6 नवंबर 2026
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दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा: निष्पक्ष चुनाव आयोग और राम मंदिर चंदे का हिसाब माँगा

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दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा: निष्पक्ष चुनाव आयोग और राम मंदिर चंदे का हिसाब माँगा

सारांश

उज्जैन से अयोध्या तक की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर निकले दिग्विजय सिंह ने दोहरा मोर्चा खोला — एक तरफ ईवीएम और चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल, दूसरी तरफ कथित तौर पर ₹1,400 करोड़ से अधिक जमा राम मंदिर चंदे का हिसाब। 11 नवंबर से यात्रा फिर शुरू होगी।

मुख्य बातें

दिग्विजय सिंह ने 6 नवंबर 2026 को कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष चुनाव आयोग अनिवार्य है।
उन्होंने ईवीएम सॉफ्टवेयर सार्वजनिक करने, बैलेट पेपर से चुनाव और वीवीपैट पर्ची हाथ में देने की माँग रखी।
पश्चिम बंगाल में 70 लाख मतदाताओं के नाम सूची से काटने का आरोप लगाया।
राम मंदिर के लिए कथित तौर पर ₹1,400–₹1,700 करोड़ चंदा एकत्र हुआ, लेकिन रिटर्न में केवल ₹8.29 करोड़ दिखाया गया — यह माँग 1993 से चली आ रही है।
यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई; 11 नवंबर से राघौगढ़ से पुनः शुरू होगी।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 6 नवंबर 2026 को उज्जैन से शुरू हुई सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष चुनाव आयोग का होना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा के दो केंद्रीय उद्देश्य हैं — चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राम मंदिर निर्माण के नाम पर एकत्र चंदे का सार्वजनिक हिसाब माँगना।

चुनावी पारदर्शिता पर मुख्य माँगें

दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि देश में लोकतंत्र बचेगा या नहीं। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, वोटर लिस्ट और ईवीएम की पारदर्शिता के सवाल उठाए। उनके अनुसार, प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार मिलना चाहिए कि उनका वोट सूची में दर्ज हो और वह मतदान उसी उम्मीदवार को जाए, जिसे वे देना चाहते हैं।

उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता को वीवीपैट की पर्ची केवल सात सेकेंड के लिए दिखाने की बजाय सीधे हाथ में दी जानी चाहिए, ताकि वह स्वयं अपने मतदान की पुष्टि कर सके। उन्होंने ईवीएम सॉफ्टवेयर को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने की भी माँग की।

सिंह ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहाँ 70 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए और चुनाव के बाद पुनः जोड़े गए — जिससे मतदाताओं के मताधिकार का नुकसान हुआ।

राम मंदिर चंदे का हिसाब — पुरानी माँग, नई यात्रा

यात्रा के दूसरे उद्देश्य पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र चंदे का हिसाब माँगने की उनकी माँग नई नहीं है। उन्होंने बताया कि 1993 में जब वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब भी उन्होंने राम मंदिर शिलापूजन हेतु संग्रहीत धनराशि का हिसाब माँगा था — और उस समय उन्होंने स्वयं भी चंदा दिया था।

उनके अनुसार, उस दौर में देशभर से कथित तौर पर करीब ₹1,400 से ₹1,700 करोड़ का चंदा एकत्र होने की चर्चा थी और लोगों ने चाँदी की शिलाएँ तक भेंट की थीं, लेकिन रिटर्न में केवल ₹8.29 करोड़ की राशि दिखाई गई। उन्होंने तत्कालीन पुजारी महंत बाबा लालदास का भी उल्लेख किया, जिन्होंने विश्व हिंदू परिषद से चंदे का हिसाब माँगा था। सिंह के अनुसार, सितंबर 1993 में उनकी हत्या कर दी गई और आज तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्हें किसने मारा।

सनातन धर्म और हिंदुत्व पर वैचारिक रुख

दिग्विजय सिंह ने कहा कि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के माध्यम से सनातन धर्म की व्यापक परिभाषा को सामने रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हिंदुत्व की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदुत्व और हिंदू धर्म को एक नहीं समझना चाहिए। उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि सावरकर ने भी हिंदुत्व का धर्म से सीधा संबंध नहीं माना था।

यात्रा का मार्ग और आगे का कार्यक्रम

गौरतलब है कि 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद यात्रा शुरू हुई थी। यात्रा शाजापुर और राजगढ़ होते हुए गुना जिले में पहुँची और दिग्विजय सिंह के गृह नगर राघौगढ़ तक आई। दीपावली के कारण पाँच दिन के विराम के बाद 11 नवंबर से पदयात्रा पुनः राघौगढ़ से शुरू होगी और अंततः अयोध्या तक पहुँचेगी।

यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब विपक्ष ईवीएम और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को लेकर राजनीतिक रूप से सक्रिय है। आगामी चुनावी चक्र में यह यात्रा कांग्रेस की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तीन दशकों में कोई ठोस जवाबदेही नहीं आई — जो खुद इस माँग की सीमाओं को उजागर करता है। ईवीएम पर सवाल उठाना विपक्ष का परिचित मोर्चा है, पर बिना तकनीकी साक्ष्य के यह कथा जनता के बीच विश्वास के बजाय संशय ही बोती है। असली परीक्षा यह होगी कि यात्रा अयोध्या पहुँचने के बाद क्या ठोस जवाबदेही तंत्र या कानूनी कदम सामने आता है — या यह केवल एक राजनीतिक संदेश अभियान बनकर रह जाती है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा क्या है और इसके उद्देश्य क्या हैं?
यह मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा उज्जैन से अयोध्या तक निकाली गई पदयात्रा है, जो 20 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई। इसके दो मुख्य उद्देश्य हैं — चुनाव आयोग और ईवीएम की पारदर्शिता की माँग तथा राम मंदिर निर्माण के नाम पर एकत्र चंदे का सार्वजनिक हिसाब।
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे को लेकर क्या आरोप लगाए?
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए कथित तौर पर ₹1,400 से ₹1,700 करोड़ का चंदा एकत्र हुआ, लेकिन रिटर्न में केवल ₹8.29 करोड़ दिखाया गया। उनके अनुसार यह माँग नई नहीं है — वे 1993 से यह सवाल उठाते आ रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने ईवीएम पर क्या माँगें रखीं?
उन्होंने ईवीएम सॉफ्टवेयर को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने, बैलेट पेपर से चुनाव कराने और वीवीपैट पर्ची मतदाता के हाथ में देने की माँग रखी। उनका कहना है कि सात सेकेंड का दर्शन पर्याप्त नहीं है।
यात्रा आगे कहाँ जाएगी और कब?
दीपावली के कारण पाँच दिन के विराम के बाद 11 नवंबर 2026 से यात्रा राघौगढ़ से पुनः शुरू होगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव अयोध्या है।
महंत बाबा लालदास कौन थे और दिग्विजय सिंह ने उनका जिक्र क्यों किया?
महंत बाबा लालदास तत्कालीन पुजारी थे जिन्होंने विश्व हिंदू परिषद से राम मंदिर चंदे का हिसाब माँगा था। दिग्विजय सिंह के अनुसार सितंबर 1993 में उनकी हत्या कर दी गई और आज तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि हत्यारा कौन था।
राष्ट्र प्रेस
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