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कैथल कोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस पर फायरिंग मामले में डेरा सच्चा सौदा के 27 अनुयायी बरी

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कैथल कोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस पर फायरिंग मामले में डेरा सच्चा सौदा के 27 अनुयायी बरी

सारांश

2017 में पुलिस पर कथित हमले और फायरिंग के आठ साल बाद कैथल की अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के 27 अनुयायियों को बरी कर दिया। 38 गवाहों के बावजूद अभियोजन संदेह से परे आरोप साबित नहीं कर सका — यह उस दौर के डेरा-संबंधी मामलों में अदालती नतीजों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

मुख्य बातें

कैथल सेशन जज कंचन माही ने डेरा सच्चा सौदा के 27 अनुयायियों को 2017 के पुलिस हमले व फायरिंग मामले में बरी किया।
अभियोजन पक्ष ने 38 गवाह पेश किए, फिर भी अदालत ने पाया कि आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए।
अदालत ने 43 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया और सभी आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।
सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों — महिपाल , राजेश और रामफल — की मृत्यु हो चुकी थी।
बचाव पक्ष में अधिवक्ता हरपाल सिंह दूहन (26 आरोपियों के लिए) और अधिवक्ता सुरेश मान (एक आरोपी के लिए) पेश हुए।

हरियाणा के कैथल में 25 अगस्त 2017 को पुलिस दल पर हमले, फायरिंग और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ के आरोप में घेरे गए डेरा सच्चा सौदा के 27 अनुयायियों को अदालत ने बरी कर दिया है। कैथल सेशन जज कंचन माही ने 43 पन्नों के विस्तृत फैसले में माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा और सभी आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, 25 अगस्त 2017 को एएसआई सुखचेन को सूचना मिली कि राजौंद थाना क्षेत्र के गांव कोटड़ा में डेरा सच्चा सौदा के करीब 60 से 70 अनुयायी मोटरसाइकिलों पर एकत्रित हैं और उनके पास गंडासे, लाठी-डंडे तथा पेट्रोल की बोतलें हैं। यह वही दौर था जब डेरा प्रमुख के खिलाफ अदालती फैसले के बाद राज्य में तनाव चरम पर था।

घटनाक्रम: पुलिस पर कथित हमला

सूचना मिलने पर एएसआई सुभाष चंद्र के नेतृत्व में पुलिस टीम निजी और सरकारी वाहनों से गांव कोटड़ा स्थित डेरे पर पहुँची। शिकायत के मुताबिक, वहाँ मौजूद भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया — कथित तौर पर फायरिंग की गई, पेट्रोल से भरी बोतलें वाहनों पर फेंकी गईं और तलवार व गंडासी से पुलिसकर्मियों पर वार किए गए। इस कथित हमले में ईएएसआई सुरजीत सिंह और जसबीर सिंह समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए बताए गए थे।

स्थिति बिगड़ने पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। आरोपों के अनुसार, इसके बाद भीड़ राजौंद गांव की ओर बढ़ी, जहाँ राजौंद पावर हाउस में आगजनी की गई। बाद में ग्रामीणों के साथ भी विवाद हुआ और खेतों की ओर भागी भीड़ द्वारा फायरिंग में राम निवास के पैर में गोली लगने की बात सामने आई थी।

अदालत में सुनवाई

पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुँचाने के बाद मामला दर्ज किया और चालान पेश किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 38 गवाह अदालत में पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से 26 आरोपियों की पैरवी अधिवक्ता हरपाल सिंह दूहन ने की, जबकि एक आरोपी का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता सुरेश मान ने किया। गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों — महिपाल, राजेश और रामफल — की मृत्यु हो गई।

अदालत का फैसला

सेशन जज कंचन माही ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 43 पन्नों का फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता, गवाह और प्रत्यक्षदर्शी आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहे। इसके आधार पर सभी 27 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

आगे की स्थिति

यह फैसला डेरा सच्चा सौदा से जुड़े उन तमाम मामलों की लंबी कानूनी यात्रा का एक अध्याय है जो 2017 के बाद से विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। अभियोजन पक्ष के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उससे जुड़े मामलों में यह बरी होना पहला नहीं है — और शायद आखिरी भी नहीं। 38 गवाहों के बावजूद अभियोजन का विफल होना उस जाँच प्रक्रिया पर सवाल उठाता है जो अक्सर तनाव के माहौल में तेजी से की जाती है। अदालतें बार-बार यही संकेत दे रही हैं कि भीड़-हिंसा के मामलों में व्यक्तिगत आरोप साबित करना अभियोजन के लिए कठिन चुनौती है। सवाल यह है कि क्या इन फैसलों से जाँच की गुणवत्ता सुधरेगी, या ये महज कानूनी प्रक्रिया का अंत बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैथल कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के 27 अनुयायियों को क्यों बरी किया?
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के शिकायतकर्ता, गवाह और प्रत्यक्षदर्शी आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहे। इसलिए सेशन जज कंचन माही ने सभी 27 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
2017 का कैथल पुलिस फायरिंग मामला क्या था?
25 अगस्त 2017 को राजौंद थाना क्षेत्र के गांव कोटड़ा में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की भीड़ पर पुलिस दल पहुँचा था। आरोप था कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की, पेट्रोल बम फेंके और तलवार-गंडासी से हमला किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
इस मामले में कितने गवाह पेश हुए और फैसला कितने पन्नों का है?
अभियोजन पक्ष ने कुल 38 गवाह अदालत में पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 43 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया।
क्या सभी 27 आरोपी सुनवाई के दौरान जीवित थे?
नहीं। सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों — महिपाल, राजेश और रामफल — की मृत्यु हो गई। शेष 27 आरोपियों को अदालत ने बरी किया।
इस फैसले के बाद अभियोजन पक्ष के पास क्या विकल्प हैं?
सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ अभियोजन पक्ष पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है। हालाँकि अभी तक ऐसी किसी अपील की घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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