काशी में बटुक भैरव का अद्भुत मंदिर: टॉफी, बिस्किट और खिलौनों का प्रसाद

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काशी में बटुक भैरव का अद्भुत मंदिर: टॉफी, बिस्किट और खिलौनों का प्रसाद

सारांश

वाराणसी के बटुक भैरव मंदिर की अनोखी विशेषताओं के बारे में जानें, जहां भक्त टॉफी, बिस्किट और खिलौने चढ़ाते हैं। संतान संबंधी समस्याओं का समाधान और सुरक्षा की प्राप्ति के लिए यह मंदिर अनूठा है।

Key Takeaways

  • बटुक भैरव मंदिर वाराणसी में स्थित है।
  • यहां भक्त टॉफी, बिस्किट और खिलौने चढ़ाते हैं।
  • मंदिर का अखंड दीपक विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
  • बटुक भैरव को बाल रूप में पूजा जाता है।
  • मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है।

वाराणसी, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। यह माना जाता है कि देवों के देव महादेव की नगरी काशी के प्रत्येक कण में उनका निवास है। बाबा विश्वनाथ की पवित्र नगरी में हर मंदिर की अपनी एक अद्भुत कथा और मान्यता है, जो भक्तों की भक्ति को और भी गहराई देती है। वाराणसी की संकरी गलियों में एक ऐसा ही मंदिर है, जहां भैरव बाबा बाल रूप में अंकित हैं और उनके दर्शन से संतान संबंधी समस्याओं के साथ-साथ अन्य समस्याओं का समाधान होता है।

शिव नगरी काशी में भगवान शिव के भयंकर रूप भैरव का बाल स्वरूप बटुक भैरव का एक छोटा लेकिन अत्यंत शक्तिशाली मंदिर है। भेलूपुर क्षेत्र की तंग और घुमावदार गलियों में स्थित बटुक भैरव मंदिर भक्तों को सुरक्षा, राहत और शक्ति प्रदान करता है। यहां बटुक भैरव को बाल विष्वेश्वर भी कहा जाता है। उन्हें भगवान शिव और मां काली का पुत्र माना जाता है।

स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, बटुक भैरव राक्षस अबद का वध करने हेतु बाल रूप में प्रकट हुए थे। कहा जाता है कि अबद को वरदान प्राप्त था कि कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा, केवल एक बच्चा ही उसे पराजित कर सकता है। काशी में भैरव बाबा ने इस भूमिका को निभाया और भक्तों के रक्षक बन गए। मंदिर में बटुक भैरव की मूर्ति एक बच्चे के रूप में स्थापित है, जिनके चारों ओर कई श्वान देखे जा सकते हैं।

काशी के बटुक भैरव की यह छवि कोमलता और भयंकर शक्ति का अद्भुत संगम है। मंदिर की विशेषता है इसका अखंड दीपक, जो निरंतर जलता रहता है। भक्तों का विश्वास है कि इस दीपक के तेल में चमत्कारी शक्ति है, जिसका उपयोग घावों के उपचार और जानवरों के काटने पर किया जाता है। मंदिर के आस-पास और परिसर में बहुत से कुत्ते स्वतंत्र रूप से घूमते रहते हैं, जिन्हें बाबा का वाहन माना जाता है। शाम की आरती या दिन की आरती में ये विशेष रूप से सक्रिय होते हैं।

मंदिर की एक अनोखी बात यह है कि यहां भक्त प्रसाद के रूप में टॉफी, बिस्किट और खिलौने चढ़ाते हैं। बच्चों की तरह विराजमान देवता को ये चीजें प्रिय मानी जाती हैं। भक्त विशेष रूप से संतान संबंधी कष्टों, सुरक्षा और हिम्मत बढ़ाने के लिए यहां आते हैं और उन्हें दुलारते भी हैं। मंदिर में एक हवन कुंड भी है, जहां लोग पूजा-अनुष्ठान करते हैं।

बटुक भैरव मंदिर रोजाना सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। विशेष तिथियों पर समय में थोड़ी परिवर्तन हो सकती है। आम दिनों के साथ-साथ रविवार, मंगलवार और भैरव अष्टमी या जन्मोत्सव के दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती है।

बटुक भैरव मंदिर भेलूपुर-कमच्छा क्षेत्र में स्थित है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर है। वाराणसी जंक्शन या कैंट स्टेशन से मंदिर तक ऑटो, टैक्सी या ई-रिक्शा से आसानी से पहुंचा जा सकता है। मुख्य सड़क से मंदिर तक पहुँचने के लिए 200-250 मीटर पैदल चलना पड़ता है, क्योंकि गलियां संकरी हैं।

Point of View

बल्कि बच्चों के प्रति विशेष स्नेह भी दर्शाता है। बच्चों के रूप में भगवान की पूजा करने की परंपरा इसे और भी अनूठा बनाती है।
NationPress
05/04/2026

Frequently Asked Questions

बटुक भैरव मंदिर कब खोला जाता है?
बटुक भैरव मंदिर रोजाना सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है।
यहां भक्त किस प्रकार का प्रसाद चढ़ाते हैं?
भक्त यहां टॉफी, बिस्किट और खिलौने चढ़ाते हैं, जो बाल देवता को प्रिय माने जाते हैं।
बटुक भैरव को किस रूप में पूजा जाता है?
बटुक भैरव को बाल रूप में पूजा जाता है और उन्हें बाल विष्वेश्वर भी कहा जाता है।
मंदिर की विशेषता क्या है?
मंदिर की खास बात इसका अखंड दीपक है, जो निरंतर जलता रहता है और भक्तों का विश्वास है कि इसमें चमत्कारी शक्ति है।
मंदिर तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
मंदिर तक वाराणसी जंक्शन या कैंट स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या ई-रिक्शा से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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