गुरुवार को सत्र का आखिरी दिन है, और वे कह रहे हैं, 'मैं 3 बजे आऊंगा।' 2 बजे क्यों नहीं? यह सिर्फ देश के लोगों को भ्रमित करने और यह संदेश देने के लिए है कि विपक्षी पार्टियाँ ही सदन को चलने से रोक रही हैं।'

FCRA बिल और JPC का संदर्भ

गौरतलब है कि FCRA संशोधन विधेयक विदेशी वित्त पोषण के नियमन से जुड़ा है और इसे लेकर विपक्ष की आपत्तियाँ सत्र के शुरू से ही सामने आ रही थीं। सरकार का JPC को सौंपने का प्रस्ताव, जो आमतौर पर व्यापक सहमति बनाने का रास्ता माना जाता है, विपक्ष को सत्र के अंतिम दिन से एक दिन पहले आया — जिसे आलोचकों ने 'अंतिम क्षण की चाल' बताया।

आगे क्या होगा

मानसून सत्र का अंतिम दिन गुरुवार, 13 अगस्त को निर्धारित है। JPC गठन की प्रक्रिया और उसकी समय-सीमा अभी स्पष्ट नहीं है। विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि गृह मंत्री की सदन में उपस्थिति और उनके बयान के आधार पर वे अपना अगला रुख तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे दोष किसी भी पक्ष का हो। विपक्ष का 'भ्रम फैलाने' का आरोप राजनीतिक है, लेकिन उसका यह सवाल वैध है कि JPC का रास्ता 10 दिन पहले क्यों नहीं सुझाया गया। दूसरी ओर, सरकार यह तर्क दे सकती है कि विपक्ष ने बातचीत के बजाय हंगामे को प्राथमिकता दी। असली नुकसान जनता का है — जिस संसद सत्र के लिए करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, उसके उत्पादक घंटे राजनीतिक गतिरोध की भेंट चढ़ते रहे।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FCRA बिल को JPC के पास क्यों भेजा गया?
सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक पर व्यापक सहमति बनाने के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। विपक्ष ने इस कदम को सत्र के अंतिम दिन से एक दिन पहले उठाया गया देर से जागना करार दिया।
महुआ माजी ने मानसून सत्र को लेकर क्या कहा?
JMM की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि पूरा सत्र हंगामे, वॉकआउट और बार-बार स्थगन में बर्बाद हो गया और देश का कीमती समय व पैसा नष्ट हुआ। उन्होंने सवाल किया कि सत्र के आखिरी वक्त में ही यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है।
कांग्रेस ने गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद परिसर में तो आ रहे हैं, लेकिन लोकसभा या राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले रहे। उन्होंने पूछा कि यदि कुछ गलत नहीं हुआ, तो गृह मंत्री सदन में जवाब देने से क्यों बच रहे हैं।
विपक्ष कितने दिनों से सरकार से जवाब माँग रहा था?
विपक्षी सांसदों के अनुसार वे पिछले 10 दिनों से सरकार से जवाब माँग रहे थे और इसी कारण मकर द्वार पर प्रतिदिन धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर हुए। रेड्डी ने कहा कि 12 अगस्त को जो बयान की बात हो रही है, वह पहले हो सकता था।
मानसून सत्र का अंतिम दिन कब है?
मानसून सत्र का अंतिम दिन गुरुवार, 13 अगस्त को निर्धारित है। JPC गठन की प्रक्रिया और आगे की कार्यवाही की रूपरेखा इसी दिन स्पष्ट होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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