बस किराया घटाएगी कर्नाटक सरकार, अगर केंद्र घटाए पेट्रोल डीजल दाम: CM शिवकुमार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती करती है, तो राज्य सरकार उसी अनुपात में बस का किराया भी घटाएगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया जब विपक्षी दलों ने गुरुवार को बस किराए में हालिया वृद्धि के विरोध में राज्यव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया था।
परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि राज्य के परिवहन निगम गहरे घाटे में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा भी आया जब निगमों के पास अगले 10 दिनों से तीन सप्ताह तक के लिए डीजल खरीदने को भी पर्याप्त धन नहीं था। ऐसे में राज्य सरकार को हस्तक्षेप कर आपात वित्तीय सहायता देनी पड़ी।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देने वाली 'शक्ति' योजना ने परिवहन निगमों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बनाया है। इन्हीं परिस्थितियों में कुछ मार्गों पर ₹2 से ₹3 की किराया वृद्धि अनिवार्य हो गई।
विपक्ष पर जवाबी हमला
शिवकुमार ने विपक्षी दलों पर तीखा निशाना साधते हुए पूछा कि जब केंद्र सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ी थीं, तब वे चुप क्यों रहे? उन्होंने सवाल किया कि उर्वरकों, कीटनाशकों, इस्पात, सीमेंट और दवाओं के दाम बढ़ने पर विरोध क्यों नहीं हुआ? साथ ही उन्होंने पूछा कि कृषि उपकरणों की बढ़ती लागत और किसानों पर पड़ने वाले उसके बोझ की चिंता किसी को क्यों नहीं है।
केंद्र सरकार को चुनौती
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उपकरों और करों का बोझ कम करने की माँग करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "यदि केंद्र सरकार ईंधन की कीमतें कम करती है, तो राज्य सरकार तदनुसार उचित कदम उठाएगी।"
किसानों और दूध की कीमतों पर स्पष्टीकरण
शिवकुमार ने राज्य में जारी सूखे के दौरान किसानों की कठिनाइयों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि सरकार उनके संघर्षों को भलीभाँति समझती है। साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि परिवहन निगमों को भी आर्थिक रूप से सक्षम बनाए रखना ज़रूरी है।
दूध की कीमतों में अंतर को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अंतर गुणवत्ता और वसा की मात्रा के कारण है। उन्होंने कहा कि सामान्य दूध, देसी गायों का दूध और भैंस का दूध — तीनों की वसा सामग्री अलग होती है और लोगों को इन भेदों को समझना चाहिए।
आने वाले दिनों में विपक्ष के प्रदर्शन और केंद्र के ईंधन मूल्य निर्णय के मद्देनज़र यह बयान राज्य की राजनीति में केंद्रीय बहस का विषय बनने की संभावना है।