कैथल कोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस पर फायरिंग मामले में डेरा सच्चा सौदा के 27 अनुयायी बरी
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के कैथल में 25 अगस्त 2017 को पुलिस दल पर हमले, फायरिंग और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ के आरोप में घेरे गए डेरा सच्चा सौदा के 27 अनुयायियों को अदालत ने बरी कर दिया है। कैथल सेशन जज कंचन माही ने 43 पन्नों के विस्तृत फैसले में माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा और सभी आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
अभियोजन के अनुसार, 25 अगस्त 2017 को एएसआई सुखचेन को सूचना मिली कि राजौंद थाना क्षेत्र के गांव कोटड़ा में डेरा सच्चा सौदा के करीब 60 से 70 अनुयायी मोटरसाइकिलों पर एकत्रित हैं और उनके पास गंडासे, लाठी-डंडे तथा पेट्रोल की बोतलें हैं। यह वही दौर था जब डेरा प्रमुख के खिलाफ अदालती फैसले के बाद राज्य में तनाव चरम पर था।
घटनाक्रम: पुलिस पर कथित हमला
सूचना मिलने पर एएसआई सुभाष चंद्र के नेतृत्व में पुलिस टीम निजी और सरकारी वाहनों से गांव कोटड़ा स्थित डेरे पर पहुँची। शिकायत के मुताबिक, वहाँ मौजूद भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया — कथित तौर पर फायरिंग की गई, पेट्रोल से भरी बोतलें वाहनों पर फेंकी गईं और तलवार व गंडासी से पुलिसकर्मियों पर वार किए गए। इस कथित हमले में ईएएसआई सुरजीत सिंह और जसबीर सिंह समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए बताए गए थे।
स्थिति बिगड़ने पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। आरोपों के अनुसार, इसके बाद भीड़ राजौंद गांव की ओर बढ़ी, जहाँ राजौंद पावर हाउस में आगजनी की गई। बाद में ग्रामीणों के साथ भी विवाद हुआ और खेतों की ओर भागी भीड़ द्वारा फायरिंग में राम निवास के पैर में गोली लगने की बात सामने आई थी।
अदालत में सुनवाई
पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुँचाने के बाद मामला दर्ज किया और चालान पेश किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 38 गवाह अदालत में पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से 26 आरोपियों की पैरवी अधिवक्ता हरपाल सिंह दूहन ने की, जबकि एक आरोपी का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता सुरेश मान ने किया। गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों — महिपाल, राजेश और रामफल — की मृत्यु हो गई।
अदालत का फैसला
सेशन जज कंचन माही ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 43 पन्नों का फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता, गवाह और प्रत्यक्षदर्शी आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहे। इसके आधार पर सभी 27 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
आगे की स्थिति
यह फैसला डेरा सच्चा सौदा से जुड़े उन तमाम मामलों की लंबी कानूनी यात्रा का एक अध्याय है जो 2017 के बाद से विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। अभियोजन पक्ष के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।