5 अक्टूबर 2026
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किसान आंदोलन को कमज़ोर कर रहे हैं कुछ नेता, सुखजीत सिंह बोले — 'ईगो और घमंड छोड़ो, वरना हल नहीं निकलेगा'

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किसान आंदोलन को कमज़ोर कर रहे हैं कुछ नेता, सुखजीत सिंह बोले — 'ईगो और घमंड छोड़ो, वरना हल नहीं निकलेगा'

सारांश

किसान नेता सुखजीत सिंह ने वरिष्ठ किसान नेताओं पर सीधा हमला बोला — 'ईगो और घमंड' में डूबे नेता किसान आंदोलन को अंदर से खोखला कर रहे हैं। उन्होंने कैडर से अपील की कि अयोग्य नेताओं को हटाएँ, वरना किसानों और मज़दूरों के हक की लड़ाई कभी नहीं जीती जाएगी।

मुख्य बातें

किसान नेता सुखजीत सिंह ने 20 अगस्त को बाटला में वरिष्ठ किसान नेताओं पर निजी फायदे और अहंकार के चलते आंदोलन कमज़ोर करने के आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन पर नेताओं का आपसी आरोप-प्रत्यारोप किसान हित को नुकसान पहुँचा रहा है।
दिल्ली किसान आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि जन-एकजुटता से तीन कृषि कानून रद्द हुए थे, वही ताकत अब नेतृत्व विवाद से कमज़ोर पड़ रही है।
सुखजीत सिंह ने माँग की कि जनता को किसान संगठनों के नेताओं को हटाने का लोकतांत्रिक अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने खुद को भी जवाबदेही से बाहर नहीं रखा — कहा, 'अगर मैं गलती करूँ तो मुझे भी हटाओ।'

किसान नेता सुखजीत सिंह ने 20 अगस्त को बाटला में कुछ वरिष्ठ किसान नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए — उनके अनुसार ये नेता निजी फायदे के लिए आंदोलन का इस्तेमाल कर रहे हैं, आपसी झगड़े बढ़ा रहे हैं और इस तरह किसान संघर्ष की धार को कुंद कर रहे हैं। उन्होंने संगठनों के कैडर से सीधे अपील की कि ऐसे नेताओं को पदों से हटाकर किसानों के असली हितों की रक्षा करने वाले सक्षम लोगों को आगे लाया जाए।

मुख्य आरोप और बयान

सुखजीत सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जब तक ये नेता ईगो और घमंड के साथ संगठन की कमान संभाले रहेंगे, किसानों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकलेगा। वे लोगों के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए लड़ रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि एक बड़े किसान संगठन के वरिष्ठ नेता ने दूसरे नेता पर कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ने का आरोप लगाया, जबकि दूसरे नेता ने वही आरोप पहले पर वापस लगाया — यह आपसी कीचड़उछाल किसान आंदोलन को नुकसान पहुँचा रही है।

दिल्ली आंदोलन से सबक

सुखजीत सिंह ने पिछले दिल्ली किसान आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान भी कुछ लोगों ने गलतियाँ कीं, लेकिन देशभर के किसानों की एकजुट भागीदारी ने उन गलतियों पर लगाम लगाई और सरकार पर दबाव बनाकर तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाया। उनके अनुसार, वही सामूहिक शक्ति आज भी ज़रूरी है — लेकिन अहंकारी नेतृत्व उसे खंडित कर रहा है।

किसान और मज़दूरों पर असर

सुखजीत सिंह ने चेतावनी दी कि नेताओं की 'मैं बड़ा हूँ' वाली प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा नुकसान किसानों और मज़दूरों को हो रहा है, जिनके हक के लिए इन संगठनों को असल में लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो नेता सिर्फ अपनी जेब भरना चाहते हैं या संगठन का उपयोग खुद को राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करने के लिए करते हैं, वे किसान हित के दुश्मन हैं।

