जुएल ओराम का BJP सहयोगी पर आरोप: 'मुझे मंत्रिमंडल से हटाने की साजिश', ओडिशा में सियासी भूचाल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने शुक्रवार, 28 अगस्त को राउरकेला में एक भावुक संबोधन में अपनी ही पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक सहयोगी पर गंभीर आरोप लगाए — कि कुछ लोग पैसे खर्च कर उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर करवाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान ने ओडिशा की राजनीति में तत्काल हलचल मचा दी और विपक्षी दलों को BJP की आंतरिक कलह पर हमला बोलने का मौका दे दिया।
मुख्य घटनाक्रम
ओराम ने आरोप लगाया कि राउरकेला में कुछ लोग उनकी छवि धूमिल करने और केंद्रीय मंत्रिमंडल से उन्हें हटवाने के लिए धन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'उन्हें लगता है कि अगर मुझे हटा दिया गया, तो उन्हें मौका मिल जाएगा। कुछ लोग इसी मकसद को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी घोषणा की कि जो उन्होंने पहले कहा था — कि वे अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे — उसे वापस लेते हुए वे अब फिर से चुनाव मैदान में उतरेंगे।
ओराम ने कहा, 'अगर कोई मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश करता है, तो मैं उसका मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम हूं। मैं उन्हें चुनौती देता हूं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'दूसरे राजनीतिक दलों से आए कुछ लोग' अब पैसे के बल पर उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी से संपर्क और आश्वासन
ओराम ने मीडिया को बताया कि उन्होंने इस विवाद पर चर्चा के लिए BJP के राज्य महासचिव (संगठन) मानस मोहंती से मुलाकात की। उनके अनुसार, पार्टी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे केंद्रीय नेतृत्व को इस मामले से अवगत कराएंगे।
ओराम ने ओडिशा में BJP के विकास में अपने योगदान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए 'खून-पसीना' बहाया है और पार्टी ने उन्हें अहम जिम्मेदारियां सौंपकर उनके काम को मान्यता दी है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) ने ओराम के बयानों की कड़ी निंदा की। BJD के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने एक प्रेस बयान में कहा कि ओराम के शब्दों से उनके खिलाफ किसी साजिश का संकेत मिलता है, जो चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया, 'मंत्री खुलेआम कह रहे हैं कि वे कानून अपने हाथ में ले लेंगे। ऐसा बयान किस हद तक सही है?' BJD ने यह भी कहा कि BJP के अंदरूनी झगड़े चरम सीमा पर पहुंच गए हैं और ऐसी भाषा राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने भी ओराम के बयानों को लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से ओराम के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियों ने संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर किया है।
आम जनता और आदिवासी समुदाय पर असर
जुएल ओराम ओडिशा के प्रमुख आदिवासी नेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्होंने स्वयं कहा कि 'एक आदिवासी नेता के तौर पर' उनकी छवि खराब करने की कोशिश करने वालों को वे नहीं बख्शेंगे। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ओडिशा में BJP सरकार अपेक्षाकृत नई है और पार्टी के भीतर आंतरिक संतुलन बनाए रखना अहम माना जाता है।
क्या होगा आगे
ओराम ने स्पष्ट किया है कि वे चुनावी राजनीति से पीछे हटने का अपना पुराना निर्णय बदल रहे हैं और अब फिर से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जो लोग उनके खिलाफ काम कर रहे हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका इस विवाद के समाधान में निर्णायक होगी।