लैंड जिहाद से ST महिलाओं की ज़मीन हड़पी जा रही है, UCC ही एकमात्र हल: डिप्टी CM विजय शर्मा
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 5 अक्टूबर 2026 को रायपुर में कहा कि जिसे 'लैंड जिहाद' कहा जा रहा है, वह अनुसूचित जनजाति (ST) समाज की महिलाओं की संपत्ति हड़पने का एक सुनियोजित तरीका है — और इस पर रोक लगाने का एकमात्र प्रभावी उपाय यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करना है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने की कवायद तेज़ होने की ख़बरें हैं।
लैंड जिहाद पर विजय शर्मा का बयान
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जहाँ किसी व्यक्ति को एक से अधिक विवाह करने की कानूनी छूट होती है, वहाँ कुछ लोग विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति समाज की महिलाओं से विवाह कर उनकी पैतृक संपत्तियाँ अपने नाम करवा लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह दूसरी-तीसरी शादियाँ होती हैं और कालांतर में वह संपत्ति — चाहे शहरी हो या ग्रामीण — आदिवासी परिवारों के हाथ से निकल जाती है।
शर्मा ने कहा, 'यह मूलतः संविधान की भावना के विपरीत है। यदि इसे समझकर इस विषय पर काम शुरू किया गया है और कोई समाधान खोजा गया है, तो यह अच्छी बात है।'
बस्तर में दिव्यांग पुनर्वास शिविर का ऐलान
इसी प्रेस वार्ता में विजय शर्मा ने बस्तर संभाग में चल रहे पुनर्वास अभियान का भी विवरण दिया। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में 5 से 7 अक्टूबर तक शिविर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिलों के गाँवों में ग्राम सभाएँ की जा रही हैं।
शर्मा के अनुसार, आईईडी विस्फोटों या अन्य कारणों से दिव्यांग हुए लोगों की पहचान कर उन्हें कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए अब तक 3,600 लोगों का पंजीकरण हो चुका है। इसी क्रम में 15, 16 और 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में भी बड़ा आयोजन होगा, जिसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों के लोग शामिल होंगे। इस अभियान में अब तक एक हज़ार से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को इस कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित किया। शर्मा ने कहा कि साय सरकार उन सभी लोगों के साथ खड़ी है जिनके आईईडी ब्लास्ट में पैर कट गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जज के बयान पर प्रतिक्रिया
एक अन्य सवाल के जवाब में विजय शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि यह एक 'पारंपरिक और बुनियादी सिद्धांत' है — अपराधियों को पुलिस को देखकर डर लगना चाहिए, जबकि कानून का पालन करने वाले नागरिकों को भरोसा और विश्वास महसूस होना चाहिए। उन्होंने इस सिद्धांत को पूरी सख्ती से लागू करने की वकालत की।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: UCC पर देशव्यापी बहस हो
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल में UCC लागू होने की संभावना पर कहा, 'अगर इसे लागू किया गया तो क्या होगा? क्या आसमान गिर पड़ेगा? क्या देश बँट जाएगा? कई राज्यों में UCC पहले से ही लागू है, तो इससे क्या फर्क पड़ता है? अगर भाजपा इसे चाहती है तो उन्हें इसे पूरे देश में लागू करना चाहिए।'
चौधरी ने यह भी कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग UCC लागू करने के बजाय सभी से व्यापक विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमारा देश विविधता में एकता वाला देश है। यहाँ अलग-अलग धर्मों और भाषाओं के लोग रहते हैं, जिनकी अपनी परंपराएँ, संस्कृतियाँ और पर्सनल लॉ हैं। इस विविधता को ध्यान में रखते हुए UCC पर ठीक से चर्चा होनी चाहिए।'
आगे की राह
UCC पर राष्ट्रीय बहस तेज़ होती जा रही है। गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जहाँ UCC लागू किया गया है, और अब पश्चिम बंगाल में भी इसकी तैयारी की चर्चा है। आलोचकों का कहना है कि ST महिलाओं की ज़मीन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए UCC के साथ-साथ मौजूदा आदिवासी भूमि कानूनों को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाना ज़रूरी है।