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कानपुर में रॉटविलर कुत्तों का कहर: 55 वर्षीय महिला के शरीर पर 13 घाव, हैलट अस्पताल में गंभीर हालत

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कानपुर में रॉटविलर कुत्तों का कहर: 55 वर्षीय महिला के शरीर पर 13 घाव, हैलट अस्पताल में गंभीर हालत

सारांश

कानपुर की फ्रेंड्स कॉलोनी में रविवार शाम तीन रॉटविलर कुत्तों ने 55 वर्षीय महिला गीता को 13 जगह नोंचा — डॉक्टरों ने इसे ग्रेड-3 डॉग बाइट बताया। एक गिग वर्कर और पार्क में खेल रहे बच्चों ने जान जोखिम में डालकर महिला को बचाया। यह इलाके में इन्हीं कुत्तों का दूसरा बड़ा हमला बताया जा रहा है।

मुख्य बातें

कानपुर की फ्रेंड्स कॉलोनी में 21 जून की शाम तीन रॉटविलर कुत्तों ने 55 वर्षीय गीता पर हमला किया।
महिला के शरीर पर 13 गहरे घाव ; डॉक्टरों ने ग्रेड-3 डॉग बाइट श्रेणी में रखा।
पीड़िता को हैलट हॉस्पिटल रेफर किया गया, हालत अभी भी गंभीर।
कुत्ते कथित तौर पर एक कांग्रेस नेता के भाई के बताए जा रहे हैं — पुलिस पुष्टि अभी बाकी।
करीब 4-6 महीने पहले भी इन्हीं कुत्तों ने एक 5 वर्षीय बच्ची को घायल किया था।
स्थानीय निवासियों ने मालिकों पर कार्रवाई और सार्वजनिक सुरक्षा की माँग की।

कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र की फ्रेंड्स कॉलोनी में रविवार, 21 जून की शाम तीन रॉटविलर नस्ल के कुत्तों ने एक 55 वर्षीय महिला गीता पर हमला कर दिया, जिससे उनके शरीर पर 13 गहरे घाव आए। डॉक्टरों ने इसे ग्रेड-3 डॉग बाइट — यानी अत्यंत गंभीर श्रेणी — में रखा है। प्राथमिक उपचार के बाद पीड़िता को हैलट हॉस्पिटल रेफर किया गया है, जहाँ उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

हमले का घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, गीता पहली बार इस इलाके में खाना बनाने और घरेलू काम के लिए आई थीं। जब वह रास्ते से गुज़र रही थीं, तभी तीनों कुत्तों ने उन पर हमला बोल दिया। महिला की चीख-पुकार सुनकर पास से गुज़र रहे एक गिग वर्कर ने साहस दिखाते हुए ईंट-पत्थर फेंककर कुत्तों को भगाने का प्रयास किया। इसी दौरान पास के पार्क में खेल रहे बच्चे क्रिकेट बैट और डंडे लेकर मौके पर पहुँचे और कुत्तों को खदेड़ा। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि यदि समय पर मदद न मिलती तो घटना और अधिक घातक हो सकती थी।

प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही

स्थानीय निवासी सीमा दीक्षित ने बताया कि जब वह मौके पर पहुँचीं, तो गीता लहूलुहान अवस्था में थीं और हमले के कारण उनके कपड़े फट चुके थे। उन्होंने तुरंत अपने दुपट्टे से पीड़िता को ढका और अन्य लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल भिजवाया। हमले के बाद पीड़िता की बेटियाँ बॉबी और तेजस्वी उन्हें स्कूटी पर बैठाकर अस्पताल ले गईं। गीता के पति ज्योति प्रकाश एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं।

इलाके में पहले भी हो चुके हैं हमले

स्थानीय निवासी रतन गुप्ता ने बताया कि इन कुत्तों के कारण क्षेत्र में लंबे समय से असुरक्षा का माहौल है और बच्चे पार्क में जाने से डरते हैं। उनके अनुसार, करीब चार से छह महीने पहले भी इन्हीं कुत्तों ने एक पाँच वर्षीय बच्ची को अपना शिकार बनाया था। गुप्ता का आरोप है कि कुत्तों के मालिक अक्सर इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर खुला छोड़ देते हैं, जिससे राहगीरों के लिए लगातार खतरा बना रहता है।

कुत्तों का स्वामित्व और विवाद

जानकारी के अनुसार, ये तीनों रॉटविलर कुत्ते कथित तौर पर एक कांग्रेस नेता के भाई के बताए जा रहे हैं। हालाँकि इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में पालतू आक्रामक नस्लों के कुत्तों के सार्वजनिक स्थानों पर खुले घूमने को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

आगे क्या होगा

पीड़िता गीता फिलहाल हैलट हॉस्पिटल में उपचाराधीन हैं। स्थानीय निवासियों ने पुलिस और प्रशासन से कुत्तों के मालिकों पर कड़ी कार्रवाई और इलाके में सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। चकेरी थाना पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह घटना सार्वजनिक स्थानों पर नागरिक सुरक्षा के व्यापक सवाल को और उजागर करेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर में रॉटविलर कुत्तों ने किस पर हमला किया?
कानपुर की फ्रेंड्स कॉलोनी में तीन रॉटविलर कुत्तों ने 55 वर्षीय महिला गीता पर हमला किया, जो पहली बार उस इलाके में घरेलू काम के लिए आई थीं। हमले में उनके शरीर पर 13 गहरे घाव आए और उन्हें हैलट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
ग्रेड-3 डॉग बाइट कितनी गंभीर होती है?
ग्रेड-3 डॉग बाइट को चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत गंभीर श्रेणी में रखा जाता है, जिसमें गहरे घाव, संक्रमण का उच्च जोखिम और रेबीज़ की आशंका शामिल होती है। इस मामले में डॉक्टरों ने पीड़िता गीता के 13 घावों को इसी श्रेणी में रखा है।
कुत्ते किसके थे और क्या कार्रवाई हुई?
जानकारी के अनुसार, ये रॉटविलर कुत्ते कथित तौर पर एक कांग्रेस नेता के भाई के बताए जा रहे हैं। चकेरी थाना पुलिस मामले की जाँच कर रही है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।
क्या इन कुत्तों ने पहले भी हमला किया था?
हाँ, स्थानीय निवासी रतन गुप्ता के अनुसार करीब चार से छह महीने पहले इन्हीं कुत्तों ने एक पाँच वर्षीय बच्ची को घायल किया था। उनका आरोप है कि मालिकों द्वारा कुत्तों को अक्सर सार्वजनिक स्थानों पर खुला छोड़ा जाता है।
पीड़िता को बचाने में किसने मदद की?
महिला की चीख सुनकर पास से गुज़र रहे एक गिग वर्कर ने ईंट-पत्थर फेंककर कुत्तों को हटाने की कोशिश की। इसके साथ ही पार्क में खेल रहे बच्चे क्रिकेट बैट और डंडे लेकर मौके पर पहुँचे और कुत्तों को खदेड़ा। स्थानीय निवासी सीमा दीक्षित ने अपने दुपट्टे से पीड़िता को ढककर उन्हें अस्पताल भिजवाने में मदद की।
राष्ट्र प्रेस
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