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पश्चिम बंगाल की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर कीर्ति आजाद का हमला: '6 महीने में अभिषेक बनर्जी पर 7 जानलेवा हमले'

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पश्चिम बंगाल की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर कीर्ति आजाद का हमला: '6 महीने में अभिषेक बनर्जी पर 7 जानलेवा हमले'

सारांश

TMC सांसद कीर्ति आजाद का बड़ा दावा — 6 महीनों में अभिषेक बनर्जी पर 7 जानलेवा हमले, सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद पुलिस निष्क्रिय। लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा, हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट को फुटेज दिए — फिर भी न्यायिक संज्ञान नहीं। पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद भी हिंसा थमी नहीं।

मुख्य बातें

TMC सांसद कीर्ति आजाद ने 7 नवंबर 2026 को आरोप लगाया कि 6 महीनों में अभिषेक बनर्जी पर 7 बार जानलेवा हमला हुआ।
अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन की रात सुबह 2 बजे सीसीटीवी में पत्थरबाजी और तोड़फोड़ दर्ज, पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया।
आजाद के अनुसार करीब 600 बलात्कार और 1,200 हत्या के मामले दो महीने पहले तक दर्ज, अब संख्या और अधिक होने का दावा।
कथित तौर पर 14,000 TMC कार्यकर्ता जेल में, लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा गया।
सीसीटीवी फुटेज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को सौंपे, लेकिन कथित तौर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद ने 7 नवंबर 2026 को पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पिछले 6 महीनों में टीएमसी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद अभिषेक बनर्जी पर 7 बार जानलेवा हमला हो चुका है, जबकि पुलिस ने एक भी मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज स्पष्ट रूप से उपलब्ध होने के बावजूद अपराधियों को पकड़ा नहीं जा रहा, जो राज्य में कानून के शासन के पूर्ण पतन की ओर इशारा करता है।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

आजाद के अनुसार, अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन की रात सुबह दो बजे सीसीटीवी कैमरों में साफ देखा गया कि करीब आधे से पौने घंटे तक हमलावर पत्थरबाजी और तोड़फोड़ करते रहे। आसपास की छोटी दुकानों को भी नुकसान पहुँचाया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस आई भी तो किसी को गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि हमलावरों को 'साथी' की तरह साथ ले गई।

आजाद ने बताया कि पहली घटना में डायमंड हार्बर में अभिषेक बनर्जी के माथे पर गंभीर चोट आई थी — उनकी जान केवल इसलिए बची क्योंकि उन्होंने हेलमेट पहना हुआ था। बावजूद इसके हत्या के प्रयास की धारा तक नहीं लगाई गई।

लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

कीर्ति आजाद ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल की स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि तीन सप्ताह पहले दी गई शिकायत पर पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया, और बहुत बाद में भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उनके कार्यालय को दो बार तोड़ा गया, सरकारी सामान चोरी हुआ और सीसीटीवी की हार्ड ड्राइव तक ले जाई गई — फिर भी केवल दो लाइनों की शिकायत दर्ज की गई।

आँकड़ों के हवाले से गंभीर आरोप

आजाद ने दावा किया कि आंकड़ों के अनुसार करीब दो महीने पहले तक पश्चिम बंगाल में लगभग 600 बलात्कार और 1,200 हत्या के मामले दर्ज हो चुके थे और अब यह संख्या और बढ़ गई होगी। उन्होंने कहा कि सारे सीसीटीवी फुटेज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए हैं। हाईकोर्ट ने पोस्ट-पोल हिंसा न होने का निर्देश दिया, लेकिन घटनाएँ जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि न्यायिक निर्देशों की अनदेखी संस्थागत विफलता की ओर इशारा करती है।

टीएमसी कार्यकर्ताओं की स्थिति पर चिंता

सांसद ने कहा कि कथित तौर पर 14,000 TMC कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया है। उन्होंने पूछा कि पार्टी के कार्यकर्ता अपनी समस्याएँ लेकर कहाँ जाएँ जब पुलिस, सरकार और न्यायालय — कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठा रहा। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार सत्ता में है और राज्य में राजनीतिक हिंसा के आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है।

आगे क्या

कीर्ति आजाद ने भाजपा नेताओं को चेताया कि राजनीतिक और व्यक्तिगत लड़ाई में अंतर होना चाहिए, और यह हिंसा किसी के साथ भी हो सकती है। उन्होंने कहा, 'अगर पासा पलटता है तो यह आपके साथ भी हो सकता है।' अब देखना यह होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इस पत्र पर क्या कदम उठाते हैं और सर्वोच्च न्यायालय इस विषय पर कोई नई सुनवाई करता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये एक विपक्षी दल के सांसद के बयान हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद हिंसा और प्रतिशोध के आरोप दोनों पक्षों से आते रहे हैं — यह नया नहीं है। असली सवाल यह है कि जब सीसीटीवी फुटेज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचाए जा चुके हैं, तो न्यायिक संज्ञान की अनुपस्थिति में आखिर जवाबदेही का तंत्र कहाँ है? 14,000 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का दावा — यदि सही है — तो यह राजनीतिक प्रतिशोध की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है जिसे किसी भी दल की सरकार के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीर्ति आजाद ने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर क्या आरोप लगाए हैं?
TMC सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया है कि पिछले 6 महीनों में अभिषेक बनर्जी पर 7 बार जानलेवा हमला हुआ और पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद अपराधियों को पकड़ा नहीं जा रहा।
अभिषेक बनर्जी पर हुए हमलों में सबसे गंभीर घटना कौन सी थी?
कीर्ति आजाद के अनुसार, डायमंड हार्बर में अभिषेक बनर्जी के माथे पर गंभीर चोट आई थी और उनकी जान केवल हेलमेट पहने होने की वजह से बची। आरोप है कि इस घटना में भी हत्या के प्रयास की धारा नहीं लगाई गई।
कीर्ति आजाद ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र क्यों लिखा?
आजाद ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति से अवगत कराया है। उनका कहना है कि राज्य में शिकायतें दर्ज नहीं होतीं, एफआईआर नहीं बनती और जाँच नहीं होती।
पश्चिम बंगाल में TMC कार्यकर्ताओं की स्थिति क्या बताई जा रही है?
कीर्ति आजाद का दावा है कि कथित तौर पर लगभग 14,000 TMC कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के पास अपनी समस्याएँ लेकर जाने की कोई जगह नहीं बची है।
पोस्ट-पोल हिंसा पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहा है?
आजाद के अनुसार सारे सीसीटीवी फुटेज हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को सौंपे जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने पोस्ट-पोल हिंसा न होने का निर्देश दिया था, लेकिन उनका कहना है कि घटनाएँ जारी हैं और दोनों अदालतों ने अब तक कोई प्रभावी संज्ञान नहीं लिया।
राष्ट्र प्रेस
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