काजल बारैया हत्याकांड: भावनगर कोर्ट ने फैसल लखानी को सुनाई उम्रकैद, मात्र 31 दिन में पूरा ट्रायल
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के भावनगर जिले की एक अदालत ने 5 नवंबर 2026 को काजलबेन डी. बारैया की हत्या के दोषी फैसल उर्फ खटकी लखानी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उल्लेखनीय यह है कि यह पूरा ट्रायल मात्र 31 दिनों में पूरा हो गया, जो भारतीय आपराधिक न्यायिक प्रक्रिया में त्वरित न्याय का एक उदाहरण माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर 2026 को भावनगर स्टेट ट्रांसपोर्ट (एसटी) बस स्टैंड के सार्वजनिक प्रवेश द्वार के निकट काजलबेन बारैया की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आरोपी लखानी, जो वरतेज का निवासी था और बस स्टैंड के पास फुटपाथ पर रहता था, ने इलाके में अपना दबदबा स्थापित करने की नीयत से इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।
पुलिस के बयान के अनुसार, लखानी ने पीड़िता को गालियाँ दीं, उन पर कई बार लात-घूंसे बरसाए, बाल पकड़कर उनका सिर दीवार और टाइल वाले फर्श पर दे मारा तथा सिर, गर्दन व शरीर के अन्य अंगों पर भी वार किए, जिससे जानलेवा चोटें आईं। इस घटना का मामला 4 सितंबर 2026 को पुलिस थाने में दर्ज किया गया।
एसआईटी जांच और साक्ष्य संग्रह
अपराध की गंभीरता को देखते हुए रेंज इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) राजेंद्र असारी के निर्देश पर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की गई। यह टीम भावनगर के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) नितेश पांडे और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस आर. आर. सिंघल की देखरेख में काम कर रही थी।
जांच के दौरान पुलिस ने चश्मदीदों से पूछताछ की और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 183 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के समक्ष उनके बयान दर्ज कराए। इलाके के सीसीटीवी फुटेज जुटाए गए, फोरेंसिक विभाग की मदद से उनकी विश्लेषण की गई और फोरेंसिक अधिकारियों ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठे किए। अस्पताल में हुए पोस्टमार्टम से मृत्यु के कारण की पुष्टि हुई।
हत्या के ठीक एक महीने बाद, 4 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
गवाह को बंधक बनाने का आरोप
इस मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने कथित तौर पर अभियोजन पक्ष के एक महत्वपूर्ण चश्मदीद गवाह का अपहरण करवाया, ताकि वह अदालत में गवाही न दे सके। आरोप है कि उस गवाह को तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। इस घटना के संबंध में एक अलग मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि गवाह सुरक्षित रूप से अदालत में गवाही दे सके।
अभियोजन पक्ष और फैसला
राज्य सरकार ने ट्रायल के लिए वरिष्ठ वकील उत्पल दवे को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया। अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता, चश्मदीदों और पंच गवाहों के बयानों के साथ-साथ जांच के दौरान एकत्र किए गए सभी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
इन तमाम साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने फैसल उर्फ खटकी लखानी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
त्वरित न्याय का महत्व
गौरतलब है कि भारत में हत्या जैसे गंभीर मामलों में सुनवाई वर्षों तक खिंचना आम बात रही है। ऐसे में 31 दिनों में ट्रायल पूरा होकर सजा सुनाया जाना न्यायिक दृष्टि से उल्लेखनीय है। यह मामला यह भी रेखांकित करता है कि पुलिस की तत्परता, एसआईटी गठन, फोरेंसिक साक्ष्य और अभियोजन की सुनियोजित रणनीति मिलकर त्वरित न्याय की नींव रख सकते हैं। आगे इस मामले में उच्च न्यायालय में अपील की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।