मानसून सत्र: केशव मौर्य बोले — सरकार हर मुद्दे पर देगी जवाब, विपक्ष करे सार्थक बहस
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2 अगस्त 2026 को लखनऊ में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि सदन का बहुमूल्य समय हंगामे में बर्बाद करने के बजाय जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की जाए।
मानसून सत्र पर सरकार का रुख
मौर्य ने कहा कि विधानसभा सत्र प्रत्येक जनप्रतिनिधि के लिए महत्वपूर्ण अवसर होता है। उनके अनुसार, विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दे उठाए — सरकार उनका उत्तर देने को तत्पर है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया।
पप्पू यादव विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के खिलाफ दर्ज शिकायत के संदर्भ में उपमुख्यमंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संतों, रामभक्तों और हिंदू समाज का अपमान करना अत्यंत निंदनीय और आपराधिक कृत्य है। मौर्य ने माँग की कि ऐसे मामलों में कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने पप्पू यादव के कथित कृत्य का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं, संत समाज और भगवान राम के भक्तों का अपमान है, जिसकी भारतीय जनता पार्टी (BJP) कड़ी निंदा करती है और इस मामले में कानूनी कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करती है।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर विपक्ष की आलोचना
परिसीमन तथा महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी मौर्य ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी केंद्र सरकार के देशहित के सकारात्मक फैसलों को लागू होने से रोकने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, महिला आरक्षण और परिसीमन प्रस्तावों के तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएगी, जिससे किसी भी राज्य की मौजूदा सीटें कम नहीं होंगी।
क्या होगा आगे
मौर्य ने कहा कि इस परिस्थिति में परिसीमन का विरोध करने का कोई औचित्य नहीं बनता और सभी राजनीतिक दलों को राष्ट्रहित में इसका समर्थन करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि विभिन्न दलों के सांसद राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए उचित निर्णय लेंगे। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मानसून सत्र से पहले सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सियासी तनाव बढ़ता दिख रहा है।