कर्नाटक में बस किराया बढ़ा: BMTC न्यूनतम किराया ₹6 से ₹10, दिवाली से पहले आधी रात से लागू
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को राज्य के सभी चार सरकारी सड़क परिवहन निगमों — बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (BMTC), कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC), उत्तर-पश्चिम कर्नाटक सड़क परिवहन निगम (NWKRTC) और कल्याण कर्नाटक सड़क परिवहन निगम (KKRTC) — के टिकट किराए में वृद्धि की घोषणा की। संशोधित दरें उसी रात आधी रात से प्रभावी हो गईं। यह घोषणा दिवाली त्योहार से ठीक पहले की गई है, जब राज्य भर में बसों में यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
किराया संशोधन: श्रेणीवार विवरण
BMTC की सिटी बसों में न्यूनतम किराया ₹6 से बढ़ाकर ₹10 और अधिकतम किराया ₹35 से बढ़ाकर ₹45 कर दिया गया है। दूरी के अनुसार वृद्धि इस प्रकार है: 2 किलोमीटर तक की यात्रा पर ₹4, 2 से 4 किलोमीटर पर ₹6, और इससे अधिक दूरी पर अधिकतम ₹12 की बढ़ोतरी।
वायु वज्र हवाई अड्डा बस सेवाओं में किराया दूरी के अनुसार ₹5 से ₹15 तक बढ़ेगा। 6 किलोमीटर तक की यात्रा पर ₹5, 6 से 18 किलोमीटर पर ₹10 और इससे अधिक दूरी पर अधिकतम ₹15 की वृद्धि होगी।
वातानुकूलित बसों में न्यूनतम किराया वृद्धि ₹10 से ₹15 निर्धारित की गई है। 60 किलोमीटर की यात्रा के लिए अधिकतम किराया ₹75 से बढ़ाकर ₹90 किया गया है। मैजेस्टिक और केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच चलने वाली लग्जरी बसों का किराया ₹405 से बढ़कर ₹425 हो गया है।
सामान्य परिवहन सेवाओं में लंबी यात्राओं पर किराया वृद्धि ₹9 से ₹68 तक सीमित रखी गई है। वेगा दूता सेवाओं में 10 चरणों के लिए अधिकतम वृद्धि ₹18 होगी। उल्लेखनीय है कि KSRTC के नेटवर्क में लगभग 150 किराया स्तर हैं।
सरकार का तर्क और मंत्री की सफाई
मंत्री सुरेश ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि सरकारी समिति द्वारा अनुशंसित दरों से 'काफी कम' रखी गई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और वे दोनों प्रस्तावित उच्च दरों से असहमत थे, और यात्रियों पर बोझ कम करने के लिए इस निर्णय पर चार दिन विचार-विमर्श किया गया।
हवाई अड्डे की बस सेवाओं के किराए में वृद्धि पर उठे सवालों के जवाब में सुरेश ने कहा कि हवाई अड्डे जाने वाले यात्री आमतौर पर संपन्न वर्ग से होते हैं, और उन्होंने मीडिया से सवाल किया कि इस किराया संशोधन को लेकर चिंता क्यों जताई जा रही है।
परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति
इस फैसले के पीछे निगमों की गंभीर वित्तीय स्थिति एक प्रमुख कारण बताई जा रही है। चारों परिवहन निगमों की कुल बकाया देनदारी ₹7,719 करोड़ है, जिसमें ₹2,192 करोड़ के ऋण शामिल हैं। सरकार की इन चारों निगमों के प्रति कुल देनदारी ₹9,912 करोड़ बताई गई है।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार को शक्ति योजना — जिसके तहत राज्य की बसों में महिलाओं को निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलती है — के क्रियान्वयन के लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹5,000 करोड़ खर्च करने होते हैं। यह वित्तीय दबाव निगमों की संचालन क्षमता पर सीधा असर डाल रहा है।
आम यात्रियों पर असर
यह किराया वृद्धि ऐसे समय में लागू हुई है जब दिवाली के मौके पर लाखों यात्री घर जाने के लिए बसों पर निर्भर हैं। गौरतलब है कि BMTC, KSRTC और अन्य निगम दैनिक लाखों यात्रियों को सेवा देते हैं, जिनमें बड़ी संख्या मजदूर वर्ग और निम्न-मध्यम आय वर्ग की है।
साधारण और एक्सप्रेस बसों पर दरें अपेक्षाकृत सीमित रखी गई हैं, लेकिन शहरी यात्रियों के लिए न्यूनतम किराया ₹6 से ₹10 पर पहुँचना — यानी 67% की वृद्धि — उल्लेखनीय है। आने वाले दिनों में यात्रियों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया इस फैसले की राजनीतिक कीमत तय करेगी।