जवाबदेही की माँग

किसान नेता ने एक महत्त्वपूर्ण माँग रखी — जनता को यह अधिकार होना चाहिए कि वह किसान संगठनों के नेताओं को उसी तरह हटा सके जैसे राजनीतिक दलों को चुनाव में हराया जाता है। उन्होंने खुद को भी इससे अलग नहीं रखा और कहा, 'अगर मैं कोई गलती करता हूँ, तो मुझे हटाओ और मुझसे बेहतर किसी को नियुक्त करो।' यह बयान किसान आंदोलन में आंतरिक लोकतंत्र की बहस को नई दिशा दे सकता है।

आगे क्या

सुखजीत सिंह की यह खुली आलोचना किसान संगठनों के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत है। आलोचकों का कहना है कि यदि नेतृत्व में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं आई, तो आने वाले किसी भी आंदोलन को वह जन-समर्थन नहीं मिलेगा जो दिल्ली आंदोलन को मिला था। किसान संगठनों की प्रतिक्रिया और आंतरिक सुधार की दिशा पर अब सबकी नज़र होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह किसान आंदोलन के उस संरचनात्मक संकट को उजागर करती है जिसे मुख्यधारा की मीडिया अक्सर नज़रअंदाज़ करती है — नेतृत्व की जवाबदेही का अभाव। दिल्ली आंदोलन की सफलता जन-दबाव से मिली थी, न कि नेताओं की सूझबूझ से; यह तथ्य खुद सुखजीत सिंह स्वीकार करते हैं। विडंबना यह है कि जो आंदोलन सरकारी जवाबदेही माँगता है, वह खुद आंतरिक जवाबदेही से परहेज़ करता रहा है। बिना पारदर्शी नेतृत्व-चयन प्रक्रिया के, किसान संगठन उसी 'व्यक्तिवाद की राजनीति' के शिकार होते रहेंगे जिसका वे विरोध करते हैं।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुखजीत सिंह ने किसान नेताओं पर क्या आरोप लगाए?
किसान नेता सुखजीत सिंह ने कुछ वरिष्ठ किसान नेताओं पर निजी फायदे उठाने, आपसी झगड़े बढ़ाने और अहंकार के चलते आंदोलन को कमज़ोर करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये नेता किसानों के लिए नहीं, बल्कि खुद के लिए लड़ रहे हैं।
किसान आंदोलन में कोड ऑफ कंडक्ट विवाद क्या है?
सुखजीत सिंह के अनुसार, एक बड़े किसान संगठन के वरिष्ठ नेता ने दूसरे नेता पर कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ने का आरोप लगाया, जबकि दूसरे नेता ने वही आरोप पहले पर वापस किया। यह आपसी आरोप-प्रत्यारोप किसान आंदोलन की एकजुटता को नुकसान पहुँचा रहा है।
दिल्ली किसान आंदोलन की सफलता का श्रेय किसे दिया जाता है?
सुखजीत सिंह के अनुसार, दिल्ली किसान आंदोलन इसलिए सफल हुआ क्योंकि पूरे देश के लोगों ने उसमें भाग लिया और सरकार पर दबाव बना, जिससे तीन कृषि कानून रद्द करने पड़े। नेताओं की गलतियों पर भी जनता ने लगाम लगाई थी।
सुखजीत सिंह ने किसान संगठनों के कैडर से क्या अपील की?
उन्होंने कैडर से अपील की कि यदि कोई नेता गलत कर रहा है, तो उसे पद से हटाकर किसी सक्षम व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को नेताओं को हटाने का वैसा ही अधिकार होना चाहिए जैसे राजनीतिक दलों को चुनाव में हराया जाता है।
किसान आंदोलन में नेतृत्व विवाद का किसानों पर क्या असर पड़ रहा है?
सुखजीत सिंह के अनुसार, नेताओं की आपसी प्रतिस्पर्धा और अहंकार का सबसे बड़ा नुकसान किसानों और मज़दूरों को हो रहा है, जिनके हक के लिए इन संगठनों को वास्तव में लड़ना चाहिए। इससे आंदोलन की धार कमज़ोर पड़ रही है और जन-समर्थन प्रभावित हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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