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कल्याण सिंह की पाँचवीं पुण्यतिथि: लखनऊ में श्रद्धांजलि, भारत रत्न देने की उठी माँग

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कल्याण सिंह की पाँचवीं पुण्यतिथि: लखनऊ में श्रद्धांजलि, भारत रत्न देने की उठी माँग

सारांश

पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पाँचवीं पुण्यतिथि पर लखनऊ में BJP नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भारत रत्न की माँग उठाई और कहा कि राम मंदिर निर्माण का मार्ग कल्याण सिंह के बलिदान से ही प्रशस्त हुआ।

मुख्य बातें

पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पाँचवीं पुण्यतिथि पर 21 अगस्त को लखनऊ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कल्याण सिंह को भारत रत्न देने की माँग उठाई और कहा कि वह दिन दूर नहीं।
मौर्य ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल में राम मंदिर आंदोलन को निर्णायक मोड़ मिला।
BJP सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि कल्याण सिंह के बिना BJP गाँव-गाँव तक नहीं पहुँच पाती।
कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी 1932 को अलीगढ़ के मढ़ौली गाँव में हुआ था; वे UP के मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल रहे।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पाँचवीं पुण्यतिथि पर 21 अगस्त को लखनऊ में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण नमन किया। इस अवसर पर नेताओं ने कल्याण सिंह के राजनीतिक योगदान, राम मंदिर आंदोलन में उनकी ऐतिहासिक भूमिका और उत्तर प्रदेश के विकास में उनके अवदान को स्मरण किया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने खुलकर माँग की कि कल्याण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।

भारत रत्न की माँग और नेताओं के संबोधन

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कार्यक्रम में कहा कि कल्याण सिंह पद्म विभूषण से सम्मानित हैं, परंतु उनका योगदान भारत रत्न के योग्य है। उन्होंने कहा, 'यह माँग आगे बढ़ाई जा रही है और वह दिन दूर नहीं जब कल्याण सिंह को भारत रत्न मिलेगा।' मौर्य ने यह भी जोड़ा कि इस सम्मान से उनके अनुयायियों का मनोबल और बढ़ेगा।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि बाबूजी ने अपना पूरा जीवन सनातन संस्कृति और उत्तर प्रदेश के विकास को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा, 'आज उत्तर प्रदेश का प्रत्येक नर-नारी बाबूजी को याद कर उनकी स्मृतियों को नमन कर रहा है।'

राम मंदिर आंदोलन में कल्याण सिंह की भूमिका

मौर्य ने स्मरण कराया कि 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों द्वारा बाबरी ढाँचा ध्वस्त किए जाने के समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री पद के बलिदान के कारण संभव हो सका। 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया।

मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि दिवंगत कल्याण सिंह ने वही किया जो देश की जनता चाहती थी — उन्होंने राम मंदिर की नींव रखी और उसके निर्माण का मार्ग सुनिश्चित करने के बाद दुनिया से विदा हुए।

सांसद और वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया

BJP सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि केवल तीन-चार दिन के नोटिस पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना कल्याण सिंह के प्रति जन-सम्मान का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अगर कल्याण सिंह नहीं होते तो BJP शहरों से निकलकर गाँव-गाँव और गली-गली तक नहीं पहुँच पाती।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कल्याण सिंह के साथ काम करने के अनुभव को याद करते हुए कहा कि यह उनका सौभाग्य था कि उन्हें उस महापुरुष के साथ कार्य करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह 'एक वफादार संतरी' की भावना से काम करते थे और उन्होंने पूरे जीवन गाँव, गरीब और किसान की बात की।

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, 'हिंदू हृदय सम्राट आदरणीय बाबूजी कल्याण सिंह की पाँचवीं पुण्यतिथि पर मैं उनके चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ। हिंदुत्व, सनातन और विशेष रूप से राम मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने जो बलिदान दिया, वह अमर है।'

कल्याण सिंह: एक परिचय

कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी 1932 को अलीगढ़ जिले की अतरौली तहसील के मढ़ौली गाँव में हुआ था। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके थे। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शुमार कल्याण सिंह को हिंदुत्ववादी नेता और प्रखर वक्ता के रूप में याद किया जाता है।

गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हैं और BJP अपने वरिष्ठ नेताओं की विरासत को जनमानस में पुनर्स्थापित करने में जुटी है। भारत रत्न की यह माँग आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे पुण्यतिथि के मंच से उठाना BJP की उस रणनीति का हिस्सा लगता है जिसमें हिंदुत्व विरासत को चुनावी चेतना से जोड़ा जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह माँग सत्तारूढ़ दल के भीतर से आ रही है, फिर भी केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक संकेत नहीं मिला है। राम मंदिर को कल्याण सिंह के बलिदान से जोड़ना राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली आख्यान है, किंतु उनके शासनकाल की समग्र समीक्षा — विकास, कानून-व्यवस्था और पिछड़े वर्गों की भागीदारी — इस कार्यक्रम में अनुपस्थित रही।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कल्याण सिंह कौन थे और उनका राजनीतिक योगदान क्या रहा?
कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल रहे, जिन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वे राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे और BJP को जमीनी स्तर तक विस्तार देने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। उनका जन्म 5 जनवरी 1932 को अलीगढ़ के मढ़ौली गाँव में हुआ था।
कल्याण सिंह को भारत रत्न देने की माँग किसने और क्यों उठाई?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 21 अगस्त को लखनऊ में आयोजित पुण्यतिथि कार्यक्रम में यह माँग उठाई। उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह का राम मंदिर आंदोलन में योगदान और मुख्यमंत्री पद का बलिदान भारत रत्न के योग्य है।
राम मंदिर आंदोलन में कल्याण सिंह की भूमिका क्या थी?
6 दिसंबर 1992 को जब कारसेवकों ने बाबरी ढाँचा ध्वस्त किया, उस समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। नेताओं का कहना है कि उन्होंने अपना मुख्यमंत्री पद दाँव पर लगाकर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।
पुण्यतिथि कार्यक्रम में कौन-कौन से नेता शामिल हुए?
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, मंत्री ओम प्रकाश राजभर, मंत्री जयवीर सिंह और BJP सांसद साक्षी महाराज सहित अनेक वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
कल्याण सिंह की पुण्यतिथि कब है और यह कौन सी पुण्यतिथि थी?
21 अगस्त को कल्याण सिंह की पाँचवीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर को नेताओं ने हिंदू गौरव के प्रतीक के रूप में मनाया और उनके राजनीतिक एवं सामाजिक योगदान को याद किया।
राष्ट्र प्रेस
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