7 नवंबर 2026
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काली चौदस पर डभोडिया हनुमान मंदिर में उमड़े 10 लाख भक्त, 141 साल बाद बना दुर्लभ शनिवार संयोग

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काली चौदस पर डभोडिया हनुमान मंदिर में उमड़े 10 लाख भक्त, 141 साल बाद बना दुर्लभ शनिवार संयोग

सारांश

गांधीनगर का डभोडिया हनुमान मंदिर इस बार सिर्फ वार्षिक उत्सव नहीं था — 141 वर्षों बाद काली चौदस और शनिवार का दुर्लभ संयोग बना, जिसने 10 लाख से अधिक भक्तों को खींच लाया। एक हजार साल पुराने इस मंदिर की आस्था और परंपरा का यह अनूठा मेल गुजरात की धार्मिक विरासत का जीवंत प्रमाण है।

मुख्य बातें

गांधीनगर के डभोडिया स्वयंभू हनुमान मंदिर में काली चौदस पर 10 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन किए।
7 नवंबर 2026 को काली चौदस और शनिवार का संयोग 141 वर्षों के बाद पहली बार बना, जिसे अत्यंत शुभ माना गया।
मेले का शुभारंभ धनतेरस की रात 12 बजे महाआरती से हुआ और यह काली चौदस की रात 12 बजे तक जारी रहा।
मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुराना है; हनुमान जन्मोत्सव पर 1,111 टिन तेल से विशेष अभिषेक की परंपरा है।
भारी भीड़ के बावजूद दर्शन बिना किसी दुर्घटना के संपन्न; ग्रामजनों, ट्रस्टी व सेवादारों की व्यवस्था की सराहना।

गुजरात के गांधीनगर जिले में स्थित प्रसिद्ध डभोडिया स्वयंभू हनुमान मंदिर में काली चौदस के अवसर पर 7 नवंबर 2026 को 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने हनुमान जी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की। इस वर्ष काली चौदस विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, क्योंकि मंदिर के पुजारी राजूभाई मेहता के अनुसार 141 वर्षों के बाद काली चौदस और शनिवार का दुर्लभ संयोग बना।

मेले का शुभारंभ और भव्य आयोजन

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें शनिवार सुबह से ही लगनी शुरू हो गईं। मेले का शुभारंभ धनतेरस की रात 12 बजे महाआरती के साथ हुआ और यह आयोजन काली चौदस की रात तक जारी रहा। काली चौदस की रात 12 बजे तक मंदिर के पट खुले रहे, जिससे हर भक्त को दर्शन का सुअवसर मिला।

मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता

पुजारी राजूभाई मेहता ने बताया कि डभोडिया हनुमान मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुराना है और इसका नामकरण डभोडा गाँव के नाम पर हुआ है। उनके अनुसार यहाँ हनुमान जी स्वयं साक्षात रूप में विराजमान हैं। मंदिर में वर्ष में तीन प्रमुख महोत्सव आयोजित होते हैं — हनुमान जन्मोत्सव, धनतेरस-काली चौदस उत्सव, और एक अन्य बड़ा धार्मिक आयोजन। हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी को 1,111 टिन तेल से विशेष अभिषेक किया जाता है, जो सदियों पुरानी परंपरा है।

141 वर्षों बाद दुर्लभ संयोग

इस वर्ष काली चौदस की विशिष्टता यह रही कि 7 नवंबर 2026 को काली चौदस और शनिवार का संयोग 141 वर्षों के बाद पुनः बना। पुजारी मेहता के अनुसार मान्यता है कि इस दुर्लभ दिन जो भी भक्त दादा की पूजा करता है, मंत्र-जाप करता है और हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसे श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है और उनके कष्ट दूर होते हैं। यह संयोग ही इस बार के उत्सव में असाधारण भीड़ का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

व्यवस्था और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

दर्शनार्थी रवि सोलंकी ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सभी यात्री आसानी से और सुविधाजनक ढंग से दर्शन कर सके। उन्होंने यह भी बताया कि आरती के बाद मंदिर से प्राप्त काले धागे का विशेष महत्व है — श्रद्धालु इसे पूरे एक वर्ष तक धारण करते हैं और अगले वर्ष नया धागा लेते हैं। पुजारी मेहता ने बताया कि इतनी विशाल भीड़ के बावजूद दर्शन बिना किसी दुर्घटना के संपन्न हुए, जिसका श्रेय ग्रामजनों, ट्रस्टी सदस्यों और सेवादारों की निरंतर सेवा को जाता है।

आगे की राह

गौरतलब है कि डभोडिया हनुमान मंदिर हर वर्ष काली चौदस पर 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, किंतु इस वर्ष का दुर्लभ संयोग इस संख्या को और अधिक बढ़ा गया। अगले महोत्सव की तैयारियाँ — हनुमान जन्मोत्सव — मंदिर ट्रस्ट द्वारा समय पर शुरू किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उतनी ही जीवंत है। 141 वर्षों के दुर्लभ संयोग का प्रचार केवल आस्था नहीं, सामुदायिक संगठन की भी मिसाल है — बिना किसी बड़े सरकारी हस्तक्षेप के इतनी विशाल भीड़ को अनुशासित ढंग से संभालना ट्रस्ट और ग्रामजनों की क्षमता को दर्शाता है। यह मॉडल राज्य के अन्य छोटे धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रेरणास्रोत हो सकता है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डभोडिया हनुमान मंदिर कहाँ स्थित है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
डभोडिया स्वयंभू हनुमान मंदिर गुजरात के गांधीनगर जिले के डभोडा गाँव में स्थित है। यह लगभग एक हजार वर्ष पुराना मंदिर है जहाँ हर वर्ष काली चौदस पर 8 से 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
काली चौदस 2026 पर 141 वर्षों का दुर्लभ संयोग क्या है?
मंदिर के पुजारी राजूभाई मेहता के अनुसार 7 नवंबर 2026 को काली चौदस और शनिवार का संयोग 141 वर्षों के बाद पुनः बना। मान्यता है कि इस दुर्लभ दिन पूजा, मंत्र-जाप और हनुमान चालीसा का पाठ करने से श्रेष्ठ फल मिलता है।
डभोडिया मंदिर में काली चौदस के मेले की शुरुआत कब होती है?
मेले का शुभारंभ धनतेरस की रात 12 बजे महाआरती के साथ होता है और यह काली चौदस की रात 12 बजे तक चलता है। इस दौरान मंदिर के पट लगातार खुले रहते हैं।
मंदिर में प्राप्त काले धागे का क्या महत्व है?
श्रद्धालु रवि सोलंकी के अनुसार आरती के बाद मंदिर से मिलने वाले काले धागे को भक्त पूरे एक वर्ष तक धारण करते हैं और अगले काली चौदस पर नया धागा लेते हैं। इसे आशीर्वाद और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
डभोडिया मंदिर में कौन-कौन से वार्षिक महोत्सव मनाए जाते हैं?
मंदिर में प्रति वर्ष तीन प्रमुख महोत्सव होते हैं — हनुमान जन्मोत्सव (जिसमें 1,111 टिन तेल से विशेष अभिषेक होता है), धनतेरस-काली चौदस उत्सव, और एक अन्य बड़ा धार्मिक आयोजन। इन सभी में हजारों से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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