कर्नाटक में आरटीसी बस किराया बढ़ोतरी के संकेत, परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने डीजल मूल्य वृद्धि का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए संकेत दिया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सड़क परिवहन निगमों (आरटीसी) के बस किराए में जल्द बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने दिसंबर 2025 के बाद से डीजल की कीमतों में ₹15 से ₹16 प्रति लीटर की वृद्धि का हवाला देते हुए यह बात कही। मंत्री के अनुसार, चारों आरटीसी से रिपोर्ट मिलने और कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
सुरेश ने स्पष्ट किया कि पिछली बार दिसंबर 2025 में बस किराया बढ़ाया गया था। तब से डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते आरटीसी की परिचालन लागत बढ़ गई है। उन्होंने कहा, 'हमने दिसंबर 2025 में बसों का किराया बढ़ाया था। तब से, डीजल की कीमत प्रति लीटर 15 से 16 रुपये तक बढ़ गई है। हम कीमत में बढ़ोतरी के अनुपात पर चर्चा करेंगे, सरकार को प्रस्ताव सौंपेंगे और कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिलने के बाद आरटीसी बस किराया बढ़ोतरी लागू की जाएगी।'
मंत्री ने बताया कि सरकार ने राज्य द्वारा संचालित चारों आरटीसी से प्रस्तावित किराया संशोधन पर रिपोर्ट माँगी है, जो गुरुवार या शुक्रवार तक सौंपे जाने की उम्मीद थी।
विपक्ष पर सुरेश का पलटवार
परिवहन मंत्री ने विपक्ष के उस रुख पर सवाल उठाया जिसमें किराया न बढ़ाने की माँग की जा रही है। उन्होंने कहा, 'अगर केंद्र सरकार ने डीजल की कीमतें पाँच बार बढ़ाई हैं और विपक्ष कहता है कि बस का किराया नहीं बढ़ाया जाना चाहिए, तो हम आरटीसी कैसे चलाएं?'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य की चारों आरटीसी पहले से ही वित्तीय दबाव में हैं। कर्नाटक शक्ति योजना के तहत महिलाओं, 6 साल और उससे अधिक उम्र की लड़कियों तथा ट्रांसजेंडर लोगों को सरकारी नॉन-लग्जरी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है, जिसकी एवज में चारों निगम सरकार से ₹5,650.95 करोड़ की भरपाई का इंतज़ार कर रहे हैं।
कर्नाटक की आरटीसी: आँकड़ों में
कर्नाटक सरकार द्वारा संचालित चारों सड़क परिवहन निगम राज्यभर में कुल 26,054 बसें चलाते हैं। इनमें बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (बीएमटीसी) इलेक्ट्रिक बसों सहित 7,067 बसें संचालित करता है। परिवहन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय औसत 1,000 लोगों पर 1.2 बसें है, जबकि कर्नाटक 1,000 लोगों पर 3.81 बसें उपलब्ध कराता है — जो इसे देश के बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में रखता है।
गौरतलब है कि शक्ति योजना के तहत मुफ्त यात्रा की सुविधा की भरपाई में देरी आरटीसी की वित्तीय स्थिति को और जटिल बना रही है, जो किराया बढ़ोतरी के दबाव का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
आम यात्रियों पर असर
किराया बढ़ोतरी का सीधा असर लाखों दैनिक यात्रियों पर पड़ेगा, जो काम, स्कूल और अन्य ज़रूरतों के लिए सरकारी बसों पर निर्भर हैं। हालाँकि, शक्ति योजना के लाभार्थी — महिलाएँ, लड़कियाँ और ट्रांसजेंडर — नॉन-लग्जरी बसों में मुफ्त यात्रा करती रहेंगी। किराया संशोधन अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकता है, यह भी सुरेश ने संकेत दिया।
क्या होगा आगे
चारों आरटीसी की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार किराया वृद्धि के अनुपात और क्षेत्रीय भिन्नता पर विचार करेगी। इसके बाद कैबिनेट की बैठक में अंतिम मंजूरी मिलने पर नई दरें लागू होंगी। यात्रियों को संभवतः आने वाले हफ्तों में स्पष्टता मिलेगी।