कोलकाता गोदाम हादसा: CM सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख मुआवजे का ऐलान किया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 26 जून 2025 को विधानसभा में कोलकाता के तारातला क्षेत्र में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरने की त्रासदी में जान गंवाने वाले 9 लोगों के परिजनों के लिए राज्य कोष से ₹10 लाख प्रति परिवार मुआवजे की घोषणा की। इस हादसे में कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिनके लिए ₹1 लाख के अतिरिक्त मुआवजे का ऐलान किया गया।
मुआवजे का विवरण
मुख्यमंत्री अधिकारी ने विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार मृतकों के परिवारों को ₹10 लाख और घायलों को ₹1 लाख की सहायता राशि प्रदान करेगी। इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता देने की घोषणा पहले ही कर दी थी। इस प्रकार मृतकों के परिवारों को केंद्र और राज्य मिलाकर कुल ₹12 लाख की सहायता मिलेगी।
बचाव अभियान का घटनाक्रम
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि बुधवार दोपहर छत गिरने की घटना के 30 मिनट के भीतर ही बचाव अभियान शुरू कर दिया गया था। शुरुआती चरण में कोलकाता पुलिस, राज्य अग्निशमन विभाग और स्थानीय निवासियों ने मिलकर राहत कार्य संभाला। बाद में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और भारतीय सेना के जवान भी अभियान में शामिल हो गए। अधिकारी ने बताया कि बुधवार की रात भर बचाव कार्य अनवरत जारी रहा और अभी भी चल रहा है, क्योंकि कथित तौर पर कुछ लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं।
मंत्रियों की त्वरित तैनाती
राज्य सरकार की ओर से सबसे पहले खेल मंत्री इंद्रनील खान और नगर निगम एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल घटनास्थल पर पहुँचे। इसके बाद राज्य अग्निशमन सेवा मंत्री कौशिक चौधरी और राज्य स्वास्थ्य मंत्री शरदवत मुखर्जी भी मौके पर पहुँचे। मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्वयं दोपहर में घटनास्थल का दौरा किया और अस्पताल में घायलों से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपनी तत्काल उपस्थिति न होने पर सफाई देते हुए कहा, 'दुर्घटना के 30 मिनट के भीतर ही बचाव अभियान शुरू कर दिया गया था।' उन्होंने यह भी कहा, 'मेरे तुरंत वहाँ पहुँचने से बचाव कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती थी। मैंने पहले स्थिति को संभालने के बाद दोपहर में वहाँ का रुख किया।' उन्होंने बताया कि वे शुरू से ही स्थिति पर नज़र रख रहे थे और घायलों से व्यक्तिगत रूप से मिले।
आगे की स्थिति
अधिकारियों के अनुसार, कई घायलों का उपचार जारी है और बचाव दल मलबे में अभी भी फँसे लोगों को निकालने में लगे हुए हैं। इस हादसे की परिस्थितियों और निर्माण कार्य में संभावित लापरवाही की जाँच की माँग भी उठने लगी है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।