जम्मू विश्वविद्यालय में एलजी मनोज सिन्हा: एआई युग में भी जीवन के फैसले इंसानों के हाथ में रहने चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 22 सितंबर 2026 को जम्मू विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस दौर में भी मानवीय गरिमा, आजीविका, स्वास्थ्य और स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले निर्णय हमेशा जिम्मेदार मनुष्यों द्वारा ही लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन शिक्षक की भूमिका को वह निश्चित रूप से बदल देगी।
नई सुविधाओं का उद्घाटन
उपराज्यपाल सिन्हा ने इस अवसर पर जम्मू विश्वविद्यालय में आधुनिक खेल परिसर, शूटिंग रेंज, क्रिकेट स्टेडियम के लिए हाई-मास्ट लाइट और लगभग ₹10 करोड़ की लागत से विकसित तवी गेस्ट हाउस परिसर समेत कई सुविधाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने कुलपति और हितधारकों को बधाई देते हुए कहा कि बुनियादी ढाँचा महत्वपूर्ण है, परंतु किसी संस्थान का सच्चा परिवर्तन उसके भीतर पोषित मूल्यों, विचारों और नवाचारों में निहित होता है।
एआई के खतरों पर चेतावनी
उपराज्यपाल ने श्रोताओं को याद दिलाया कि वर्तमान पीढ़ी परिवर्तन की ऐसी अभूतपूर्व तीव्रता का सामना कर रही है जो पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा कि एआई एक बहुआयामी तकनीक है जो स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकती है और इससे लाभकारी तथा हानिकारक दोनों परिणाम उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी — 'जिस दिन प्रौद्योगिकी मानवता की स्वामी बन जाएगी, हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।'
उन्होंने कहा, 'मशीनें गणना कर सकती हैं, लेकिन वे भावनाएं नहीं व्यक्त कर सकतीं। मशीनें भविष्यवाणी कर सकती हैं, लेकिन वे निर्णयों की जिम्मेदारी नहीं उठा सकतीं। मशीनें करुणा की भाषा की नकल कर सकती हैं, लेकिन वे आधी रात को किसी मरीज के बिस्तर के पास नहीं खड़ी होतीं, न ही वे न्यायाधीश के फैसले का नैतिक भार वहन कर सकती हैं।'
मानवीय जवाबदेही पर बल
सिन्हा ने अपना स्पष्ट मत रखते हुए कहा, 'प्रत्येक निर्णय जो किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता, आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा या गरिमा को गहराई से प्रभावित करता है, उसके पीछे एक इंसान का होना आवश्यक है — जो निर्णय को समझता हो, उसकी जिम्मेदारी स्वीकार करता हो और जिसे जवाबदेह ठहराया जा सके।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश भर में एआई-आधारित शासन और न्यायिक सहायता को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
उच्च शिक्षा की पाँच चुनौतियाँ
उपराज्यपाल ने उच्च शिक्षा के लिए पाँच प्रमुख चुनौतियाँ रेखांकित कीं — पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता को परिवर्तन की गति के साथ तेजी से अनुकूलित करना, छात्रों में जिज्ञासा और तर्कशक्ति को प्राथमिकता देना, मौलिक उत्तरों की खोज को बढ़ावा देना, प्रौद्योगिकी को ग्रामीण और शहरी शिक्षार्थियों के बीच की खाई न बढ़ाने देना, और भविष्य के शिक्षक को मात्र सूचना-प्रदाता से आगे गुरु, मार्गदर्शक और प्रेरक बनाना।
युवाओं के लिए छह मार्गदर्शक संदेश
छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए सिन्हा ने छह संदेश साझा किए: आजीवन सीखने को अपनाएँ; रचनात्मकता और सहानुभूति जैसी विशिष्ट मानवीय क्षमताओं को विकसित करें; विभिन्न विषयों के बीच सेतु बनाएँ; राष्ट्रीय विकास में योगदान दें; शिक्षा और खेल में संतुलन बनाए रखें; और परंपराओं तथा मूल्यों से जुड़े रहें। उन्होंने कहा, 'ईमानदार हाथों में शक्तिशाली उपकरण महान कार्य कर सकते हैं, लेकिन गलत हाथों में वही उपकरण गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं।' गौरतलब है कि वर्तमान युवा पीढ़ी पहली ऐसी पीढ़ी है जो एआई को अपने साथी के रूप में पाकर बड़ी हो रही है, और उन पर ही मानवता के समृद्ध भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी है।