17 जुलाई 2026
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केरल में 50 लाख छात्र लौटे स्कूल, 3 लाख से अधिक बच्चों का पहली बार दाखिला

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केरल में 50 लाख छात्र लौटे स्कूल, 3 लाख से अधिक बच्चों का पहली बार दाखिला

सारांश

दो महीने की गर्मी की छुट्टियों के बाद केरल में 50 लाख छात्र स्कूल लौटे और 3 लाख से अधिक बच्चों ने पहली बार दाखिला लिया। नई सरकार ने भव्यता की जगह सादगी को चुना — 'प्रवेशोत्सवम' इस बार शैक्षणिक तैयारी पर केंद्रित रहा।

मुख्य बातें

केरल में 1 जून 2026 को दो महीने की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद स्कूल पुनः खुले।
लगभग 50 लाख छात्र नए शैक्षणिक सत्र में अपनी कक्षाओं में लौटे।
इस वर्ष 3 लाख से अधिक बच्चों ने पहली बार स्कूल में दाखिला लिया।
सतीशन ने तिरुवनंतपुरम के पट्टम स्थित सरकारी स्कूल में राज्य-स्तरीय समारोह का उद्घाटन किया।
शमसुद्दीन ने बच्चों को मिठाइयाँ बाँटीं; इस बार 'प्रवेशोत्सवम' सादगीपूर्ण रखा गया।
पाठ्यपुस्तकें और शिक्षण सामग्री स्कूल खुलने से पहले ही वितरित कर दी गई थीं।

केरल में दो महीने की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद सोमवार, 1 जून 2026 को स्कूलों के दरवाज़े फिर से खुल गए, और लगभग 50 लाख छात्र अपनी कक्षाओं में लौट आए। इस वर्ष 3 लाख से अधिक बच्चे पहली बार किसी स्कूल में दाखिला ले रहे हैं, जिसने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया। स्कूलों का यह पुनः आरंभ केरल के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में गिना जाता है।

राज्य-स्तरीय उद्घाटन समारोह

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने तिरुवनंतपुरम के पट्टम स्थित सरकारी मॉडल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में राज्य-स्तरीय समारोह का उद्घाटन कर नए शैक्षणिक वर्ष की औपचारिक शुरुआत की। नए राज्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने इस अवसर पर बच्चों को मिठाइयाँ बाँटीं।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री पी. विजयन के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार के कार्यकाल में 'प्रवेशोत्सवम' एक भव्य उत्सव के रूप में मनाया जाता था। इस वर्ष नई सरकार ने जानबूझकर सादगीपूर्ण आयोजन को प्राथमिकता दी।

सादगी भरा 'प्रवेशोत्सवम'

सरकार ने भव्य आयोजनों की जगह शैक्षणिक तैयारियों और छात्र-कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया। शिक्षा अधिकारियों के अनुसार, पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण सामग्री का वितरण स्कूल खुलने से पहले ही पूरा कर लिया गया था, ताकि पहले दिन से ही पठन-पाठन सुचारू रूप से शुरू हो सके।

यह बदलाव नई सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है — उत्सव की चमक-दमक से परे, ज़मीनी तैयारी पर ज़ोर।

सोशल मीडिया पर छाए बच्चे

पूरे केरल में अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों की पहले दिन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए, जो देखते-देखते वायरल हो गए। नई वर्दी, नए बस्ते और उत्सुक चेहरों की झलकियाँ राज्यभर में भावनात्मक लहर बन गईं।

आम जनता पर असर

केरल के लिए 1 जून का यह दिन केवल स्कूलों के पुनः खुलने का प्रतीक नहीं है — यह उन सामाजिक लय और दिनचर्याओं की वापसी है जो इस राज्य के सामूहिक जीवन को एक विशिष्ट पहचान देती हैं। 3 लाख से अधिक नए विद्यार्थियों का पहली बार स्कूल में कदम रखना इस सत्र को आँकड़ों से परे एक सामाजिक घटना बनाता है।

आने वाले हफ्तों में स्कूलों में नई कक्षाओं की व्यवस्था, शिक्षक-छात्र अनुपात और बुनियादी ढाँचे की स्थिति पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बुनियादी ढाँचा और गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है। केरल की साक्षरता दर और शिक्षा मॉडल की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को देखते हुए, उत्सव से ज़्यादा ज़रूरी है कि यह सत्र नतीजों में दिखे।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में स्कूल कब खुले और कितने छात्र लौटे?
केरल में 1 जून 2026, सोमवार को दो महीने की गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल पुनः खुले। लगभग 50 लाख छात्र अपनी कक्षाओं में लौटे।
इस साल केरल में पहली बार स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चों की संख्या कितनी है?
इस शैक्षणिक सत्र में 3 लाख से अधिक बच्चे पहली बार किसी स्कूल में दाखिला ले रहे हैं। यह संख्या नए सत्र के उत्साह को और बढ़ा देती है।
'प्रवेशोत्सवम' क्या है और इस बार यह अलग क्यों था?
'प्रवेशोत्सवम' केरल में स्कूल वर्ष के आरंभ का उद्घाटन समारोह है। इस बार नई सरकार ने पिछले वर्षों की भव्यता की जगह सादगीपूर्ण आयोजन को प्राथमिकता दी और ध्यान शैक्षणिक तैयारियों तथा छात्र-कल्याण पर केंद्रित रखा।
राज्य-स्तरीय उद्घाटन समारोह कहाँ और किसने किया?
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने तिरुवनंतपुरम के पट्टम स्थित सरकारी मॉडल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में राज्य-स्तरीय समारोह का उद्घाटन किया। शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने इस अवसर पर बच्चों को मिठाइयाँ बाँटीं।
क्या स्कूल खुलने से पहले पाठ्यपुस्तकें और सामग्री तैयार थी?
हाँ, शिक्षा अधिकारियों के अनुसार पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण सामग्री का वितरण स्कूल खुलने से पहले ही पूरा कर लिया गया था। इससे पहले दिन से ही पठन-पाठन सुचारू रूप से शुरू हो सका।
राष्ट्र प्रेस
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