2 नवंबर 2026
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अयोध्या: 2 नवंबर 1990 की गोलीबारी में शहीद कारसेवकों को दिगंबर अखाड़े में श्रद्धांजलि

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अयोध्या: 2 नवंबर 1990 की गोलीबारी में शहीद कारसेवकों को दिगंबर अखाड़े में श्रद्धांजलि

सारांश

36 वर्ष पहले 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर हुई पुलिस गोलीबारी की बरसी पर दिगंबर अखाड़े में शोक सभा हुई। मंत्री, मेयर और संत-महंत एकजुट हुए — राम मंदिर के निर्माण के बाद पहली बार यह स्मृति-दिवस एक भव्य मंदिर की छाया में मनाया गया।

मुख्य बातें

2 नवंबर 2026 को अयोध्या के दिगंबर अखाड़े में 1990 की गोलीबारी में शहीद कारसेवकों की स्मृति में शोक सभा आयोजित हुई।
सभा में राम मंदिर धार्मिक समिति सदस्य राजकुमार दास , मेयर गिरीश पति त्रिपाठी और प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही शामिल हुए।
मंत्री शाही ने 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 की घटनाओं को 'भारतीय इतिहास का काला धब्बा' बताया।
राजकुमार दास ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से 500 वर्षों के विवाद का समाधान हुआ और सनातन धर्म की पहचान सुरक्षित रही।
भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद यह पहली बड़ी वार्षिक स्मृति सभा अयोध्या में आयोजित की गई।

अयोध्या के दिगंबर अखाड़े में 2 नवंबर 2026 को एक शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें 2 नवंबर 1990 को राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई पुलिस गोलीबारी में शहीद हुए कारसेवकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस सभा में राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास, अयोध्या के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी और उत्तर प्रदेश के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे।

शोक सभा का आयोजन

2 नवंबर 1990 को श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान निहत्थे कारसेवकों पर हुई पुलिस गोलीबारी की 36वीं बरसी पर यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। अयोध्या के प्रमुख संत-महंतों ने एकत्र होकर उन कारसेवकों को नमन किया जिन्होंने राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में अपने प्राण न्यौछावर किए थे।

राजकुमार दास का वक्तव्य

राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने कहा, 'शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले... वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।' उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए चले आंदोलन में जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, आज का कार्यक्रम उन्हें नमन-वंदन करने का अवसर था। दास ने यह भी जोड़ा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से 500 वर्षों के विवाद का समाधान हुआ और भव्य राम मंदिर का निर्माण संपन्न हुआ।

मेयर और मंत्री की प्रतिक्रिया

अयोध्या के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि 2 नवंबर 1990 को जिन कारसेवकों ने राम मंदिर के लिए बलिदान दिया, उन्हें आज की श्रद्धांजलि सभा में सभी उच्च संत-महंतों ने आगे बढ़कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उस दिन को 'काला दिन' बताते हुए कहा कि राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए कारसेवकों पर गोलियाँ चलाई गई थीं।

प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 की घटनाएँ भारतीय इतिहास के लिए एक काला धब्बा हैं। उन्होंने कहा, 'आज उन हुतात्माओं को मैं नमन करता हूँ, जिन्होंने श्री राम जन्मभूमि के लिए अपना बलिदान उस आंदोलन में दिया।'

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि 1990 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के तहत जुटे कारसेवकों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी, जिसमें कई कारसेवक मारे गए थे। यह घटना भारतीय राजनीति और हिंदू धार्मिक आंदोलन के इतिहास में एक संवेदनशील अध्याय के रूप में दर्ज है। वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हो चुकी है।

आगे की राह

इस शोक सभा के माध्यम से राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी स्मृतियों को जीवित रखने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतिवर्ष 2 नवंबर को इस तरह के आयोजन अयोध्या में होते रहे हैं और धार्मिक तथा राजनीतिक हलकों में इस तिथि का विशेष महत्त्व बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इतिहास की पीड़ा को वर्तमान की पहचान से जोड़ती है। ध्यान देने योग्य है कि इस सभा में सरकारी मंत्री और निर्वाचित जनप्रतिनिधि की उपस्थिति इस धार्मिक-सामाजिक आयोजन को एक राजनीतिक आयाम भी देती है। मुख्यधारा की कवरेज जो प्रायः चूक जाती है वह यह है कि 1990 की घटना के पीड़ितों की सटीक संख्या अभी भी आधिकारिक रूप से विवादित है और उस पर कोई स्वतंत्र जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2 नवंबर 1990 को अयोध्या में क्या हुआ था?
2 नवंबर 1990 को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान निहत्थे कारसेवकों पर पुलिस गोलीबारी हुई थी, जिसमें कई कारसेवकों की जान गई थी। यह घटना 30 अक्टूबर 1990 की एक अन्य गोलीबारी के साथ मिलकर भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक संवेदनशील अध्याय बन गई।
दिगंबर अखाड़े में शोक सभा में कौन शामिल हुए?
2 नवंबर 2026 को आयोजित इस शोक सभा में राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास, अयोध्या के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी और उत्तर प्रदेश के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही के अलावा अयोध्या के वरिष्ठ संत-महंत उपस्थित रहे।
राम मंदिर निर्माण के बाद इस स्मृति दिवस का क्या महत्त्व है?
भव्य राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह पहली बड़ी वार्षिक श्रद्धांजलि सभा है जो उन कारसेवकों की स्मृति में हो रही है जिन्होंने मंदिर निर्माण के आंदोलन में प्राण दिए। राजकुमार दास के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से 500 वर्षों के विवाद का समाधान हुआ और शहीदों का बलिदान सफल हुआ।
मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस घटना पर क्या कहा?
प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 की घटनाओं को 'भारतीय इतिहास का काला धब्बा' बताया। उन्होंने कहा कि निहत्थे कारसेवकों पर गोलियाँ चलाई गई थीं और उन्होंने उन हुतात्माओं को नमन किया जिन्होंने श्री राम जन्मभूमि के लिए बलिदान दिया।
इस तरह की स्मृति सभाएँ अयोध्या में कब से हो रही हैं?
2 नवंबर की तिथि पर अयोध्या में कारसेवकों की स्मृति में आयोजन प्रतिवर्ष होते रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े धार्मिक और राजनीतिक संगठन इस दिन को 'बलिदान दिवस' के रूप में मनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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