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शाहजहांपुर में आवारा कुत्तों के हमले में 11 वर्षीय सवालिया की मौत, ककरा इलाके में दहशत

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शाहजहांपुर में आवारा कुत्तों के हमले में 11 वर्षीय सवालिया की मौत, ककरा इलाके में दहशत

सारांश

शाहजहांपुर के ककरा इलाके में रविवार सुबह आवारा कुत्तों के झुंड ने 11 वर्षीय सवालिया पर हमला किया — गर्दन सहित शरीर पर 10 से 12 गहरे घाव। राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यह घटना आवारा पशु प्रबंधन की नीतिगत विफलता का एक और दर्दनाक प्रमाण है।

मुख्य बातें

11 वर्षीय सवालिया पर 24 मई, रविवार की सुबह शाहजहांपुर के ककरा इलाके में 5-6 आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला किया।
बच्ची के शरीर पर 10 से 12 स्थानों पर गहरे घाव थे; राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हुई।
मेहराज अहमद (ईएमओ) ने पुष्टि की कि बच्ची को अत्यंत गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था।
मृतका के पिता नईम बटाई पर खेत लेकर मजदूरी करते हैं; परिवार में 6 बच्चे हैं।
परिजनों ने पोस्टमार्टम से इनकार कर शव घर ले गए।
स्थानीय लोगों में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर प्रशासन के विरुद्ध भारी आक्रोश है।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के ककरा इलाके में रविवार, 24 मई की सुबह आवारा कुत्तों के एक झुंड ने 11 वर्षीय बच्ची सवालिया पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उसकी बाद में राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। सदर बाजार थाना क्षेत्र की इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके में भय और आक्रोश की लहर फैला दी है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला

परिजनों के अनुसार, सवालिया अपने पिता नईम के साथ चार्जिंग स्टेशन प्वाइंट के समीप स्थित खेत पर सब्जी तोड़ने गई थी। खेत पहुँचने के बाद पिता ने उसे अपने भाई इकराम को बुलाने के लिए घर की ओर भेजा। रास्ते में पाँच से छह आवारा कुत्तों के झुंड ने बच्ची को घेर लिया और बेरहमी से हमला कर दिया।

कुत्तों ने सवालिया की गर्दन सहित शरीर के कई हिस्सों पर गहरे घाव किए। चिकित्सकों के अनुसार उसके शरीर पर 10 से 12 स्थानों पर गंभीर चोटें थीं। मौके से गुजर रहे लोगों ने हमला देखकर तत्काल परिवार को सूचित किया, लेकिन तब तक बच्ची बुरी तरह घायल हो चुकी थी।

अस्पताल में उपचार और मौत

राजकीय मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेहराज अहमद ने बताया कि सवालिया को अत्यंत गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। उसके शरीर और गर्दन पर कुत्तों के काटने के कई गहरे निशान थे। चिकित्सकों ने उसे बचाने का हरसंभव प्रयास किया, परंतु इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मृतका के चाचा रफी अहमद ने बताया कि सवालिया चार बहनों और दो भाइयों में से एक थी। उसके पिता बटाई पर खेत लेकर मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और एंबुलेंस से शव को घर ले गए।

परिवार और समाज पर असर

बच्ची की मौत की खबर फैलते ही परिवार में कोहराम मच गया। इलाके के लोगों में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर भारी नाराजगी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है और प्रशासन की लापरवाही के कारण आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

आवारा कुत्तों की समस्या: व्यापक संदर्भ

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि नगर निकायों द्वारा पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन न होने को इस समस्या की मुख्य वजह माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और नगर पालिकाएँ इस दिशा में पर्याप्त कदम उठाने में विफल रही हैं।

आगे क्या होगा

फिलहाल पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है। स्थानीय लोग प्रशासन से आवारा कुत्तों के खिलाफ ठोस कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजे की माँग कर रहे हैं। यह दुखद घटना एक बार फिर नगरीय क्षेत्रों में आवारा पशु प्रबंधन की नीतिगत खामियों को उजागर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी नीतिगत प्रतिक्रिया अस्थायी और प्रतिक्रियावादी रही है। असली सवाल यह है कि जब तक किसी मासूम की जान नहीं जाती, तब तक प्रशासन क्यों नहीं हिलता — और क्या इस बार भी आक्रोश महज कुछ दिनों की चर्चा बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाहजहांपुर में आवारा कुत्तों के हमले में किसकी मौत हुई?
शाहजहांपुर के ककरा इलाके में 11 वर्षीय बच्ची सवालिया की मौत हुई, जिस पर 24 मई को रविवार की सुबह 5-6 आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला किया था। राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना 24 मई को रविवार की सुबह उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के सदर बाजार थाना क्षेत्र के ककरा इलाके में हुई। बच्ची चार्जिंग स्टेशन प्वाइंट के पास स्थित खेत से घर की ओर जा रही थी।
बच्ची को कितनी गंभीर चोटें आई थीं?
डॉ. मेहराज अहमद के अनुसार कुत्तों ने बच्ची की गर्दन सहित शरीर के कई हिस्सों पर बुरी तरह हमला किया और उसके शरीर पर 10 से 12 स्थानों पर गहरे घाव थे। बच्ची को अत्यंत गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था।
परिजनों ने पोस्टमार्टम से क्यों इनकार किया?
रिपोर्टों के अनुसार परिजनों ने बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और एंबुलेंस से शव को घर ले गए। परिजनों की ओर से इनकार का विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार नगर निकायों को पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा। स्थानीय लोग प्रशासन से ठोस कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजे की माँग कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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