3 अगस्त 2026
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केशव प्रसाद मौर्य ने मानसून सत्र से पहले UP की कानून-व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा की, अधिकारियों को कड़े निर्देश

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केशव प्रसाद मौर्य ने मानसून सत्र से पहले UP की कानून-व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा की, अधिकारियों को कड़े निर्देश

सारांश

मानसून सत्र-2026 से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की। छात्र प्रदर्शनकारियों से संयम, कांवड़ यात्रा की तैयारी और साइबर अपराध पर सख्ती — तीनों मोर्चों पर एक साथ निर्देश जारी किए गए।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 3 अगस्त 2026 को मानसून सत्र-2026 से पहले लखनऊ के विधान भवन में उच्चस्तरीय कानून-व्यवस्था समीक्षा बैठक की।
शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनकारियों को परेशान न करने के निर्देश; आपराधिक गतिविधियों में लिप्त तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आदेश।
कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा; लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी।
साइबर पुलिस इकाइयों को मजबूत करने और सोशल मीडिया पर अफवाहों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश।
बैठक में DGP राजीव कृष्णा , ADG अमिताभ यश , ADG संजीव गुप्ता और ADG राज कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 3 अगस्त 2026 को मानसून सत्र-2026 से पहले राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे उत्तर प्रदेश में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मौर्य ने साफ कहा कि नागरिकों के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में क्या हुआ

लखनऊ के विधान भवन में आयोजित इस बैठक में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि छात्र प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए, क्योंकि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग छात्र आंदोलनों का दुरुपयोग आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के लिए करते हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा

उपमुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित विभागों को श्रद्धालुओं के लिए सुचारू, सुरक्षित और सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने का आह्वान करते हुए स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रा प्रबंधन में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

साइबर अपराध और सोशल मीडिया पर सख्ती

मौर्य ने साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आह्वान करते हुए साइबर पुलिस इकाइयों और तकनीकी टीमों को मजबूत करने के निर्देश दिए, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी के पीड़ितों को समय पर सहायता मिल सके। उन्होंने अफवाहों, गलत सूचनाओं और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की निगरानी बढ़ाने का भी आदेश दिया। गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून सत्र के आसपास विभिन्न संगठनों के विरोध प्रदर्शनों की संभावना बनी रहती है।

बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी

इस समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा, अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश, एडीजी लॉजिस्टिक्स संजीव गुप्ता, एडीजी मानवाधिकार राज कुमार सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में जन शिकायतों, ऑनलाइन ट्रैफिक चालानों और अयोध्या से संबंधित मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

आगे क्या होगा

उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि उत्तर प्रदेश सरकार अपराध और अराजकता के विरुद्ध शून्य-सहिष्णुता नीति के प्रति प्रतिबद्ध है और प्रवर्तन कार्रवाई पारदर्शी, निष्पक्ष तथा जनहित पर केंद्रित होनी चाहिए। मानसून सत्र शुरू होने से पहले इन निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन छात्र प्रदर्शनकारियों को लेकर दिया गया संतुलित निर्देश — 'परेशान मत करो, पर आपराधिक तत्वों पर सख्ती करो' — राज्य सरकार की उस दुविधा को दर्शाता है जो विपक्ष के आंदोलनों और कानून-व्यवस्था के बीच रेखा खींचने में सामने आती है। कांवड़ यात्रा पर विशेष जोर यह भी बताता है कि सरकार की प्राथमिकताएँ धार्मिक आयोजनों के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। असली परीक्षा यह होगी कि ये निर्देश ज़मीनी स्तर पर कितने लागू होते हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में पुलिस के विवेकाधीन अधिकार के दुरुपयोग की शिकायतें नई नहीं हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केशव प्रसाद मौर्य ने कानून-व्यवस्था समीक्षा बैठक क्यों बुलाई?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मानसून सत्र-2026 से पहले राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने और अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने के उद्देश्य से यह बैठक बुलाई। इस दौरान कांवड़ यात्रा, छात्र प्रदर्शन और साइबर अपराध जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
छात्र प्रदर्शनकारियों के बारे में क्या निर्देश दिए गए?
उपमुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए, क्योंकि यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, जो लोग छात्र आंदोलनों का दुरुपयोग आपराधिक गतिविधियों या सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के लिए करते हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कांवड़ यात्रा के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है?
उपमुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को श्रद्धालुओं के लिए सुचारू, सुरक्षित और सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने और प्रबंधन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
साइबर अपराध पर उत्तर प्रदेश सरकार की क्या रणनीति है?
मौर्य ने साइबर पुलिस इकाइयों और तकनीकी टीमों को मजबूत करने के निर्देश दिए ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी के पीड़ितों को समय पर सहायता मिल सके। साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाहों और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाली सामग्री की निगरानी बढ़ाने का आदेश दिया गया।
इस बैठक में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे?
बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा, अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश, एडीजी लॉजिस्टिक्स संजीव गुप्ता, एडीजी मानवाधिकार राज कुमार और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।
राष्ट्र प्रेस
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