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कानपुर में पांडु नदी उफान पर, 11 इलाके जलमग्न; NDRF के 35 जवान रेस्क्यू में जुटे

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कानपुर में पांडु नदी उफान पर, 11 इलाके जलमग्न; NDRF के 35 जवान रेस्क्यू में जुटे

सारांश

कानपुर में पांडु नदी के उफान ने 11 इलाकों को जलमग्न कर दिया है और करीब 1,000 परिवार प्रभावित हैं। घरों में छह फीट तक पानी, सड़क किनारे टेंट में रात — यह सिर्फ बाढ़ नहीं, एक मौसमी नदी की बार-बार की मार है जिसके लिए स्थायी समाधान अभी भी नदारद है।

मुख्य बातें

कानपुर में पांडु नदी के जलस्तर में वृद्धि से 11 इलाके जलमग्न, करीब 1,000 परिवार प्रभावित।
कई बस्तियों में घरों के भीतर चार से छह फीट तक पानी भरने की स्थानीय लोगों ने पुष्टि की।
NDRF की 35 सदस्यीय टीम पिछली शाम से रेस्क्यू अभियान में; पिछली रात 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
पिपौरी ग्राम पंचायत में 150 से 200 घर प्रभावित; अभी 15-20 घरों में लोग मौजूद।
करीब 200-250 लोग सड़क किनारे टेंट में रहने को मजबूर; खाने-पीने और आजीविका की गंभीर चुनौती।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रभावित लोगों के भोजन और आश्रय की व्यवस्था प्रशासन ने की है।

कानपुर में पांडु नदी का जलस्तर 4 सितंबर को खतरनाक स्तर तक पहुँच गया, जिससे शहर के 11 निचले इलाके जलमग्न हो गए और करीब 1,000 परिवार प्रभावित हुए। कई बस्तियों में घरों के भीतर चार से छह फीट तक पानी भर जाने की स्थानीय लोगों ने पुष्टि की। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 35 सदस्यीय टीम पिछली शाम से लगातार रेस्क्यू अभियान में लगी है।

मुख्य घटनाक्रम

पांडु नदी एक मौसमी नदी है और आसपास के कैचमेंट क्षेत्र में भारी बारिश के कारण इसका जलस्तर तेज़ी से बढ़ा। कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गंगा और यमुना का जलस्तर फिलहाल बड़ी चिंता का कारण नहीं है, लेकिन पास की नहर से भी स्थिति प्रभावित हुई है। पिछली रात NDRF की नावों के ज़रिए करीब 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

एसडीएम सदर अभिनव सिंह के अनुसार, पिपौरी ग्राम पंचायत में 150 से 200 घर प्रभावित हुए हैं। अधिकांश निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है, जबकि अभी भी करीब 15 से 20 घरों में लोग मौजूद हैं जो स्थिति पर नज़र रख रहे हैं।

प्रभावित परिवारों की स्थिति

स्थानीय निवासी सुरेश ने बताया कि करीब 200 से 250 लोग सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की टीम एक दिन पहले आई थी, लेकिन उसके बाद राहत के बारे में कोई ताज़ा जानकारी नहीं मिली।

स्थानीय निवासी प्रियंका ने बताया कि उनके घर में करीब छह फीट पानी भर गया और घर का अधिकांश सामान बर्बाद हो गया। करीब दो महीने पहले खरीदा गया उनका ऑटो भी पानी में फँसा है, जिससे परिवार की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से नुकसान की भरपाई की माँग की है।

एक अन्य प्रभावित निवासी किशोर ने बताया कि वह सुरक्षित स्थान पर चले गए थे, लेकिन ज़रूरी कागज़ात और सामान निकालने के लिए वापस लौटे। हमीरपुर क्षेत्र से कानपुर में किराये पर रहने वाले एक अन्य परिवार ने बताया कि तीन-चार दिनों से घर में पानी भरा है और परिवार उधार लेकर गुज़ारा कर रहा है।

NDRF और प्रशासन की प्रतिक्रिया

NDRF टीम कमांडर अजय सिंह ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और पानी बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है — पिछली रात से अब तक करीब पौने फीट की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रभावित लोगों के खाने और रहने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई है। NDRF की नावें लगातार चलाई जा रही हैं और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर आने की अपील की जा रही है।

आम जनता पर असर

प्रभावित परिवार बेड, फ्रिज, गैस सिलेंडर, राशन और ज़रूरी सामान सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने में जुटे हैं। कई परिवार घरों में ताला लगाकर सड़क किनारे टेंट में रहने को मजबूर हैं। बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए हालात विशेष रूप से कठिन बताए जा रहे हैं।

क्या होगा आगे

एसडीएम सदर अभिनव सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रशासन तब तक मौके पर सक्रिय रहेगा जब तक प्रभावित क्षेत्र का हर व्यक्ति सुरक्षित नहीं हो जाता। पांडु नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्थिति के अनुसार राहत कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी स्थायी जल-निकासी ढाँचा अभी भी अधूरा है। स्थानीय निवासी सुरेश का यह कहना कि 'प्रशासन एक दिन पहले आया और फिर कोई जानकारी नहीं मिली' — यह प्रतिक्रियात्मक राहत की सीमा को उजागर करता है। जब तक कैचमेंट क्षेत्र प्रबंधन और नहर नियंत्रण में समन्वय नहीं होगा, NDRF की नावें हर साल उतरती रहेंगी और परिवार हर साल सड़क किनारे टेंट लगाते रहेंगे।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर में पांडु नदी की बाढ़ से कितने परिवार प्रभावित हुए हैं?
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, करीब 1,000 परिवार प्रभावित हुए हैं और 11 इलाके जलमग्न हैं। पिपौरी ग्राम पंचायत में अकेले 150 से 200 घर प्रभावित बताए गए हैं।
NDRF ने कानपुर बाढ़ में कितने लोगों को बचाया?
NDRF की 35 सदस्यीय टीम पिछली शाम से रेस्क्यू अभियान में लगी है और पिछली रात नावों के ज़रिए करीब 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। अभी भी 15 से 20 घरों में लोग मौजूद हैं।
पांडु नदी का जलस्तर क्यों बढ़ा?
जिलाधिकारी के अनुसार, पांडु एक मौसमी नदी है और आसपास के कैचमेंट क्षेत्र में भारी बारिश के कारण इसका जलस्तर बढ़ा है। पास की नहर से भी स्थिति प्रभावित हुई है।
कानपुर बाढ़ में प्रभावित लोगों के लिए राहत की क्या व्यवस्था है?
एसडीएम सदर अभिनव सिंह के अनुसार, प्रभावित लोगों के खाने और रहने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई है। NDRF की नावें लगातार चलाई जा रही हैं और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर आने की अपील की जा रही है।
क्या कानपुर में गंगा और यमुना का जलस्तर भी खतरे में है?
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि गंगा और यमुना के जलस्तर से फिलहाल कोई बड़ी समस्या नहीं है। मुख्य संकट पांडु नदी के जलस्तर में वृद्धि और पास की नहर के कारण उत्पन्न हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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