केरल में कांग्रेस की मांग: जेईई परीक्षा की तिथियों में बदलाव हो
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस ने जेईई परीक्षा की तिथि पर आपत्ति जताई है।
- ईसाई समुदाय के लिए होली वीक के दिनों का महत्व।
- केंद्र सरकार से परीक्षा की तिथियों में बदलाव की मांग।
- छात्रों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना जरूरी।
- केरल में ईसाई समुदाय की जनसंख्या का महत्व।
तिरुवनंतपुरम, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केरल में कांग्रेस के नेताओं ने ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) मेन की तिथियों पर आपत्ति उठाते हुए केंद्र सरकार से परीक्षा को फिर से निर्धारित करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यह परीक्षा ईसाई समुदाय के पवित्र ‘होली वीक’ से मेल खा रही है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर बताया कि जेईई मेन २ से ८ अप्रैल के बीच आयोजित किया जाएगा, जो कि मौंडी थर्सडे, गुड फ्राइडे और ईस्टर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक दिनों के साथ आ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस समय परीक्षा आयोजित करने से ईसाई छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा, क्योंकि ये दिन धार्मिक अनुष्ठानों और प्रार्थनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने परीक्षा की तिथियों पर पुनर्विचार करने की मांग की।
विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने भी इस मुद्दे को उठाया, यह बताते हुए कि मौंडी थर्सडे और ईस्टर ईसाई समुदाय के सबसे पवित्र दिनों में से हैं। उन्होंने एनटीए के फैसले की आलोचना की और परीक्षा को स्थगित करने की मांग की।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य रमेश चेन्नितला ने भी कहा कि वर्तमान शेड्यूल के कारण ईसाई छात्र धार्मिक कार्यक्रमों में भाग नहीं ले पाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों को अपनी आस्था और पढ़ाई के बीच चुनाव करने की स्थिति में डाल दिया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए परीक्षा की तिथियों में बदलाव करे, ताकि सभी छात्रों के हितों का ध्यान रखा जा सके।
गौरतलब है कि केरल की लगभग ३.३० करोड़ जनसंख्या में ईसाई समुदाय की हिस्सेदारी लगभग १७ प्रतिशत है।