23 अक्टूबर 2026
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लद्दाख सिविल सोसायटी फोरम का सोनम वांगचुक पर आरोप: बातचीत का एजेंडा हाईजैक किया

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लद्दाख सिविल सोसायटी फोरम का सोनम वांगचुक पर आरोप: बातचीत का एजेंडा हाईजैक किया

सारांश

लद्दाख के भीतर ही एक नई दरार — सिविल सोसायटी फोरम का कहना है कि सोनम वांगचुक ने जमीन, नौकरी और संस्कृति के मूल मुद्दे से ध्यान भटका दिया है, और एलएबी-केडीए पूरे लद्दाख की नुमाइंदगी का दावा नहीं कर सकते। यह आंदोलन के अंदर से उठी वह आवाज़ है जो केंद्र के साथ वार्ता की दिशा और नेतृत्व, दोनों पर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

लद्दाख सिविल सोसायटी फोरम ने 23 अक्टूबर 2026 को लेह में बैठक कर सोनम वांगचुक पर बातचीत का एजेंडा हाईजैक करने का आरोप लगाया।
पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग ने कहा कि एलएबी-केडीए नेताओं ने एमएचए के मसौदा प्रस्ताव को बिना ठीक से जाँचे ही खारिज कर दिया।
22 अक्टूबर को नई दिल्ली में निर्धारित एमएचए बैठक देरी और गलत जानकारी के कारण नहीं हो सकी।
फोरम ने एलएबी के पुनर्गठन और सभी जिलों में पंचायत व लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के शीघ्र चुनाव की माँग की।
फोरम का दावा है कि एलएबी और केडीए अब पूरे लद्दाख की प्रतिनिधि संस्थाएँ नहीं रहीं।

लद्दाख के सिविल सोसायटी फोरम ने 23 अक्टूबर 2026 को लेह में हुई अपनी बैठक के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के साथ चल रही बातचीत में जमीन, नौकरी और सांस्कृतिक सुरक्षा से जुड़े मूल एजेंडे को हाईजैक कर लिया है। फोरम ने यह भी दावा किया कि लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) अब लद्दाख के सभी जिलों की सामूहिक आवाज का प्रतिनिधित्व करने की स्थिति में नहीं हैं।

बैठक में क्या हुआ

लेह में आयोजित इस बैठक में पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग, पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद रिग्जेन स्पालबर और पूर्व एमएलसी त्सेरिंग साम्पेल शामिल हुए। इसके अलावा थिक्से और थुक्से रिम्पोछे के प्रतिनिधि, विभिन्न मठों के भिक्षु, लद्दाख बौद्ध संघ के सदस्य, नंबरदार, सेवानिवृत्त अधिकारी और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

मुख्य आरोप और चिंताएँ

फोरम ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए), एलएबी और केडीए के बीच बातचीत में हो रही लगातार देरी पर गहरी चिंता जताई। थुपस्तान छेवांग ने आरोप लगाया कि एलएबी और केडीए के नेताओं ने विकल्पों की ठीक से जाँच किए बिना ही एमएचए के मसौदा प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली बैठकों के नतीजों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी।

छेवांग ने 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में निर्धारित एमएचए की बैठक न हो पाने के लिए बार-बार की जा रही देरी, गलत जानकारी के प्रसार और पहले बनी सहमति की अनदेखी को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका लेह और वहाँ के बौद्ध समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

बातचीत की प्रक्रिया पर सवाल

फोरम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बातचीत की प्रक्रिया को देरी की रणनीति और टकराव की राजनीति का बंधक नहीं बनने दिया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल करने और लोकसेवा आरक्षण जैसी माँगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष जारी है।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने इससे पहले भी लद्दाख के अधिकारों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था और उन्हें हिरासत में भी लिया गया था। अब फोरम का यह आरोप उस आंदोलन के भीतर ही एक नया विभाजन उजागर करता है।

माँगें और प्रस्तावित सुधार

फोरम ने सभी जिलों में जल्द से जल्द पंचायत और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के चुनाव कराने की माँग की। साथ ही चुनी गई परिषदों को अधिक अधिकार और शक्तियाँ देने की बात कही। फोरम ने सभी जिलों से लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एलएबी के पुनर्गठन की भी माँग उठाई।

आगे की राह

फोरम ने बातचीत जारी रखने की अपील करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा जमीनी हकीकत को देखते हुए एलएबी और केडीए का यह दावा अब टिकाऊ नहीं रह गया कि वे पूरे लद्दाख की ओर से बोलते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस नई आंतरिक दरार के बीच लद्दाख के प्रतिनिधित्व के प्रश्न को किस तरह सुलझाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो केंद्र सरकार के लिए एकल प्रतिनिधि मंच को मान्यता देने से बचना आसान हो जाता है। सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय पहचान ने लद्दाख की माँगों को मीडिया में जगह दिलाई, लेकिन यही पहचान अब स्थानीय नेतृत्व के लिए असहज बन गई है। असली सवाल यह है कि क्या यह फोरम की आवाज़ एक वैकल्पिक नेतृत्व की ओर पहला कदम है, या यह विभाजन लद्दाख की सौदेबाज़ी की शक्ति को और कमज़ोर कर देगा — ऐसे वक्त में जब छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा अभी भी अधर में है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लद्दाख सिविल सोसायटी फोरम ने सोनम वांगचुक पर क्या आरोप लगाए हैं?
फोरम का आरोप है कि सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के साथ चल रही बातचीत में जमीन, नौकरी और सांस्कृतिक सुरक्षा के मूल एजेंडे को हाईजैक कर लिया है। फोरम के अनुसार, बातचीत की दिशा मूल माँगों से भटक गई है और इसके लिए वांगचुक की भूमिका को जिम्मेदार माना जा रहा है।
एलएबी और केडीए के प्रतिनिधित्व पर सवाल क्यों उठाए गए?
फोरम का कहना है कि लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस अब लद्दाख के सभी जिलों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। फोरम ने माँग की है कि एलएबी का पुनर्गठन सभी जिलों से लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल करके किया जाए।
22 अक्टूबर को दिल्ली में एमएचए की बैठक क्यों नहीं हो सकी?
पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग के अनुसार, बार-बार की जा रही देरी, गलत जानकारी का प्रसार और पहले बनी सहमति की अनदेखी के कारण 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में निर्धारित गृह मंत्रालय की बैठक नहीं हो सकी। उन्होंने इसके लिए टकराव की राजनीति को भी जिम्मेदार ठहराया।
फोरम ने क्या माँगें रखी हैं?
फोरम ने लद्दाख के सभी जिलों में जल्द से जल्द पंचायत और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के चुनाव कराने, चुनी गई परिषदों को अधिक शक्तियाँ देने और एलएबी के लोकतांत्रिक पुनर्गठन की माँग की है। साथ ही, केंद्र के साथ बातचीत जारी रखने की अपील भी की गई है।
इस विवाद का लद्दाख की आज़ादी और अधिकारों की माँग पर क्या असर पड़ेगा?
आलोचकों का कहना है कि लद्दाख आंदोलन के भीतर यह आंतरिक दरार केंद्र सरकार के साथ सौदेबाज़ी की ताकत को कमज़ोर कर सकती है। जब तक लद्दाख के सभी हिस्सों का एक सर्वमान्य प्रतिनिधित्व नहीं बनता, छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य के दर्जे की माँग के लिए एकीकृत दबाव बनाना मुश्किल होगा।
राष्ट्र प्रेस
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