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कोलकाता चोरबगान भगदड़: 19 मौतों के बाद CM सुवेंदु अधिकारी ने निजी अस्पताल रेफरल को बताया जरूरी

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कोलकाता चोरबगान भगदड़: 19 मौतों के बाद CM सुवेंदु अधिकारी ने निजी अस्पताल रेफरल को बताया जरूरी

सारांश

कोलकाता के चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने 19 जानें लीं और सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। CM सुवेंदु अधिकारी ने निजी अस्पताल रेफरल को जायज़ ठहराया, लेकिन साथ ही सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे की कमी भी कबूल की — सत्ता में आए महज छह महीने बाद यह बड़ी परीक्षा है।

मुख्य बातें

चोरबगान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल , उत्तरी कोलकाता में सप्तमी की रात मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत, 25 घायल ।
14 घायलों को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया; CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा यह फैसला मृत्युदर रोकने के लिए लिया गया।
मुख्यमंत्री ने माना — सरकारी अस्पतालों को निजी स्तर तक लाने में दो साल लगेंगे।
हादसे के सिलसिले में अब तक 7 लोग गिरफ्तार ; पुलिस और आपदा प्रबंधन टीम पर देरी का आरोप।
BJP सरकार को पश्चिम बंगाल में सिर्फ छह महीने हुए हैं — यह उसके सामने पहली बड़ी आपदा।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उत्तरी कोलकाता के चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में घायल हुए लोगों को निजी अस्पतालों में इसलिए भेजा गया, ताकि मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी न हो। नवमी की रात उन्होंने साल्ट लेक स्थित स्वास्थ्य भवन के कंट्रोल रूम का औचक दौरा किया और वहाँ से शहर तथा राज्य के कई अस्पतालों की स्थिति पर बड़ी स्क्रीन के ज़रिये नज़र रखी।

मुख्यमंत्री की सफाई

कंट्रोल रूम में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, 'घायलों को तुरंत निजी अस्पतालों में भेजने का फैसला इसीलिए किया गया ताकि मरने वालों की संख्या न बढ़े। उन्हें वहाँ शिफ्ट किए जाने के बाद एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई।' उन्होंने यह भी कहा कि निजी अस्पतालों में भेजे जाने से पहले इलाज के दौरान कई लोगों की जान गई थी, परंतु बाद में ऐसी कोई घटना नहीं हुई।

इस दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरदवत मुखर्जी भी उनके साथ मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कंट्रोल रूम में यह भी जायजा लिया कि दुर्गा पूजा के शेष दिनों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग कितना तैयार है।

मुख्य घटनाक्रम: चोरबगान में 19 की मौत

सप्तमी की रात यानी शनिवार को चोरबगान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की जान चली गई। इस हादसे में 25 लोग घायल हुए, जिनमें से 14 को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद चश्मदीदों और प्रभावित परिजनों ने पुलिस व प्रशासन पर भीड़ प्रबंधन में विफलता का आरोप लगाया।

आलोचकों का कहना है कि पुलिस पंडाल में उमड़ी भारी भीड़ को समय रहते नियंत्रित करने में नाकाम रही। इसके अलावा, हादसे के बाद पुलिस और आपदा प्रबंधन दल के मौके पर पहुँचने तथा बचाव कार्य शुरू करने में भी देरी की शिकायतें सामने आई हैं। इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सरकारी अस्पतालों की कमियाँ स्वीकार

मुख्यमंत्री अधिकारी ने खुलकर माना कि राज्य के सरकारी अस्पतालों के बुनियादी ढाँचे में कमियाँ हैं। उन्होंने कहा, 'सरकारी अस्पतालों के बुनियादी ढाँचे को निजी अस्पतालों के स्तर तक लाने में दो साल का समय लगेगा। पश्चिम बंगाल में नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को अभी सिर्फ छह महीने हुए हैं।' यह बयान इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण है कि सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बड़ी आपदा में सरकार की तैयारी सीधे सवालों के घेरे में आ गई है।

गौरतलब है कि सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे की कमजोरी लंबे समय से पश्चिम बंगाल में चर्चा का विषय रही है। अधिकारी का यह स्वीकारोक्ति वाला बयान एक तरफ जहाँ पारदर्शिता का संकेत देता है, वहीं विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका भी देता है।

डॉक्टरों की भूमिका पर जाँच के संकेत

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन डॉक्टरों या जूनियर डॉक्टरों ने निजी अस्पताल रेफरल को लेकर सवाल उठाए हैं, उनके बारे में जाँच होनी चाहिए कि वे हादसे के वक्त ड्यूटी पर थे या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्यूटी के दौरान काम छोड़कर जाना नियमों के विरुद्ध है और मानवीय दृष्टि से भी अनुचित है।

आगे क्या होगा

इस भगदड़ की उच्चस्तरीय जाँच की माँग उठ रही है। 7 गिरफ्तारियों के बाद जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि पंडाल में भीड़ सीमा का उल्लंघन कैसे हुआ और आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी क्यों हुई। मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज़ होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ईमानदार है — लेकिन यह उसी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक जोखिम भी है जो सत्ता में आते वक्त बेहतर शासन का वादा लेकर आई थी। असली सवाल यह नहीं है कि घायलों को निजी अस्पताल भेजा गया या नहीं — सवाल यह है कि 19 मौतें होने तक भीड़ नियंत्रण क्यों विफल रहा। आलोचकों का कहना है कि भगदड़ जैसी त्रासदियाँ बुनियादी ढाँचे से नहीं, भीड़ प्रबंधन की योजना और उसके क्रियान्वयन से रोकी जाती हैं — और इस मोर्चे पर अभी कोई जवाब नहीं मिला है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में कितने लोगों की मौत हुई?
चोरबगान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में सप्तमी की रात मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई और 25 लोग घायल हुए। घायलों में से 14 को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
CM सुवेंदु अधिकारी ने घायलों को निजी अस्पताल भेजने का फैसला क्यों लिया?
मुख्यमंत्री अधिकारी के अनुसार, घायलों को निजी अस्पतालों में इसलिए भेजा गया ताकि मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी न हो। उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल में शिफ्ट किए जाने के बाद एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई।
कोलकाता पूजा पंडाल भगदड़ में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
इस घटना के सिलसिले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि भीड़ प्रबंधन कहाँ चूका और आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी क्यों हुई।
पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर CM ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्वीकार किया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों के बुनियादी ढाँचे में कमियाँ हैं और उन्हें निजी अस्पतालों के स्तर तक लाने में दो साल का समय लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में BJP सरकार को अभी सिर्फ छह महीने हुए हैं।
क्या चोरबगान भगदड़ में पुलिस की लापरवाही थी?
चश्मदीदों और प्रभावित परिजनों ने पुलिस पर भीड़ प्रबंधन में विफलता का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि पुलिस और आपदा प्रबंधन दल के मौके पर पहुँचने में देरी हुई, हालाँकि सरकार ने इस आरोप पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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