15 जुलाई 2026
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कन्याकुमारी में 79 हजार एकड़ खेतों की सिंचाई: तमिलनाडु सरकार ने 850 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया

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कन्याकुमारी में 79 हजार एकड़ खेतों की सिंचाई: तमिलनाडु सरकार ने 850 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने कन्याकुमारी ज़िले के 79 हजार एकड़ खेतों की सिंचाई के लिए 850 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश जारी किया है। यह व्यवस्था 1 जून 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी और थोवलई, अगस्त्येश्वरम समेत छह तालुकों के किसानों को लाभ मिलेगा।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने कन्याकुमारी ज़िले में 850 क्यूसेक की दर से सिंचाई जल छोड़ने का आदेश जारी किया।
यह व्यवस्था 1 जून 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी।
पेचीपराई , पेरुंचानी , चित्तर-I और चित्तर-II बांधों से पानी छोड़ा जाएगा।
लगभग 79 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
थोवलई , अगस्त्येश्वरम , कलकुलम , किलियूर , तिरुवट्टार और विलावन्कोड तालुके लाभान्वित होंगे।
धान, केला और नारियल जैसी प्रमुख फसलों की खेती को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद।

तमिलनाडु सरकार ने कन्याकुमारी ज़िले में किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसके तहत 850 क्यूसेक की दर से पानी छोड़ा जाएगा और लगभग 79 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। यह आदेश जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी किया गया है और 1 जून 2026 से प्रभावी होकर 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगा।

मुख्य घटनाक्रम

कोडायार और पट्टनमकाल सिंचाई प्रणालियों के अंतर्गत आने वाले चार प्रमुख बांधों — पेचीपराई, पेरुंचानी, चित्तर-I और चित्तर-II — से यह जल प्रवाह शुरू किया जाएगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पानी छोड़ने की प्रक्रिया जल उपलब्धता और सिंचाई की वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर नियंत्रित की जाएगी, ताकि नहरों और अन्य सिंचाई माध्यमों के ज़रिए खेतों तक पर्याप्त जल पहुँच सके।

प्रभावित क्षेत्र और लाभान्वित किसान

इस फैसले से कन्याकुमारी ज़िले के कई तालुकों के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। इनमें थोवलई, अगस्त्येश्वरम, कलकुलम, किलियूर, तिरुवट्टार और विलावन्कोड तालुके शामिल हैं। इन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले गाँवों में लगभग 79 हजार एकड़ कृषि भूमि को इस जल आपूर्ति से सिंचाई की सुविधा प्राप्त होगी।

गौरतलब है कि इन इलाकों में कृषि मुख्यतः सिंचाई पर निर्भर है और वर्षा की अनिश्चितता के कारण किसानों को अक्सर जल संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह आदेश पूरे कृषि मौसम के दौरान निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

फसलों पर असर

इस जल आपूर्ति से धान, केला, नारियल और अन्य प्रमुख फसलों की खेती को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित और पर्याप्त सिंचाई से उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे स्थानीय किसानों की आय में भी सुधार हो सकता है। यह कदम विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अनिश्चित वर्षा के कारण फसल नुकसान के जोखिम में रहते हैं।

जल प्रबंधन की दिशा में पहल

तमिलनाडु सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल मौजूदा कृषि उत्पादन को स्थिरता मिलेगी, बल्कि आगामी कृषि सीजन में उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई ज़िले जल प्रबंधन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं और कुशल सिंचाई नीति की माँग लगातार बढ़ रही है। आने वाले महीनों में इस योजना के क्रियान्वयन पर किसान संगठनों और प्रशासन की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा वितरण तंत्र की होगी — क्योंकि नहर प्रणालियों की जर्जर हालत और अतिक्रमण की समस्या दक्षिण तमिलनाडु में पुरानी है। 850 क्यूसेक की दर तय करना एक बात है, लेकिन यह पानी अंतिम छोर के किसान तक पहुँचे, यह सुनिश्चित करना प्रशासनिक इच्छाशक्ति की माँग करता है। गौरतलब है कि कन्याकुमारी जैसे ज़िले में जहाँ छोटे और सीमांत किसानों की बहुलता है, वहाँ जल वितरण की निगरानी के बिना बड़े भूधारकों को असंगत लाभ मिलने का जोखिम रहता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु सरकार ने कन्याकुमारी में सिंचाई के लिए कितना पानी छोड़ने का आदेश दिया है?
तमिलनाडु सरकार ने कन्याकुमारी ज़िले में 850 क्यूसेक की दर से सिंचाई जल छोड़ने का आदेश जारी किया है। यह पानी कोडायार और पट्टनमकाल सिंचाई प्रणालियों के चार बांधों — पेचीपराई, पेरुंचानी, चित्तर-I और चित्तर-II — से छोड़ा जाएगा।
यह सिंचाई व्यवस्था कब से कब तक लागू रहेगी?
यह व्यवस्था 1 जून 2026 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। इस पूरी अवधि के दौरान किसानों को कृषि मौसम में निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस आदेश से कन्याकुमारी के कौन-से तालुके लाभान्वित होंगे?
इस आदेश से थोवलई, अगस्त्येश्वरम, कलकुलम, किलियूर, तिरुवट्टार और विलावन्कोड तालुके लाभान्वित होंगे। इन क्षेत्रों में लगभग 79 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
इस जल आपूर्ति से किन फसलों को फायदा मिलेगा?
इस सिंचाई व्यवस्था से धान, केला, नारियल और अन्य प्रमुख फसलों की खेती को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। पर्याप्त जल आपूर्ति से उत्पादन में वृद्धि होने और स्थानीय किसानों की आय सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह आदेश किसने जारी किया है?
यह आदेश तमिलनाडु के जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्र में जल प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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