लॉकेट चटर्जी का ममता पर हमला: 'टाइगर से CJP तक का सफर उनका पतन दर्शाता है'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता और पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी ने 2 नवंबर 2026 को कोलकाता में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली के दौरान पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो नेता कभी खुद को 'रॉयल बंगाल टाइगर' कहती थीं, वे आज कथित तौर पर उन दलों के साथ समझौता करने को मजबूर हो गई हैं जिन्हें वे पहले तुच्छ समझती थीं — और यह उनके राजनीतिक पतन की स्पष्ट निशानी है।
रैली में क्या बोलीं लॉकेट चटर्जी
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में आयोजित इस रैली में चटर्जी ने कहा, 'यह पूरे देश में चल रहा है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रविवार को हरियाणा में कार्यक्रम किया था। आज भागलपुर में कार्यक्रम करके यहाँ आएंगे। पूरे देश में हम चाहते हैं कि लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी को राजनीति से ऊपर उठकर आना होगा। देशविरोधी शक्तियाँ खुद को बचाने के लिए एक-दूसरे का हाथ थाम रही हैं।'
उन्होंने आगे कहा कि ममता बनर्जी के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है। चटर्जी के अनुसार, जो नेता पहले कांग्रेस को हेय दृष्टि से देखती थीं, वे आज उन्हें 'मैडम' कहकर संबोधित कर रही हैं — 'मतलब यह सीजन के बदलने जैसा है।'
तृणमूल कांग्रेस पर वैचारिक संकट का आरोप
लॉकेट चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर वैचारिक दिवालियेपन का आरोप लगाते हुए कहा कि इस दल की कभी कोई स्थायी नीति या स्पष्ट विचारधारा नहीं रही। उनके अनुसार हर 'सीजन' में गठबंधन और नीतियाँ बदल जाती हैं।
उन्होंने कहा, 'दल लगभग टूट चुका है। बहुत सारे लोगों ने उन्हें धोखा दिया है। जो पहले मुख्यमंत्री थीं, उन्हें अब विश्राम लेना चाहिए।' चटर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को उकसाने का प्रयास किया और 'तुष्टिकरण की राजनीति' की।
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया
नितिन नवीन के बयानों का समर्थन करते हुए लॉकेट चटर्जी ने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में 'परिवर्तन हो चुका है।' उन्होंने वादा किया कि भ्रष्टाचार समाप्त होगा, फिल्म महोत्सव निष्पक्ष तरीके से आयोजित होंगे और प्रतिभाशाली लोगों को सिंडिकेटबाजी के बिना अवसर मिलेंगे।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक अर्थ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP और TMC के बीच राजनीतिक संघर्ष तीव्र हो रहा है। 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' जैसी रैलियाँ BJP की राज्य में संगठनात्मक पुनर्संरचना के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही हैं।
गौरतलब है कि यह रैली ऐसे समय में हो रही है जब विपक्षी गठबंधन की राजनीति पूरे देश में नई करवट ले रही है और क्षेत्रीय दल केंद्र-विरोधी मोर्चे बनाने की कोशिश कर रहे हैं। चटर्जी के बयान इसी व्यापक राजनीतिक परिदृश्य की प्रतिक्रिया के रूप में देखे जा सकते हैं।