मणिपुर में कूकी और जोमी संगठनों ने विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश की मांग दोहराई, CM की यात्रा का बहिष्कार करेंगे

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मणिपुर में कूकी और जोमी संगठनों ने विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश की मांग दोहराई, CM की यात्रा का बहिष्कार करेंगे

सारांश

मणिपुर में KNO और ZRO ने 3 मई 2023 के बाद से चली आ रही विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश की माँग को फिर दोहराया है। साथ ही CM युमनम खेमचंद सिंह की चुराचांदपुर यात्रा के दौरान किसी भी सरकारी कार्यक्रम में न जाने का फैसला किया और सांप्रदायिक सामग्री पर नज़र रखने के लिए संयुक्त निगरानी प्रकोष्ठ बनाया।

मुख्य बातें

KNO और ZRO ने 12 मई 2026 को संयुक्त बयान में विधायिका सहित अलग केंद्र शासित प्रदेश की माँग दोहराई।
दोनों संगठनों ने CM युमनम खेमचंद सिंह की चुराचांदपुर यात्रा के दौरान सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का फैसला किया।
सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाली सोशल मीडिया सामग्री पर नज़र रखने के लिए 'संयुक्त निगरानी प्रकोष्ठ' का गठन किया गया।
कुल 23 भूमिगत संगठन — UPF के तहत 8 और KNO के तहत 15 — अगस्त 2008 से 'ऑपरेशन्स पर रोक' समझौते के तहत हैं।
'कूकी-जो' बनाम 'कूकी-जोमी' नामकरण विवाद पर आंतरिक चर्चा के बाद अगली बैठक में निर्णय होगा।

मणिपुर में कूकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO) और जोमी रीयूनिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन (ZRO) ने 12 मई 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया कि 3 मई, 2023 के बाद अपनाया गया उनका साझा राजनीतिक लक्ष्य — विधायिका सहित एक अलग केंद्र शासित प्रदेश की माँग — अभी भी पूरी तरह कायम है। दोनों संगठनों ने कहा कि यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक कोई नया सामूहिक निर्णय नहीं लिया जाता।

बैठक और संयुक्त बयान

यह घोषणा जोमी रीयूनिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष के आवास पर आयोजित एक संयुक्त बैठक के बाद जारी की गई। KNO कई कूकी-जो विद्रोही गुटों का साझा संगठन है, जबकि ZRO यूनाइटेड पीपल्स फ्रंट (UPF) का हिस्सा है। दोनों संगठन फिलहाल भारत सरकार के साथ 'ऑपरेशन्स पर रोक' समझौते के तहत बने हुए हैं, जो अगस्त 2008 से लागू है।

CM की चुराचांदपुर यात्रा का बहिष्कार

बैठक में दोनों संगठनों ने सर्वसम्मति से तय किया कि मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह की चुराचांदपुर की प्रस्तावित यात्रा के दौरान वे किसी भी ऐसे कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे जिसमें मुख्यमंत्री शामिल हों। चुराचांदपुर एक पहाड़ी जिला है जहाँ मुख्य रूप से कूकी-जो समुदाय के लोग निवास करते हैं।

सांप्रदायिक वैमनस्य पर नज़र रखने के लिए निगरानी प्रकोष्ठ

दोनों संगठनों ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म — जिनमें फेसबुक पेज भी शामिल हैं — के ज़रिए कथित तौर पर फैलाई जा रही सांप्रदायिक वैमनस्य की सामग्री पर कड़ी नज़र रखने का फैसला किया। इसके लिए एक 'संयुक्त निगरानी प्रकोष्ठ' का गठन किया गया है, जिसमें दोनों संगठनों के सूचना और जनसंपर्क विभागों के सदस्य शामिल हैं। बयान के अनुसार, दोनों संगठनों के सचिव मिलकर इस प्रकोष्ठ के कामकाज की देखरेख और समन्वय करेंगे।

'कूकी-जो' बनाम 'कूकी-जोमी' — नामकरण विवाद

'कूकी-जो' शब्द के साझा उपयोग पर — जिसे जोमी पक्ष कथित तौर पर अस्वीकार्य मानता है — KNO की कैबिनेट पहले उन नेताओं के साथ आंतरिक चर्चा करेगी जो इस शब्द के समर्थक हैं। इसके बाद अगली संयुक्त बैठक में इस मुद्दे को फिर से रखा जाएगा। जोमी पक्ष के नेताओं ने व्यापक साझा राजनीतिक आंदोलन को पहचान देने के लिए 'कूकी-जोमी' शब्द के उपयोग का सुझाव दिया है।

केंद्रीय कार्य समिति और आगे की राह

चल रही राजनीतिक बातचीत के समन्वय के लिए एक 'केंद्रीय कार्य समिति' बनाने के प्रस्ताव पर ZRO की कैबिनेट पहले आंतरिक रूप से विचार-विमर्श करेगी, उसके बाद इसे अगली बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा। गौरतलब है कि फिलहाल कुल 23 भूमिगत संगठन — जिनमें UPF के तहत 8 और KNO के तहत 15 संगठन शामिल हैं — भारत सरकार के साथ 'ऑपरेशन्स पर रोक' समझौते के तहत बने हुए हैं। यह मणिपुर संकट के राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया का हिस्सा है, और अगली संयुक्त बैठक में इन मुद्दों पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह दो समुदायों की अलग राजनीतिक पहचान और नेतृत्व के दावे का प्रतिबिंब है। जब तक केंद्र सरकार इन संगठनों के साथ ठोस राजनीतिक बातचीत नहीं करती, 'ऑपरेशन्स पर रोक' समझौता महज एक युद्धविराम बनकर रह जाएगा — स्थायी समाधान नहीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KNO और ZRO की केंद्र शासित प्रदेश की माँग क्या है?
KNO और ZRO चाहते हैं कि मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों को विधायिका सहित एक अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए। यह माँग 3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से उनका साझा राजनीतिक लक्ष्य बनी हुई है।
CM युमनम खेमचंद सिंह की चुराचांदपुर यात्रा का बहिष्कार क्यों किया जा रहा है?
दोनों संगठनों ने सर्वसम्मति से तय किया है कि वे CM की चुराचांदपुर यात्रा के दौरान किसी भी सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। यह निर्णय राज्य सरकार और पहाड़ी समुदायों के बीच जारी राजनीतिक तनाव को दर्शाता है।
'ऑपरेशन्स पर रोक' समझौता क्या है और इसमें कितने संगठन शामिल हैं?
यह भारत सरकार और मणिपुर के भूमिगत संगठनों के बीच अगस्त 2008 से लागू युद्धविराम समझौता है। फिलहाल कुल 23 संगठन इसके तहत हैं — UPF के तहत 8 और KNO के तहत 15।
संयुक्त निगरानी प्रकोष्ठ का काम क्या होगा?
यह प्रकोष्ठ सोशल मीडिया — विशेष रूप से फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म — पर कथित तौर पर फैलाई जा रही सांप्रदायिक वैमनस्य की सामग्री पर नज़र रखेगा। इसमें KNO और ZRO दोनों के सूचना और जनसंपर्क विभागों के सदस्य शामिल हैं।
'कूकी-जो' और 'कूकी-जोमी' नामकरण विवाद क्या है?
जोमी पक्ष 'कूकी-जो' शब्द को कथित तौर पर अस्वीकार्य मानता है और उसने 'कूकी-जोमी' शब्द के उपयोग का सुझाव दिया है। KNO की कैबिनेट इस पर पहले आंतरिक चर्चा करेगी और फिर अगली संयुक्त बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस